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RBI Floating Rate Savings Bond पर 8.05% ब्याज, NRI के लिए क्या हैं नियम?

RBI फ्लोटिंग रेट सेविंग्स बॉन्ड पर फिलहाल 8.05% ब्याज मिल रहा है और इसे सरकार का समर्थन प्राप्त है। हालांकि NRI इसमें नया निवेश नहीं कर सकते। वहीं निवासी रहते हुए बॉन्ड खरीदने के बाद NRI बनने वाले निवेशक मैच्योरिटी तक इसे होल्ड कर सकते हैं।

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In Short

  • RBI Floating Rate Savings Bond पर जुलाई-दिसंबर 2026 के लिए 8.05% ब्याज मिल रहा है
  • NRI इन बॉन्ड में नया निवेश नहीं कर सकते, लेकिन बाद में NRI बनने वाले निवेशक मैच्योरिटी तक होल्ड कर सकते हैं
  • इन बॉन्ड की मैच्योरिटी 7 साल है और ब्याज पर टैक्स व TDS के नियम लागू होते हैं

RBI Bond Interest Rate: RBI फ्लोटिंग रेट सेविंग्स बॉन्ड 2020 टैक्सेबल पर फिलहाल 8.05% ब्याज मिल रहा है। इन बॉन्ड को भारत सरकार का समर्थन प्राप्त है। हालांकि, इसमें निवेश करने के नियम सभी के लिए एक जैसे नहीं हैं। खास तौर पर NRI के लिए नए निवेश पर रोक है, लेकिन कुछ मामलों में पुराने निवेश को जारी रखा जा सकता है।

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कौन कर सकता है निवेश?

RBI के नियमों के मुताबिक, कोई निवासी व्यक्ति इन बॉन्ड में अपने नाम से, संयुक्त रूप से या “आइदर ऑर सर्वाइवर” आधार पर निवेश कर सकता है। माता-पिता या कानूनी अभिभावक नाबालिग की ओर से भी निवेश कर सकते हैं। हिंदू अविभाजित परिवार यानी HUF भी इन बॉन्ड में पैसा लगा सकते हैं।

NRI इन बॉन्ड में नया निवेश नहीं कर सकते। हालांकि, अगर किसी व्यक्ति ने निवासी रहते हुए बॉन्ड खरीदे और बाद में वह NRI बन गया, तो वह मैच्योरिटी तक निवेश बनाए रख सकता है। ब्याज और मैच्योरिटी की रकम बाहर भेजने के मामले में FEMA के नियम लागू होंगे।

अभी कितना मिल रहा है ब्याज?

1 जुलाई से 31 दिसंबर 2026 तक इन बॉन्ड की ब्याज दर 8.05% है। RBI हर छह महीने में इसकी समीक्षा करता है। यह दर नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट यानी NSC की ब्याज दर से 35 बेसिस पॉइंट ज्यादा रहती है। फिलहाल NSC की दर 7.70% है।

RBI ने 1 जुलाई 2026 को कहा था कि जुलाई-दिसंबर की अवधि में 8.05% की दर पिछली छमाही के बराबर रहेगी।

सात साल में होती है मैच्योरिटी

इन बॉन्ड की अवधि जारी होने की तारीख से सात साल होती है। मैच्योरिटी के बाद ब्याज नहीं मिलता। आम तौर पर समय से पहले पैसा निकालने की सुविधा नहीं होती, लेकिन 60 साल या उससे ज्यादा उम्र के योग्य निवेशकों को RBI के नियमों और लॉक-इन शर्तों के तहत यह सुविधा मिल सकती है।

ब्याज पर देना होगा टैक्स

बॉन्ड से मिलने वाले ब्याज पर निवेशक के इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है। मौजूदा नियमों के तहत ब्याज भुगतान के समय TDS भी काटा जाता है। इसलिए 8.05% की दर को टैक्स के बाद मिलने वाला वास्तविक रिटर्न नहीं माना जाना चाहिए।

 ₹1,000 से शुरू कर सकते हैं निवेश

इन बॉन्ड में कम से कम ₹1,000 निवेश किया जा सकता है और आगे का निवेश भी ₹1,000 के मल्टीपल में होता है। अधिकतम निवेश की कोई सीमा नहीं है। ब्याज हर छह महीने में 1 जनवरी और 1 जुलाई को दिया जाता है।

ये बॉन्ड ट्रांसफर नहीं किए जा सकते, सेकेंडरी मार्केट में इनकी ट्रेडिंग नहीं होती और इन्हें लोन के लिए गिरवी भी नहीं रखा जा सकता।
 

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Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। BT Bazaar अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है।