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सतलुज विवाद में नया ट्विस्ट, अनुराग कश्यप की पोस्ट से छिड़ी बहस

सतलुज विवाद अब सिर्फ सेंसर बोर्ड और ओटीटी तक सीमित नहीं रहा। फिल्म पर बैन के बीच अनुराग कश्यप की एक पोस्ट ने नई बहस छेड़ दी है। सवाल अब फिल्म की कहानी से आगे बढ़कर यह हो गया है कि आखिर इसे दिखाने से डर किस बात का है?

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Anurag Kashyap, Diljit Dosanjh
Anurag Kashyap, Diljit Dosanjh

In Short

  • अनुराग कश्यप ने सतलुज विवाद पर पोस्ट शेयर कर कहा कि बैन लगाने से लोग फिल्म को और ज्यादा देखना चाहेंगे। उन्होंने कहा कि वह अब फिल्म देखना चाहते हैं, ताकि समझ सकें कि इसे क्यों रोका गया।
  • सतलुज फिल्म जसवंत सिंह खालरा की जिंदगी और उनके काम पर बनी है। फिल्म में पंजाब में 1980s और 1990s के दौरान हुई हिंसा, गायब किए गए लोगों और कथित गैरकानूनी हत्याओं की कहानी दिखाई गई है।
  • फिल्म पहले घल्लूघारा और पंजाब 95 नाम से चर्चा में रही। सेंसर बोर्ड ने इसमें कई कट मांगे थे। बाद में फिल्म 3 जुलाई को जी5 पर बिना कट रिलीज हुई, लेकिन 48 घंटे के अंदर भारत में प्लेटफॉर्म से हटा दी गई।

सतलुज विवाद में अब अनुराग कश्यप भी खुलकर सामने आ गए हैं। अब तक इस मामले पर सिख संगठनों और राजनीतिक नेताओं की बात सामने आ रही थी, लेकिन अब फिल्म इंडस्ट्री से भी आवाज उठी है। कश्यप ने सोशल मीडिया पर ऐसा पोस्ट किया, जिससे बैन और फिल्मों की आजादी पर बहस फिर तेज हो गई। ऐसे में सवाल है कि अनुराग कश्यप ने इस विवाद पर क्या कहा?

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अनुराग कश्यप ने क्या कहा?

अनुराग कश्यप ने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट रीशेयर की, जिसमें लिखा था कि किसी चीज पर बैन लगाने से लोग उसे और ज्यादा देखना चाहते हैं। कश्यप ने इस पर कहा कि वह पहले यह फिल्म देखने का प्लान नहीं बना रहे थे, लेकिन अब वह इसे देखना चाहते हैं, ताकि समझ सकें कि इसे क्यों रोका गया।

इसके बाद उन्होंने अपने फॉलोअर्स से फिल्म देखने की अपील भी की। उन्होंने विवादित अंदाज में लिखा कि लोग इसे देखें, चाहे पायरेटेड कॉपी से ही क्यों न देखें। उनके इस बयान के बाद बहस और तेज हो गई है। अब सवाल यह है कि सतलुज में ऐसी कौन सी कहानी दिखाई गई है, जिस पर इतना विवाद हो रहा है?

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फिल्म किस कहानी पर बनी है?

सतलुज को हनी त्रेहान ने डायरेक्ट किया है। इसमें दिलजीत दोसांझ ने जसवंत सिंह खालरा का रोल निभाया है। फिल्म खालरा की जिंदगी और उनके काम को दिखाती है। खालरा ने पंजाब में 1980 के आखिरी सालों और 1990 के शुरुआती सालों में हुई हिंसा और गैरकानूनी हत्याओं के आरोपों को सामने रखा था।

फिल्म में हजारों ऐसे शवों की बात दिखाई गई है, जिनके बारे में आरोप है कि उन्हें चुपचाप गायब किया गया और उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। फिल्म में अर्जुन रामपाल, सुविंदर विक्की और गीतिका विद्या ओहलयान भी अहम रोल में हैं। लेकिन इस कहानी को रिलीज तक पहुंचाना आसान नहीं रहा। अब सवाल है कि फिल्म सेंसर बोर्ड के साथ विवाद में कैसे फंसी?

 

सेंसर बोर्ड से क्यों हुआ विवाद?

सतलुज को पहले घल्लूघारा और फिर पंजाब 95 नाम से जाना गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब फिल्म को सेंसर बोर्ड यानी सीबीएफसी के पास भेजा गया, तो बोर्ड ने इसमें कई कट लगाने को कहा। पहले 21 कट की बात सामने आई, लेकिन बाद में यह संख्या बढ़कर 127 तक बताई गई।

फिल्म बनाने वालों ने इस फैसले को कोर्ट में चुनौती दी थी। इसी विवाद की वजह से फिल्म का टोरंटो फिल्म फेस्टिवल में तय प्रीमियर भी रद्द हो गया था। कई साल तक फिल्म भारत में रिलीज नहीं हो पाई। फिर 3 जुलाई को इसे जी5 पर बिना कट के रिलीज किया गया, लेकिन 48 घंटे के अंदर भारत में प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया। अब सवाल है कि फिल्म हटाने पर जी5 ने क्या सफाई दी?

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जी5 ने क्या कहा?

जी5 ने कहा कि अभी के हालात को देखते हुए सतलुज भारत में अगले आदेश तक नहीं दिखाई जाएगी। प्लेटफॉर्म का कहना है कि वह तय प्रक्रिया के तहत फिल्म को फिर से दर्शकों तक लाने की कोशिश करेगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, केंद्र सरकार ने आईटी नियमों और सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं का हवाला देते हुए फिल्म हटाने का निर्देश दिया था।

फिल्म हटने के बाद यह मामला सिर्फ ओटीटी रिलीज तक सीमित नहीं रहा। अब सवाल यह भी उठ रहा है कि ऐसे मुद्दों पर बनी फिल्मों को दिखाने की कितनी छूट होनी चाहिए?