
रेलवे को बड़ी सौगात, 10,783 करोड़ की 3 मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए तीन मल्टीट्रैकिंग प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है। 10,783 करोड़ रुपये की लागत वाली इन परियोजनाओं से पांच राज्यों में रेल नेटवर्क बढ़ेगा। यात्री और माल ढुलाई आसान होगी। साथ ही कनेक्टिविटी बेहतर होने से पर्यटन, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।

In Short
- 10,783 करोड़ रुपये की लागत से तीन मल्टीट्रैकिंग रेलवे प्रोजेक्ट को मंजूरी मिली।
- पांच राज्यों के 14 जिलों और करीब 56 लाख लोगों को बेहतर रेल कनेक्टिविटी का फायदा मिलेगा।
- प्रोजेक्ट से हर साल 27 MTPA अतिरिक्त माल ढुलाई और करीब 62 करोड़ किलोग्राम CO₂ उत्सर्जन में कमी का अनुमान है।
केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने बुधवार को रेलवे से जुड़े तीन मल्टीट्रैकिंग प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी। इन परियोजनाओं पर कुल 10,783 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इससे भारतीय रेलवे के नेटवर्क में करीब 656 किलोमीटर की बढ़ोतरी होगी। ये प्रोजेक्ट पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में होंगे और इन्हें 2029-30 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
तीन रेलवे प्रोजेक्ट को मिली मंजूरी
मंजूर किए गए तीन प्रोजेक्ट में पहला खड़गपुर-झारसुगुड़ा (बागडेही) 4th लाइन है। इससे पूर्वी और मध्य हिस्सों में रेलवे की क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
दूसरा प्रोजेक्ट कटनी-पेंड्रा रोड 4th लाइन है। वहीं तीसरा बिलासपुर (उसलापुर)-पेंड्रा रोड 3rd लाइन है। तीनों प्रोजेक्ट मिलकर करीब 656 किलोमीटर रेलवे नेटवर्क को कवर करेंगे।
इन परियोजनाओं का फायदा पांच राज्यों के 14 जिलों को मिलेगा। सरकार के मुताबिक, करीब 4,790 गांवों में रहने वाली लगभग 56 लाख की आबादी को इससे लाभ मिलने की उम्मीद है।
ट्रेनों की आवाजाही होगी बेहतर
इन प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य रेलवे लाइनों की क्षमता बढ़ाना, भीड़ कम करना और ट्रेनों के संचालन को बेहतर बनाना है। इससे यात्रियों के साथ-साथ माल और सेवाओं की आवाजाही में भी सुधार होगा।
इन परियोजनाओं को PM Gati Shakti National Master Plan के तहत तैयार किया गया है। इसका फोकस एकीकृत योजना, मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स को बेहतर बनाने पर है।
माल ढुलाई को भी मिलेगा फायदा
नई रेलवे लाइनों से माल ढुलाई की क्षमता में भी बड़ा इजाफा होने की उम्मीद है। सरकार के अनुमान के मुताबिक, इन प्रोजेक्ट से हर साल अतिरिक्त 27 मिलियन टन यानी 27 MTPA माल ढुलाई की सुविधा मिल सकती है।

इन रूट पर कोयला, सीमेंट, आयरन और स्टील जैसी जरूरी वस्तुओं की आवाजाही को भी मदद मिलेगी। अतिरिक्त लाइनें बनने से मालगाड़ियों और यात्री ट्रेनों की आवाजाही को व्यवस्थित करने और भीड़ कम करने में मदद मिलेगी।
पर्यटन और धार्मिक स्थलों की कनेक्टिविटी होगी मजबूत
इन रेलवे प्रोजेक्ट से कई पर्यटन और धार्मिक स्थलों तक रेल कनेक्टिविटी भी बेहतर होने की उम्मीद है। इनमें तारातरणी मंदिर, श्री क्षेत्र जगन्नाथ मंदिर के पास झारसुगुड़ा, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व, अमरकंटक मंदिर, अचानकमार टाइगर रिजर्व, खुटाघाट डैम, मल्हार पुरातात्विक स्थल और रतनपुर महामाया मंदिर शामिल हैं।
सरकार के मुताबिक, बेहतर कनेक्टिविटी से इन क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है और रोजगार के साथ स्वरोजगार के अवसर भी बन सकते हैं।
पर्यावरण को भी होगा फायदा
रेल के जरिए ज्यादा माल ढुलाई होने से तेल के आयात में भी कमी आने का अनुमान है। सरकार के अनुसार, इन प्रोजेक्ट से करीब 12 करोड़ लीटर तेल के आयात में कमी आ सकती है।
इसके साथ ही करीब 62 करोड़ किलोग्राम CO₂ उत्सर्जन कम होने का अनुमान है। सरकार के मुताबिक, यह कमी करीब 2.48 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर है।

