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प्रॉपर्टी या म्यूचुअल फंड कौन बेहतर निवेश विकल्प है? लंबे समय में यहां बन सकता है ज्यादा पैसा

प्रॉपर्टी और म्यूचुअल फंड दोनों ही लंबे समय में पैसा बढ़ाने के लोकप्रिय विकल्प हैं। लेकिन ज्यादा रिटर्न, जोखिम और निवेश की सुविधा के मामले में दोनों में बड़ा अंतर है। जानिए 65 लाख रुपये के निवेश से समझिए कौन सा विकल्प लंबे समय में ज्यादा वेल्थ बना सकता है।

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In Short

  • प्रॉपर्टी में कीमत बढ़ने के साथ किराये से भी कमाई होती है लेकिन इसमें खर्च और कम लिक्विडिटी की चुनौती रहती है।
  • म्यूचुअल फंड में कम रकम से शुरुआत कर कंपाउंडिंग के जरिए लंबे समय में बड़ा फंड बनाया जा सकता है।
  • 65 लाख रुपये के उदाहरण से समझिए कैसे लंबे समय में म्यूचुअल फंड का रिटर्न प्रॉपर्टी से आगे निकल सकता है।

आज के समय में वेल्थ क्रिएशन के लिए लोगों के पास दो बड़े विकल्प हैं, रियल एस्टेट और म्यूचुअल फंड। प्रॉपर्टी को लंबे समय से सुरक्षित निवेश माना जाता है, जबकि म्यूचुअल फंड और एसआईपी ने पिछले कुछ सालों में तेजी से लोकप्रियता हासिल की है। ऐसे में सवाल है कि लंबे समय में इनमें से कौन सा विकल्प ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकता है। इसका जवाब दोनों निवेश विकल्पों की खूबियों और कमियों को समझने से मिलेगा।

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प्रॉपर्टी में निवेश के फायदे और नुकसान

भारत में प्रॉपर्टी को लेकर लोगों का भावनात्मक जुड़ाव काफी ज्यादा है, क्योंकि यह एक ठोस संपत्ति होती है। सही जगह पर जमीन या मकान खरीदने से लंबे समय में अच्छा मुनाफा मिल सकता है। खासतौर पर ऐसी जगहों पर जहां हाइवे मेट्रो या कोई बड़ा प्रोजेक्ट आने वाला हो, वहां प्रॉपर्टी की कीमत तेजी से बढ़ सकती है।

रियल एस्टेट में निवेश का फायदा यह भी है कि इसमें दोहरी कमाई हो सकती है। एक तरफ समय के साथ प्रॉपर्टी की कीमत बढ़ती है, वहीं दूसरी तरफ किराये से हर महीने कमाई भी हो सकती है। हालांकि इसमें रजिस्ट्री फीस ब्रोकरेज प्रॉपर्टी टैक्स और मेंटेनेंस जैसे खर्च जुड़े होते हैं। जरूरत पड़ने पर प्रॉपर्टी को तुरंत बेचना भी आसान नहीं होता।

म्यूचुअल फंड में मिलता है कंपाउंडिंग का फायदा

म्यूचुअल फंड में निवेश लिक्विड और पारदर्शी होता है। इसे सेबी रेगुलेट करता है और निवेशक अपनी जरूरत के हिसाब से कभी भी पैसा निकाल सकते हैं। लंबे समय में अच्छे इक्विटी म्यूचुअल फंड ने करीब 12 से 15 प्रतिशत या उससे ज्यादा सालाना रिटर्न दिया है।

म्यूचुअल फंड की सबसे बड़ी ताकत कंपाउंडिंग है, जिससे समय के साथ पैसा तेजी से बढ़ सकता है। इसमें निवेश शुरू करने के लिए बड़ी रकम की जरूरत नहीं होती। आप 500 रुपये से भी शुरुआत कर सकते हैं। हालांकि इसका रिटर्न शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव पर निर्भर करता है और बाजार गिरने पर कुछ समय के लिए नुकसान भी दिख सकता है।

65 लाख के निवेश से समझिए अंतर

मान लीजिए राजू ने साल 2015 में 65 लाख रुपये का फ्लैट खरीदा। साल 2026 में उसकी कीमत बढ़कर करीब 1.25 करोड़ रुपये हो गई। यानी 11 साल में पैसा लगभग दोगुना हुआ। इसके अलावा उसे हर महीने करीब 30 हजार रुपये किराया भी मिला।

अगर इसी 65 लाख रुपये को साल 2015 में किसी अच्छे डायवर्सिफाइड म्यूचुअल फंड में लगाया गया होता और औसत 12 से 14 प्रतिशत रिटर्न मिलता, तो यह रकम करीब 2.3 करोड़ से 2.8 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती थी। यानी केवल रिटर्न के मामले में लंबे समय में म्यूचुअल फंड आगे रह सकता है।

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किसके लिए कौन सा निवेश बेहतर

अगर आपके पास बड़ा फंड है और आप नियमित कमाई चाहते हैं तो प्रॉपर्टी अच्छा विकल्प हो सकती है। इससे किराये की आय के साथ एक ठोस संपत्ति भी बनती है।

वहीं अगर आपका लक्ष्य लंबे समय में ज्यादा वेल्थ बनाना है और आपकी उम्र कम है तो म्यूचुअल फंड ज्यादा बेहतर विकल्प साबित हो सकता है। इसमें कम रकम से शुरुआत करके धीरे-धीरे बड़ा फंड बनाया जा सकता है।

हालांकि एक्सपर्ट्स हमेशा डायवर्सिफिकेशन की सलाह देते हैं। यानी पूरा पैसा किसी एक जगह लगाने के बजाय प्रॉपर्टी और म्यूचुअल फंड दोनों में निवेश करना ज्यादा संतुलित रणनीति हो सकती है। इससे सुरक्षा के साथ बेहतर रिटर्न पाने का मौका मिलता है।

Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। BT Bazaar अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है।