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शेयर बाजार में गिरावट के दौरान क्या REITs में बढ़ाना चाहिए निवेश?

शेयर बाजार में गिरावट आने पर निवेशकों को अक्सर SIP बढ़ाने की सलाह दी जाती है, लेकिन क्या REITs में भी यही तरीका अपनाना फायदेमंद है? एक्सपर्ट ने REITs में निवेश को लेकर कुछ अहम बातें बताई हैं। जानिए बाजार की गिरावट के दौरान निवेशकों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

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In Short

  • शेयर बाजार में गिरावट आने पर SIP बढ़ाने की रणनीति क्या REITs में भी काम करती है?
  • एक्सपर्ट के मुताबिक, REITs में निवेश का फैसला जोखिम उठाने की क्षमता और निवेश की अवधि के आधार पर होना चाहिए।
  • REITs में पैसा लगाने से पहले ब्याज दरों और कमर्शियल रियल एस्टेट के कारोबारी चक्र को समझना जरूरी है।

शेयर बाजार में जब गिरावट आती है और म्यूचुअल फंड स्कीमों का प्रदर्शन कमजोर होने लगता है, तो आमतौर पर निवेशकों को लंबे समय तक निवेश बनाए रखने की सलाह दी जाती है। कई बार एक्सपर्ट यह भी कहते हैं कि बाजार में गिरावट के दौरान अपनी सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) की रकम बढ़ा देनी चाहिए, ताकि कम कीमतों पर ज्यादा यूनिट्स खरीदने का फायदा मिल सके। लेकिन क्या यही रणनीति रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट यानी REITs में भी अपनानी चाहिए?

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बिजनेस टुडे के शो में सीनियर एंकर साक्षी बत्रा के सवालों का जवाब देते हुए Talk The Walk LLP की मैनेजिंग पार्टनर संचिता मुखर्जी ने कहा कि REITs में निवेश के लिए शेयर बाजार जैसी रणनीति अपनाना सही नहीं होगा। इसकी वजह यह है कि REITs का निवेश मॉडल इक्विटी और डेट से अलग होता है।

REITs में निवेश बढ़ाने से पहले क्या समझें?

संचिता मुखर्जी के मुताबिक, REITs में निवेश का फैसला पूरी तरह निवेशक के पोर्टफोलियो और एसेट एलोकेशन पर निर्भर होना चाहिए। इसमें निवेशक की जोखिम उठाने की क्षमता, पैसों की जरूरत और निवेश की अवधि को ध्यान में रखना जरूरी है।

REITs न तो पूरी तरह इक्विटी हैं और न ही पूरी तरह डेट। इन्हें एक वैकल्पिक निवेश यानी अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट के तौर पर देखा जाता है। इसलिए इनमें पैसा लगाने से पहले यह समझना जरूरी है कि यह निवेश कैसे काम करता है।

इक्विटी और REITs में क्या है अंतर?

संचिता मुखर्जी ने उदाहरण देते हुए बताया कि मान लीजिए किसी निवेशक के पोर्टफोलियो में 80 फीसदी पैसा इक्विटी और 20 फीसदी डेट में लगा है।

अब अगर शेयर बाजार में गिरावट के कारण इक्विटी की हिस्सेदारी घटकर 70 फीसदी रह जाती है, तो निवेशक SIP के जरिए अतिरिक्त निवेश करके इस अंतर को पूरा कर सकता है। यह रणनीति समझना अपेक्षाकृत आसान है।

लेकिन REITs के मामले में स्थिति इतनी सीधी नहीं होती। यहां निवेश के फैसले को कई दूसरे आर्थिक पहलू भी प्रभावित करते हैं।

REITs में किन बातों का रखना चाहिए ध्यान?

संचिता मुखर्जी के मुताबिक, REITs में निवेश करते समय केवल शेयर बाजार की गिरावट देखना काफी नहीं है। निवेशकों को अर्थव्यवस्था में ब्याज दरों की स्थिति और कमर्शियल रियल एस्टेट के कारोबारी चक्र को भी समझना चाहिए।

ये सभी पहलू REITs के निवेश से जुड़े फैसलों को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए इनमें निवेश करने वाले व्यक्ति को इनकी बुनियादी समझ होनी चाहिए।

एक्सपर्ट ने साफ किया कि REITs हर उस निवेशक के लिए सही विकल्प नहीं हैं, जो केवल बाजार में गिरावट का फायदा उठाना चाहता है। इनमें निवेश बढ़ाने का फैसला सोच-समझकर और अपने पोर्टफोलियो की जरूरतों के आधार पर ही करना चाहिए।

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Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। BT Bazaar अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है।