इक्विटी म्यूचुअल फंड से बढ़ाएं पैसा! लेकिन रिटायरमेंट में नियमित इनकम के लिए बनाएं मजबूत रणनीति
रिटायरमेंट के लिए सिर्फ बड़ा फंड बनाना काफी नहीं है। इक्विटी और म्यूचुअल फंड से पैसा बढ़ाया जा सकता है लेकिन बाजार के उतार चढ़ाव के बीच नियमित इनकम के लिए एन्युटी और NPS जैसे विकल्प अहम हो सकते हैं। जानिए कैसे बनाएं बैलेंस्ड रिटायरमेंट प्लान।

In Short
- इक्विटी और म्यूचुअल फंड से वेल्थ क्रिएशन लेकिन रिटायरमेंट इनकम के लिए एन्युटी जरूरी
- बाजार गिरने पर एन्युटी जरूरी खर्चों को सुरक्षित रखने में मदद कर सकती है
- NPS में 60% तक कॉर्पस निकालने और 40% से एन्युटी खरीदने का विकल्प
आज के समय में कई लोग रिटायरमेंट के लिए इक्विटी और म्यूचुअल फंड जैसे मार्केट लिंक्ड निवेश पर भरोसा कर रहे हैं। इनसे लंबे समय में अच्छा रिटर्न मिल सकता है, लेकिन रिटायरमेंट के बाद सबसे बड़ी चुनौती होती है कि जमा हुए पैसे को ऐसी नियमित इनकम में बदला जाए जो बाजार की हलचल से प्रभावित न हो। इसी वजह से रिटायरमेंट प्लानिंग में वेल्थ क्रिएशन के साथ इनकम सिक्योरिटी पर ध्यान देना भी जरूरी है।
मार्केट निवेश के साथ पेंशन प्लान क्यों जरूरी
Go Digit Life Insurance के MD और CEO सब्यसाची सरकार के मुताबिक इक्विटी और म्यूचुअल फंड लंबे समय में वेल्थ क्रिएशन और महंगाई को मात देने वाले रिटर्न के लिए अच्छे विकल्प हैं। लेकिन सिर्फ इन्हीं पर निर्भर रहने से रिटायरमेंट के समय मार्केट वोलैटिलिटी का खतरा बढ़ सकता है। अगर रिटायरमेंट शुरू होने के समय बाजार में बड़ी गिरावट आ जाए तो निवेश की वैल्यू कम हो सकती है और नियमित खर्चों को संभालना मुश्किल हो सकता है।
यही वजह है कि पेंशन प्रोडक्ट जैसे एन्युटी रिटायरमेंट में अहम भूमिका निभाते हैं। एन्युटी में एकमुश्त रकम जमा करके जीवनभर नियमित इनकम हासिल की जा सकती है। इससे व्यक्ति को बाजार की स्थिति की चिंता किए बिना जरूरी खर्चों के लिए पैसे मिलते रहते हैं।
रिटायरमेंट के करीब आते ही बदलनी चाहिए निवेश रणनीति
सब्यसाची सरकार के अनुसार निवेशकों को मार्केट लिंक्ड निवेश और गारंटीड इनकम वाले प्रोडक्ट के बीच चुनाव करने की जरूरत नहीं है बल्कि दोनों का सही संतुलन बनाना चाहिए। कम उम्र में निवेशक ज्यादा हिस्सा ग्रोथ एसेट्स में रखकर रिटायरमेंट फंड तैयार कर सकते हैं।
वहीं रिटायरमेंट के करीब पहुंचने पर अपनी जमा पूंजी के एक हिस्से को एन्युटी में बदलकर जरूरी खर्चों के लिए स्थायी इनकम तय की जा सकती है। इससे बाजार में अचानक गिरावट आने पर भी बेसिक लाइफस्टाइल प्रभावित नहीं होती।
एन्युटी बन सकती है आर्थिक झटकों से सुरक्षा
रिटायरमेंट के बाद अगर कोई व्यक्ति पूरी तरह मार्केट लिंक्ड निवेश से पैसे निकालता है तो बाजार गिरने की स्थिति में उसकी सेविंग पर असर पड़ सकता है। एन्युटी ऐसे समय में एक आर्थिक सुरक्षा कवच की तरह काम कर सकती है।
फिक्स्ड एन्युटी में पहले से तय इनकम मिलती है, जबकि वेरिएबल एन्युटी में बाजार से जुड़े ग्रोथ के मौके भी मिल सकते हैं। इसके अलावा कपल्स के लिए जॉइंट लाइफ एन्युटी का विकल्प भी होता है जिसमें मुख्य निवेशक की मृत्यु के बाद जीवनसाथी को इनकम जारी रह सकती है।
NPS में भी एन्युटी का अहम रोल
नेशनल पेंशन सिस्टम यानी NPS के तहत 60 साल की उम्र में रिटायर होने वाले सब्सक्राइबर अपने जमा कॉर्पस का 60% तक हिस्सा निकाल सकते हैं। वहीं कम से कम 40% रकम से अप्रूव्ड लाइफ इंश्योरर से एन्युटी खरीदनी होती है।
रिटायरमेंट की जरूरत के हिसाब से एन्युटी के अलग विकल्प चुने जा सकते हैं। इमीडिएट एन्युटी में एकमुश्त निवेश के बाद जल्द इनकम शुरू हो जाती है, जबकि डिफर्ड एन्युटी में भविष्य की किसी तय तारीख से इनकम मिलती है।
इस तरह रिटायरमेंट प्लानिंग में सिर्फ पैसा जमा करना ही काफी नहीं है बल्कि उसे सही समय पर सुरक्षित इनकम में बदलना भी जरूरी है। मार्केट निवेश जहां बड़ा कॉर्पस बनाने में मदद कर सकते हैं, वहीं पेंशन प्लान रिटायरमेंट के बाद आर्थिक स्थिरता बनाए रखने में मदद करते हैं।

