भारत ने नहीं खोई AI की रेस, अमिताभ कांत ने बताया देश की सबसे बड़ी ताकत
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में भारत की भूमिका को लेकर चल रही बहस के बीच अमिताभ कांत ने देश की ताकत बताई है। Business Today India@100 Summit में उन्होंने कहा कि भारत AI की रेस से बाहर नहीं हुआ है और टैलेंट, डेटा व बढ़ते निवेश के दम पर बड़ी भूमिका निभा सकता है।

Business Today India@100 Summit: भारत की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI क्षमता को लेकर कई तरह की बातें कही जा रही हैं। कुछ लोगों का मानना है कि भारत इस दौड़ में पीछे रह गया है, लेकिन पूर्व G20 शेरपा और नीति आयोग के पूर्व सीईओ अमिताभ कांत इससे अलग राय रखते हैं। उनका कहना है कि भारत ने AI की रेस नहीं हारी है, बल्कि देश की सबसे बड़ी ताकत उसका मानव संसाधन है।
Business Today India@100 Summit के ‘द फ्यूचर ऑफ मेक इन इंडिया’ सेशन में बोलते हुए अमिताभ कांत ने कहा कि AI के क्षेत्र में भारत के पास आगे बढ़ने की बड़ी क्षमता है। उन्होंने बताया कि AI की दुनिया में भारत की भूमिका काफी अहम हो सकती है और इसकी सबसे बड़ी वजह देश का टैलेंट है।
डेटा और टैलेंट बनेगी भारत की ताकत
अमिताभ कांत ने कहा कि AI के लिए जरूरी कई चीजें जैसे चिप्स और लिथोग्राफी मशीनें अलग अलग देशों से आती हैं, लेकिन डेटा के मामले में भारत की भूमिका बहुत बड़ी है। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया के कुल डेटा का करीब 22 फीसदी हिस्सा उपलब्ध कराएगा।
उन्होंने कहा कि भारत के पास बेहतरीन तकनीकी टैलेंट है और देश में AI से जुड़े कामों के लिए मजबूत माहौल तैयार हो रहा है। कांत के मुताबिक भारत में करीब 200 अरब डॉलर के डेटा सेंटर निवेश आने वाले हैं। इससे डेटा प्रोसेसिंग का काम देश में होगा और AI से जुड़े टैलेंट को भी बढ़ावा मिलेगा।
अमेरिका से भारत आ रहा AI टैलेंट
अमिताभ कांत ने कहा कि अमेरिका से ग्लोबल टैलेंट भारत आ रहा है। कई AI विशेषज्ञ भारत के स्टार्टअप और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर यानी GCCs के साथ काम करने के लिए यहां आ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि भारत को AI के इस्तेमाल को खेती, शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण जैसे क्षेत्रों में बढ़ाना चाहिए। इसके अलावा मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में भी AI का इस्तेमाल बढ़ाने की जरूरत है ताकि देश इसका ज्यादा फायदा उठा सके।
AI से नौकरी जाने की चिंता पर क्या बोले कांत?
AI की वजह से नौकरियां कम होने की चिंता पर अमिताभ कांत ने कहा कि हर तकनीकी बदलाव के समय इस तरह के सवाल उठते हैं। उन्होंने कहा कि नई तकनीकों ने हमेशा पिछली तकनीकों की तुलना में ज्यादा नौकरियां पैदा की हैं, लेकिन इसके लिए नए स्किल सीखने जरूरी हैं।
उन्होंने कहा कि भारत को AI के दौर के लिए अपने पाठ्यक्रम और स्किलिंग सिस्टम में बदलाव करना होगा। देश को AI इंजीनियर, मशीन लर्निंग विशेषज्ञ और डेटा साइंटिस्ट की जरूरत है। उनके मुताबिक भारत भविष्य में न सिर्फ अपने लिए बल्कि दुनिया के लिए भी कुशल मानव संसाधन उपलब्ध करा सकता है और करीब 30 फीसदी स्किल्ड मैनपावर भारत से आ सकती है।
बड़े AI मॉडल से ज्यादा एप्लीकेशन पर ध्यान
अमिताभ कांत ने कहा कि बड़े लैंग्वेज मॉडल की दुनिया में अमेरिका और चीन के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा है। उन्होंने कहा कि भारत को AI के एप्लीकेशन वाले हिस्से पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए।
उनके मुताबिक AI का इस्तेमाल अलग अलग क्षेत्रों में करके भारत अपनी अलग पहचान बना सकता है और भविष्य में इस तकनीक से बड़े फायदे हासिल कर सकता है।

