बिजली कटने पर भी घर रहेगा रोशन! जानिए क्या है Hybrid Solar System और कैसे करता है काम
बिजली कटते ही घर अंधेरे में डूब जाता है और इन्वर्टर भी ज्यादा देर साथ नहीं देता। ऐसे में Hybrid Solar System एक ऐसा विकल्प बन रहा है, जो धूप से बिजली बनाकर उसे बाद के लिए बचा सकता है। लेकिन यह सिस्टम काम कैसे करता है और किन लोगों के लिए सही है?

In Short
- Hybrid Solar System में Solar Panel Battery और Grid तीनों जुड़े होते हैं, जो जरूरत के हिसाब से अपने आप बिजली का सोर्स बदलते हैं।
- दिन में बनी एक्स्ट्रा सोलर बिजली Battery में स्टोर होती है, जिसे रात या पावर कट के दौरान इस्तेमाल किया जा सकता है।
- यह सिस्टम घरों छोटे बिजनेस ऑफिस स्कूल और क्लिनिक में बिजली का बिल और Diesel Generator पर निर्भरता कम कर सकता है।
Hybrid Solar System: बिजली का बढ़ता बिल और बार-बार होने वाला पावर कट घरों और छोटे बिजनेस के लिए बड़ी परेशानी बन गया है। इसी वजह से लोग अब ऐसे सोलर ऑप्शन तलाश रहे हैं, जो खर्च कम करने के साथ जरूरत के समय बिजली भी देता रहे।
Hybrid Solar System भी इसी तरह का एक सेटअप है, लेकिन आखिर यह सामान्य सोलर सिस्टम से अलग कैसे है?
क्या है Hybrid Solar System?
हाइब्रिड सोलर सिस्टम एक ऐसा सोलर पावर सेटअप है, जिसमें सोलर पैनल, बैटरी स्टोरेज और ग्रिड कनेक्शन तीनों एक साथ जुड़े होते हैं। दिन के समय घर या बिजनेस में सोलर पैनल से बनने वाली बिजली का इस्तेमाल किया जाता है।
जरूरत से ज्यादा बनने वाली बिजली बैटरी में सेव हो जाती है। जब धूप कम हो, सोलर पावर न मिले या बैटरी में बिजली खत्म होने लगे, तब यह सिस्टम अपने आप ग्रिड से बिजली लेना शुरू कर देता है।
लेकिन एक ही सिस्टम ऑन-ग्रिड और ऑफ-ग्रिड दोनों की तरह कैसे काम करता है?
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On-Grid और Off-Grid दोनों की तरह करता है काम
आसान भाषा में कहें तो हाइब्रिड सोलर सिस्टम, ऑन-ग्रिड और ऑफ-ग्रिड दोनों की तरह काम करता है। इसमें स्मार्ट एनर्जी मैनेजमेंट होता है, जो जरूरत के हिसाब से सोलर, बैटरी और ग्रिड के बीच अपने आप स्विच करता रहता है।
दिन में अच्छी धूप होने पर घर या ऑफिस के उपकरण सोलर पावर से चलते हैं। जरूरत से ज्यादा बनने वाली बिजली बैटरी में सेव हो जाती है। रात में या धूप कम होने पर बैटरी से पावर मिलती है और जरूरत पड़ने पर सिस्टम ग्रिड से बिजली लेने लगता है।
अब सवाल है कि क्या यह सिस्टम छोटे बिजनेस और कमर्शियल बिल्डिंग में भी उतना ही काम आता है?
ऑफिस अपार्टमेंट और छोटे बिजनेस में काम का
ऑफिस, अपार्टमेंट बिल्डिंग और छोटे बिजनेस में हाइब्रिड सोलर सिस्टम पावर कट के दौरान जरूरी काम जारी रखने में मदद करता है। सोलर पैनल, हाइब्रिड इन्वर्टर और बैटरी मिलकर लाइट, लिफ्ट, मशीनों और कॉमन एरिया को बिजली दे सकते हैं।
इससे सोलर पावर का ज्यादा इस्तेमाल होता है, ग्रिड से बिजली लेने की जरूरत कम पड़ती है और बिजली का बिल भी घट सकता है।
लेकिन क्या गांवों के क्लिनिक और स्कूल में भी यह सिस्टम काम आ सकता है?
लेकिन दिन में सेव हुई बिजली का इस्तेमाल रात या पीक आवर्स में कैसे किया जाता है?
दिन की बिजली रात में भी आएगी काम
हाइब्रिड सोलर सिस्टम दिन में बनने वाली एक्स्ट्रा बिजली को बैटरी में सेव करता है। घर की छत पर लगे रूफटॉप सोलर सिस्टम में बैटरी बैकअप जोड़ने से यह बिजली रात या पीक आवर्स में इस्तेमाल की जा सकती है।
ऐसा सेटअप किसी घर के रोज के इलेक्ट्रिसिटी लोड का करीब 50–70% हिस्सा कवर कर सकता है। यह घर में बिजली के यूज और सोलर सिस्टम की कैपेसिटी पर निर्भर करता है।
लेकिन क्या रूरल क्लिनिक और स्कूल में भी यह सिस्टम लगातार बिजली देने में मदद कर सकता है?
Rural Clinic और School को मिल सकती है भरोसेमंद बिजली
गांवों में बने क्लिनिक और स्कूल में हाइब्रिड सोलर सिस्टम से बिजली की दिक्कत कम की जा सकती है। जिन जगहों पर ग्रिड सप्लाई कमजोर रहती है या बार-बार बिजली जाती है, वहां सोलर पैनल और बैटरी का कॉम्बिनेशन काफी काम आ सकता है।
दिन के समय सोलर पैनल बिजली बनाते हैं और जरूरत से ज्यादा पावर बैटरी में सेव हो जाती है। बाद में इसी सेव की गई बिजली से लाइट, पंखे और दूसरे जरूरी उपकरण चलाए जा सकते हैं।
लेकिन क्या हाइब्रिड सोलर सिस्टम लगाने से डीजल जनरेटर का इस्तेमाल भी कम किया जा सकता है?
Diesel Generator पर कम हो सकती है निर्भरता
छोटे बिजनेस हाइब्रिड सोलर सिस्टम लगाकर डीजल जनरेटर का इस्तेमाल कम कर सकते हैं। पावर कट होने पर सबसे पहले बैटरी बैकअप से जरूरी मशीनें और दूसरे इक्विपमेंट चलाए जा सकते हैं।
इससे सोलर एनर्जी का ज्यादा इस्तेमाल होता है और ग्रिड या डीजल जनरेटर से बिजली लेने की जरूरत कम पड़ती है। इस तरह हाइब्रिड सोलर सिस्टम घरों से लेकर छोटे बिजनेस तक पावर कट के समय भी बिजली देने में मदद कर सकता है।

