रडार पर सिगरेट-तंबाकू सेक्टर की इस कंपनी का शेयर! दक्षिण अफ्रीकी कंपनी से ₹574 करोड़ का समझौता
सिगरेट और तंबाकू सेक्टर की कंपनी Elitecon International को इंटरनेशनल कारोबार बढ़ाने का नया मौका मिला है। कंपनी ने दक्षिण अफ्रीका की एक कंपनी के साथ सप्लाई एग्रीमेंट किया है। इसके तहत तंबाकू, सिगरेट और FMCG प्रोडक्ट्स की संभावित सप्लाई होगी। डील से जुड़ी रकम और शर्तें क्या हैं, जानिए।

सिगरेट और तंबाकू सेक्टर की कंपनी, Elitecon International Ltd का शेयर आज निवेशकों के रडार पर है। कंपनी ने आज निवेशकों को अपने लेटेस्ट एक्सचेंज फाइलिंग में बड़ी जानकारी दी है। इसके अलावा कंपनी ने बीते शुक्रवार को अपने Q1FY26 के नतीजों को जारी किया था।
खबर लिखे जानें तक सुबह 11:15 बजे तक कंपनी का शेयर बीएसई और एनएसई पर 4.07% या 0.37 रुपये गिरकर 8.73 रुपये पर ट्रेड कर रहा था।
कैसे रहे नतीजे?
FY2025-26 में ग्रुप का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 5,074.80 करोड़ रुपये रहा, जो FY2024-25 के 548.76 करोड़ रुपये से 9.2 गुना ज्यादा है। वहीं, कंसोलिडेटेड प्रॉफिट आफ्टर टैक्स 185.06 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल के 69.65 करोड़ रुपये के मुकाबले 2.7 गुना बढ़ा है। इसमें मालिकों को मिलने वाला मुनाफा 161.98 करोड़ रुपये रहा।
ग्रुप की स्टैंडअलोन आय 1,529.50 करोड़ रुपये रही, जो पिछले वित्त वर्ष के 297.51 करोड़ रुपये से 5.1 गुना ज्यादा है। हालांकि, स्टैंडअलोन प्रॉफिट आफ्टर टैक्स घटकर 13.09 करोड़ रुपये रह गया, जबकि पिछले साल यह 32.21 करोड़ रुपये था। यानी इसमें 59.4% की गिरावट आई। ग्रुप का बेसिक कंसोलिडेटेड EPS 1.16 रुपये रहा, जबकि पिछले साल यह 1.75 रुपये था।
ग्रुप के पास 6 ऑपरेटिंग एंटिटीज हैं और यह 3 देशों में कारोबार करता है। इसके उत्पाद 50 से ज्यादा एक्सपोर्ट मार्केट्स में पहुंचते हैं और ग्रुप से जुड़े कारोबारों के जरिए 2,000 से ज्यादा लोगों की आजीविका जुड़ी है। ग्रुप के तीन प्रमुख बिजनेस में नाशिक स्थित तंबाकू और इससे जुड़े उत्पाद, खाद्य तेल और केमिकल्स से जुड़ा कारोबार तथा सिंगापुर और यूएई के जरिए ट्रेडिंग कारोबार शामिल हैं।
कंपनी ने आज दी ये बड़ी जानकारी
आज अपने लेटेस्ट एक्सचेंज फाइलिंग में कंपनी ने बताया की उसने दक्षिण अफ्रीका की कंपनी World Class 77 के साथ Product Supply Framework Agreement किया है। इस समझौते के तहत Elitecon International दक्षिण अफ्रीका में कट ब्लेंडेड तंबाकू, होमोजेनाइज्ड तंबाकू, सिगरेट और फास्ट-मूविंग कंज्यूमर गुड्स (FMCG) की संभावित सप्लाई कर सकती है। समझौते की अवधि 31 अगस्त 2027 तक है।
₹574 करोड़ का इंडिकेटिव प्रोग्राम
समझौते के तहत कुल संभावित कारोबार की इंडिकेटिव सीमा 60 मिलियन डॉलर तक रखी गई है। कंपनी के मुताबिक, 95.70 रुपये प्रति डॉलर की कॉन्ट्रैक्चुअल रेफरेंस रेट के हिसाब से यह रकम करीब ₹574.20 करोड़ बैठती है। हालांकि, यह रकम केवल एक संकेतात्मक और गैर-बाध्यकारी प्रोग्राम सीमा है। इसे पक्का ऑर्डर, न्यूनतम खरीद की गारंटी, कन्फर्म्ड ऑर्डर बुक, रिसीवेबल या तय राजस्व नहीं माना जाएगा।
कौन है खरीदार?
यह समझौता World Class 77 के साथ हुआ है, जो दक्षिण अफ्रीका में रजिस्टर्ड कंपनी है। इसका रजिस्ट्रेशन नंबर 2023/959867/07 है। कंपनी का पता Unit No. 5, 100 Elizabeth Road, Impala Park, Boksburg 1459, South Africa है।
ऑर्डर कैसे मिलेगा?
यह एक नॉन-एक्सक्लूसिव फ्रेमवर्क एग्रीमेंट है। यानी World Class 77 के साथ समझौता होने का मतलब यह नहीं है कि पूरा ₹574.20 करोड़ का कारोबार पक्का हो गया है। वास्तविक सप्लाई तभी होगी जब खरीदार की ओर से Purchase Order जारी होगा और Elitecon International उसे लिखित रूप से स्वीकार करेगी।
हर स्वीकार किए गए Purchase Order में सामान की मात्रा, स्पेसिफिकेशन, डिलीवरी की तारीख और भुगतान से जुड़ी रकम अलग से तय की जाएगी।
डिलीवरी और भुगतान की शर्तें
स्वीकृत Purchase Orders के तहत डिलीवरी आम तौर पर FCA, Jawaharlal Nehru Port, Incoterms 2020 के आधार पर होगी। भुगतान संबंधित ट्रांसपोर्ट डॉक्यूमेंट की तारीख से 90 दिन बाद ऑथेंटिकेटेड बैंक ट्रांसफर के जरिए किया जाएगा। समझौते में न्यूनतम खरीद, Take-or-Pay या Exclusivity जैसी कोई बाध्यता नहीं है।
समझौते की अवधि
यह Agreement 26 सितंबर 2026 से प्रभावी है और 31 अगस्त 2027 तक लागू रहेगा, जब तक कि इसकी शर्तों के अनुसार इसे पहले समाप्त नहीं किया जाता। हर Purchase Order के लिए अलग से मात्रा और डिलीवरी शेड्यूल तय किया जाएगा।
कंपनी के इंटरनेशनल बिजनेस के लिए क्या मायने?
Elitecon International के मुताबिक, यह समझौता दक्षिण अफ्रीका में उसके एक्सपोर्ट कारोबार के लिए एक स्ट्रक्चर्ड कमर्शियल फ्रेमवर्क तैयार करता है और कंपनी के इंटरनेशनल बिजनेस को आगे बढ़ाने में मदद कर सकता है। हालांकि, अभी ₹574.20 करोड़ का कोई पक्का ऑर्डर या निश्चित राजस्व नहीं मिला है। वास्तविक कारोबार भविष्य में स्वीकार किए जाने वाले Purchase Orders पर निर्भर करेगा।

