Zoho फाउंडर Sridhar Vembu ने बताया ज्यादा अनुशासन क्यों कर्मचारियों की पहल और फैसले लेने की ताकत घटा सकता है
Zoho फाउंडर Sridhar Vembu का कहना है कि कंपनियां अगर कर्मचारियों पर जरूरत से ज्यादा अनुशासन थोपती हैं तो उनकी खुद पहल करने और फैसले लेने की क्षमता कमजोर हो सकती है। उन्होंने साथ ही बढ़ती memory और AI token costs को Zoho के लिए बड़ी कारोबारी चुनौती बताया।

In Short
- Vembu के मुताबिक बहुत ज्यादा निर्देश और metrics कर्मचारियों को ऊपर से आदेश मिलने का इंतजार करने की आदत डाल सकते हैं।
- कर्मचारियों को ज्यादा आजादी देने से फैसले तेज हो सकते हैं, लेकिन असहमति और अनिश्चितता भी बढ़ सकती है।
- Vembu ने कहा कि memory और AI token prices बढ़ने से बिजनेस मुश्किल हो रहा है, जबकि कंपनी अब तक कीमतें बढ़ाने से बचती रही है।
Zoho के फाउंडर Sridhar Vembu का मानना है कि किसी कंपनी में सिर्फ अनुशासन पर ज्यादा जोर देना हमेशा अच्छा नतीजा नहीं देता। X पर एक पोस्ट में उन्होंने समझाया कि अगर कर्मचारियों से केवल ऊपर से मिले निर्देशों का पालन करने की उम्मीद की जाए तो इससे उनकी अपनी पहल करने और फैसले लेने की क्षमता कमजोर हो सकती है।
दो तरह से काम कर सकती हैं कंपनियां
Vembu ने कंपनियों के काम करने के दो मॉडल बताए। पहले मॉडल में कर्मचारी सीनियर लीडर्स के निर्देशों का इंतजार करते हैं और पहले से तय लक्ष्यों के हिसाब से काम करते हैं। दूसरे मॉडल में कर्मचारी खुद पहल करते हैं, फैसले लेते हैं और जरूरत पड़ने पर एक-दूसरे के फैसलों को चुनौती भी देते हैं।
उनके मुताबिक ज्यादा metrics पर चलने वाली कंपनियों में कर्मचारी धीरे-धीरे ऊपर से दिशा मिलने का इंतजार करने लगते हैं। इससे काम ज्यादा व्यवस्थित और अनुमान लगाने लायक हो सकता है लेकिन अगर सीनियर लीडरशिप गलत फैसला ले ले तो पूरी कंपनी पर असर पड़ सकता है।
Sridhar Vembu ने X पोस्ट में discipline, employee initiative और workplace culture पर अपनी राय रखी।

ज्यादा पहल से बढ़ सकता है टकराव
दूसरी तरफ initiative-driven culture में कर्मचारी बार-बार असहमत हो सकते हैं और एक-दूसरे के काम पर सवाल उठा सकते हैं। Vembu के मुताबिक ऐसा माहौल कभी-कभी अव्यवस्थित लग सकता है और कर्मचारियों को लगातार महसूस हो सकता है कि उनका काम काफी अच्छा नहीं है।
उन्होंने प्रोग्रामर्स का उदाहरण देते हुए कहा कि हर स्मार्ट प्रोग्रामर दूसरे का कोड देखकर सोचता है कि वह इसे बेहतर कर सकता है।
Vembu के मुताबिक कंपनियों के सामने यही बड़ा trade-off है। ज्यादा निश्चितता और आराम देने पर initiative कम हो सकती है जबकि ज्यादा पहल देने पर असहमति और अनिश्चितता बढ़ सकती है। उनके अनुसार दोनों को जबरन मिलाकर “highly disciplined culture of seizing the initiative” बनाने की कोशिश “worst of both worlds” जैसी स्थिति पैदा कर सकती है।
Zoho पर बढ़ रहा लागत का दबाव
Vembu की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब Zoho बढ़ती लागत से भी जूझ रही है। AI data centres की मांग के बीच memory और AI token prices बढ़ रहे हैं।
एक रिपोर्ट शेयर करते हुए Vembu ने कहा कि memory prices पिछले 12 महीनों में 500% बढ़ी हैं। Tom’s Hardware के डेटा के मुताबिक कुछ DDR5 memory kits की औसत कीमत अगस्त 2025 के करीब $90 से बढ़कर अगस्त 2026 में $425 हो गई। वहीं 128GB DDR5-6400 kit की कीमत अब $3,399 है जो पहले $329 के निचले स्तर तक गई थी।
Programming languages पर भी असर
Vembu का मानना है कि memory की महंगाई software developers को programming languages दोबारा सोचने पर मजबूर कर सकती है। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक languages इस सोच के साथ डिजाइन की गईं कि memory लगभग मुफ्त है लेकिन अब यह दौर खत्म हो चुका है।
वह ज्यादा memory-efficient languages और smarter compilers की जरूरत पर जोर दे रहे हैं जिसमें AI systems भी शामिल हैं।

