BT Infra Summit 2026: 300 GW रिन्यूएबल क्षमता की ओर बढ़ता भारत, अब स्टोरेज और ग्रीन फ्यूल पर फोकस
भारत की रिन्यूएबल एनर्जी यात्रा अब सिर्फ नई क्षमता जोड़ने तक सीमित नहीं रह सकती। ReNew के सुमंत सिन्हा के मुताबिक, आगे भारत को बैटरी स्टोरेज, घरेलू मैन्युफैक्चरिंग, ग्रीन हाइड्रोजन और इलेक्ट्रिक ट्रांसपोर्ट पर एक साथ काम करना होगा।

In Short
- भारत करीब 300 गीगावॉट रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता के करीब पहुंच गया है।
- ग्रिड संतुलन के लिए बैटरी और पंप्ड हाइड्रो स्टोरेज बढ़ाना जरूरी है।
- आयात घटाने के लिए देश में उपकरण निर्माण और ग्रीन फ्यूल पर जोर देना होगा।
India Renewable Energy: भारत ने रिन्यूएबल एनर्जी के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ते हुए बड़ी क्षमता तैयार कर ली है। अब देश की चुनौती सिर्फ ज्यादा सोलर और विंड पावर प्रोजेक्ट लगाने की नहीं है। आगे की जरूरत बिजली को स्टोर करने, विदेश से आने वाले उपकरणों पर निर्भरता कम करने और ग्रीन फ्यूल को बढ़ावा देने की है।
Business Today Infrastructure Summit में ReNew के Founder, Chairman और CEO Sumant Sinha ने कहा कि भारत की रिन्यूएबल एनर्जी यात्रा अब कई अहम मोड़ पर पहुंच गई है।
300 गीगावाट के करीब पहुंची क्षमता
Sumant Sinha ने कहा कि भारत करीब 300 गीगावाट की स्थापित रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता पार करने की ओर बढ़ रहा है। इसमें दो-तिहाई से ज्यादा हिस्सा सोलर और विंड एनर्जी का है।
भारत ने 2030 तक 500 गीगावाट नॉन-फॉसिल फ्यूल बिजली क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है। पिछले साल देश ने 50 गीगावाट रिन्यूएबल क्षमता जोड़ी थी और इस साल यह आंकड़ा इससे भी ज्यादा रह सकता है।
उन्होंने कहा कि नई रिन्यूएबल क्षमता जोड़ने के मामले में भारत अमेरिका को पीछे छोड़कर चीन के बाद दूसरे स्थान पर पहुंच गया है।
स्टोरेज बनी पहली बड़ी जरूरत
रिन्यूएबल एनर्जी अब भारत की कुल बिजली सप्लाई में करीब 20 प्रतिशत हिस्सा रखती है। दिन के समय सोलर पावर ज्यादा बनती है, जबकि शाम में मांग बढ़ने पर बिजली की कमी हो सकती है।
ऐसे में रिन्यूएबल प्रोजेक्ट के साथ ज्यादा स्टोरेज क्षमता लगानी होगी। इसके लिए पंप्ड हाइड्रो, बैटरी स्टोरेज और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ाना जरूरी है। इससे ग्रिड को संभालने और लगातार बिजली सप्लाई बनाए रखने में मदद मिलेगी।
विदेशी उपकरणों पर निर्भरता घटाने की जरूरत
Sumant Sinha ने कहा कि भारत ने अब तक अपनी ज्यादातर रिन्यूएबल क्षमता विदेश से मंगाए गए उपकरणों के सहारे तैयार की है। अब देश को अपनी सप्लाई चेन मजबूत करने और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने पर ध्यान देना होगा।
इससे विदेशी उपकरणों पर निर्भरता कम होगी और ऊर्जा सुरक्षा भी मजबूत होगी।
ग्रीन फ्यूल और इलेक्ट्रिक ट्रांसपोर्ट पर जोर
उन्होंने कहा कि बिजली कुल ऊर्जा खपत का केवल 20 प्रतिशत हिस्सा है। बाकी 80 प्रतिशत हिस्सा अभी रिन्यूएबल एनर्जी के दायरे से बाहर है।
इस हिस्से को साफ ऊर्जा से जोड़ने के लिए ग्रीन हाइड्रोजन, ग्रीन अमोनिया और दूसरे ग्रीन फ्यूल पर काम करना होगा। साथ ही कारों, दोपहिया वाहनों, पब्लिक ट्रांसपोर्ट और उद्योगों में बिजली का इस्तेमाल बढ़ाना जरूरी होगा।
कोयले से सस्ती पड़ सकती है रिन्यूएबल बिजली
Sumant Sinha के मुताबिक, भारत में रिन्यूएबल बिजली कोयले से बनने वाली बिजली के मुकाबले काफी सस्ती है। बैटरी स्टोरेज की लागत जोड़ने के बाद भी यह सस्ती या ज्यादा से ज्यादा कोयले से बनने वाली बिजली के बराबर रह सकती है।
उन्होंने कहा कि भारत को अलग-अलग लक्ष्यों से आगे बढ़कर पूरी ग्रीन एनर्जी व्यवस्था पर एक साथ काम करना होगा। इसमें बिजली उत्पादन, स्टोरेज, मैन्युफैक्चरिंग, ट्रांसपोर्ट और ग्रीन फ्यूल सभी को जोड़ना जरूरी है।
साथ ही लंबे समय तक स्थिर नीतियां भी जरूरी होंगी, क्योंकि ऊर्जा क्षेत्र में निवेश कई साल के लिए किया जाता है। उनके मुताबिक, भारत भविष्य में साफ तकनीक से जुड़े उपकरण, जानकारी और तकनीकी समझ दूसरे देशों को भी दे सकता है।

