बाहरी झटकों के बावजूद भारत की इकोनॉमी मजबूत! महेंद्र देव बोले 7% ग्रोथ का भरोसा बरकरार
बाहरी चुनौतियों के बीच भी भारत की इकोनॉमी मजबूती दिखा रही है। एस महेंद्र देव ने कहा कि टैरिफ, वेस्ट एशिया संघर्ष और अल नीनो के असर के बावजूद देश करीब 7% ग्रोथ हासिल कर सकता है। एक्सपोर्ट, महंगाई कंट्रोल और फाइनेंशियल स्टेबिलिटी भारत की बड़ी ताकत बनकर उभर रही है।

अमेरिकी ट्रेड टैरिफ, वेस्ट एशिया संघर्ष और अब अल नीनो के कारण मानसून पर पड़ रहे असर जैसी बड़ी चुनौतियों के बावजूद भारत की इकोनॉमी मजबूत बनी हुई है। इकोनॉमिक एडवाइजरी काउंसिल टू द प्राइम मिनिस्टर के चेयरमैन प्रोफेसर एस महेंद्र देव ने कहा कि भारत इस साल भी करीब 7% की ग्रोथ हासिल कर सकता है।
उन्होंने कहा कि कई मार्केट इकोनॉमिस्ट ने टैरिफ के बाद भारत की ग्रोथ 6% से नीचे जाने की आशंका जताई थी, लेकिन देश ने पिछले साल 7.7% की विकास दर हासिल की। अब मौजूदा चुनौतियों के बीच भी ग्रोथ को बनाए रखने की कोशिश जारी है।
बाहरी झटकों के बावजूद ग्रोथ की रफ्तार बरकरार
Business Today India @ 100 Summit. में बोलते हुए एस महेंद्र देव ने कहा कि आरबीआई ने चालू साल के लिए 6.7% ग्रोथ का अनुमान लगाया है, लेकिन उन्हें उम्मीद है कि भारत 7% की विकास दर हासिल कर सकता है।
उन्होंने कहा कि भारत पिछले कुछ सालों से लगातार 7% से ज्यादा की ग्रोथ बनाए हुए है। इसके साथ ही सरकार का लक्ष्य इस साल फिस्कल डेफिसिट को 4.4% पर बनाए रखने का भी है।
क्रूड ऑयल और वेस्ट एशिया संघर्ष पर नजर
महेंद्र देव ने कहा कि आने वाले महीनों में वेस्ट एशिया संघर्ष किस दिशा में जाता है और क्रूड ऑयल की कीमतें कैसे रहती हैं, इस पर नजर रखनी होगी। उन्होंने बताया कि क्रूड ऑयल की कीमतें फिर से करीब 93 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं।
हालांकि अगर तेल की कीमतों में गिरावट आती है तो भारत की ग्रोथ और बेहतर हो सकती है। कम तेल कीमतों से इंपोर्ट बिल कम होगा और इकोनॉमी को फायदा मिल सकता है।
मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट बढ़ाने पर जोर
देव ने कहा कि भारत को अपनी इन्वेस्टमेंट रेट को 25% तक बढ़ाने और एक्सपोर्ट को और मजबूत करने की जरूरत है। इसमें मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की भूमिका बेहद अहम होगी।
उन्होंने बताया कि पिछले तीन सालों में मैन्युफैक्चरिंग जीवीए की ग्रोथ 10% से ज्यादा रही है। उन्होंने कहा कि ग्लोबल मार्केट में भारत की हिस्सेदारी भी बढ़ी है और यह 1.8% से बढ़कर 3.2% हो गई है।
मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर साथ बढ़ेंगे
महेंद्र देव के अनुसार मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर एक-दूसरे के पूरक हैं। ज्यादा मैन्युफैक्चरिंग से सर्विस सेक्टर में भी नए अवसर पैदा होंगे।
उन्होंने कहा कि भारत को अब मैन्युफैक्चरिंग में आत्मनिर्भरता बढ़ाने पर ध्यान देना होगा, क्योंकि दुनिया में प्रोटेक्शन बढ़ रहा है और जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता भी बनी हुई है।
रोजगार बढ़ाने में प्राइवेट सेक्टर की बड़ी भूमिका
एआई और नई टेक्नोलॉजी के बढ़ते इस्तेमाल के बीच रोजगार पर असर को लेकर देव ने कहा कि लंबे समय में इसका असर पॉजिटिव रह सकता है। हालांकि उन्होंने कहा कि रोजगार बढ़ाने में प्राइवेट सेक्टर को बड़ी भूमिका निभानी होगी।
उन्होंने कहा कि सरकार सिर्फ करीब 10% नौकरियां पैदा करती है, जबकि 90% रोजगार प्राइवेट सेक्टर से आते हैं। इसलिए सरकार ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और प्राइवेट इन्वेस्टमेंट बढ़ाने पर काम कर रही है।
लैंड और लेबर रिफॉर्म से बढ़ेगा निवेश
देव ने कहा कि राज्यों में लैंड और लीगल रिफॉर्म की जरूरत है ताकि कंपनियां अपना विस्तार कर सकें। उन्होंने कहा कि डिस्प्यूट रिजॉल्यूशन में काफी समय लगता है, जिसे बेहतर करने की जरूरत है।
उन्होंने न्यायपालिका और इकोनॉमिस्ट की एक कमेटी बनाने का सुझाव भी दिया ताकि प्राइवेट इन्वेस्टमेंट बढ़ाने के रास्ते तलाशे जा सकें।
स्किल गैप दूर करना बड़ी चुनौती
महेंद्र देव ने कहा कि भारत के सामने एक बड़ी चुनौती ग्रेजुएट्स की संख्या और इंडस्ट्री की जरूरत के बीच का अंतर है। इसके लिए इंडस्ट्री, एकेडमिया और सरकार के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है।
उन्होंने कहा कि भारत को स्किलिंग पर ज्यादा ध्यान देना होगा ताकि ज्यादा लोगों को रोजगार मिल सके। साथ ही उन्होंने देश में मौजूद "मिसिंग मिडिल" समस्या का भी जिक्र किया, जहां छोटे कारोबार और बड़ी फैक्ट्रियों के बीच मध्यम आकार की कंपनियों की कमी है।
उन्होंने कहा कि लैंड और लेबर रिफॉर्म के जरिए कंपनियां अपना स्केल बढ़ा सकती हैं और भारत मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में चीन और वियतनाम जैसे देशों से मुकाबला कर सकता है।

