AI के दौर में भारत की नई ताकत! 2023 से अब तक जुड़ीं 3.11 लाख नई AI नौकरियां
भारत में एआई का असर तेजी से बढ़ रहा है और नौकरी बाजार में बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। नई नौकरियों के साथ कई पुराने काम करने के तरीके भी बदल रहे हैं। आखिर कौन से शहर बन रहे हैं एआई हब और क्यों कंपनियां अब स्किल्स को ज्यादा महत्व दे रही हैं, जानिए पूरी कहानी।

भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई से जुड़ी नौकरियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। लिंक्डइन इंडिया के कंट्री हेड कुमारेश पट्टाभिरामन ने बताया कि साल 2023 से अब तक भारत में एआई से जुड़ी 3.11 लाख नई नौकरियां जुड़ी हैं। दुनियाभर में इसी दौरान 20 लाख एआई नौकरियां आई हैं। एआई इंजीनियरिंग रोल्स में भी तेजी देखी जा रही है और पिछले एक साल में इनकी संख्या 51% बढ़ी है। इस बदलाव के साथ ही नौकरी के तरीके और जरूरी स्किल्स भी तेजी से बदल रहे हैं।
एआई सिर्फ नौकरियां खत्म नहीं कर रहा बल्कि काम करने का तरीका बदल रहा है
Business Today India @ 100 Summit. में ‘मैन्युफैक्चरिंग जॉब्स इन द एआई एज’ सेशन के दौरान कुमारेश पट्टाभिरामन ने कहा कि एआई के आने से कुछ नौकरियों पर असर पड़ सकता है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हर जगह नौकरियां खत्म हो जाएंगी। उन्होंने बताया कि किसी भी नौकरी में कई तरह के टास्क होते हैं, जिनमें से कुछ काम एआई ऑटोमेट कर सकता है, कुछ कामों में इंसानों की क्षमता बढ़ा सकता है और कुछ ऐसे काम रहेंगे जिनमें इंसानी स्किल्स की जरूरत हमेशा बनी रहेगी।
एआई स्किल्स की मांग बढ़ी, लोगों को नए बदलाव के लिए तैयार होना होगा
पट्टाभिरामन ने कहा कि भारत में तेजी से बदलते एआई माहौल के लिए वर्कफोर्स को तैयार करना जरूरी है। कंपनियां अब यह देख रही हैं कि आने वाले समय में कौन सी स्किल्स ज्यादा जरूरी होंगी। इसी के आधार पर लोगों को अपनी क्षमता बढ़ानी होगी ताकि वे बदलते जॉब मार्केट के साथ आगे बढ़ सकें।
उन्होंने बताया कि एआई इंजीनियरिंग रोल्स लगातार बढ़ रहे हैं और अलग-अलग क्षेत्रों की नौकरियों में भी बदलाव देखने को मिल रहा है। इसी बदलाव के बीच नई स्किल्स सीखना सबसे अहम हो गया है।
विजयवाड़ा बना नया एआई हब, छोटे शहरों में भी बढ़ रहे मौके
लिंक्डइन इंडिया हेड ने बताया कि विजयवाड़ा में पिछले एक साल में एआई इंजीनियरिंग रोल्स में 46% की बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने कहा कि पहले माना जाता था कि एआई से जुड़े मौके सिर्फ बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे बड़े शहरों तक सीमित रहेंगे, लेकिन अब नए एआई हब भी सामने आ रहे हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि भारत की नई पीढ़ी के प्रोफेशनल्स तेजी से नई चीजें सीख रहे हैं। भारतीय प्रोफेशनल्स लिंक्डइन लर्निंग पर ग्लोबल औसत के मुकाबले 50% ज्यादा समय दे रहे हैं और उनकी सीखने की रफ्तार भी दोगुनी है।
कंपनियां अब डिग्री से ज्यादा स्किल्स पर दे रही हैं ध्यान
एआई के बढ़ते प्रभाव के बीच कंपनियों के हायरिंग तरीके भी बदल रहे हैं। पट्टाभिरामन के मुताबिक अब स्किल्स को ज्यादा महत्व दिया जा रहा है और 46% रिक्रूटर्स भर्ती के फैसलों में स्किल्स को आधार बना रहे हैं।
उन्होंने कंसल्टिंग का उदाहरण देते हुए कहा कि एआई की मदद से अब कंसल्टेंट कई सालों के डॉक्यूमेंट्स, मीटिंग्स और डेटा को तेजी से समझ सकते हैं। इससे उनका काम खत्म नहीं हुआ है बल्कि काम करने का तरीका और जरूरी स्किल्स बदल गई हैं।

