RBI के अचानक फैसले से विदेशी मुद्रा जमा योजना पर सवाल: बैंकों और बाजार को नहीं मिला बदलाव का संकेत
RBI ने विदेशी मुद्रा जमा योजना FCNR(B) पर मिलने वाली खास सुविधा को तय समय से पहले बंद करने का फैसला लिया है। अचानक हुए इस बदलाव से बैंक, बाजार और एक्सपर्ट हैरान हैं। फैसले के बाद रुपये और बॉन्ड बाजार पर असर दिखा, जबकि RBI की कम्युनिकेशन रणनीति पर सवाल उठे हैं।

In Short
- RBI ने FCNR(B) जमा योजना पर हेजिंग कॉस्ट सपोर्ट अगस्त के बाद बंद करने का फैसला लिया
- अचानक फैसले से रुपये में गिरावट और बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी देखने को मिली
- बैंकों को विदेशी मुद्रा जमा जुटाने के तय लक्ष्य पूरे करने में चुनौती का सामना करना पड़ रहा है
भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI ने विदेशी मुद्रा जमा आकर्षित करने वाली एक खास सुविधा को तय समय से करीब एक महीने पहले खत्म करने का फैसला लिया है। इस अचानक फैसले ने बैंकों, अर्थशास्त्रियों और बाजार से जुड़े लोगों को हैरान कर दिया है। अब सवाल उठ रहे हैं कि RBI अपने नीतिगत फैसलों को लेकर बाजार के साथ कम्युनिकेशन कितना प्रभावी रख पा रहा है। इस फैसले का असर बाजार में तुरंत दिखाई दिया।
RBI के फैसले से बाजार में बढ़ी अनिश्चितता
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कुछ दिन पहले ही कहा था कि विदेशी मुद्रा जमा योजना यानी FCNR(B) के लिए दी जा रही छूट को समय से पहले खत्म करने का कोई प्रस्ताव विचार में नहीं है। लेकिन इसके बाद शुक्रवार को RBI ने अचानक घोषणा कर दी कि अगस्त के बाद वह इन विदेशी मुद्रा जमा पर हेजिंग कॉस्ट का खर्च नहीं उठाएगा।
इस बदलाव के बाद बाजार में चिंता बढ़ गई। रुपये में करीब एक महीने की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई और एशियाई मुद्राओं के मुकाबले इसका प्रदर्शन कमजोर रहा। वहीं पांच साल वाले सरकारी बॉन्ड की यील्ड में एक महीने से ज्यादा समय की सबसे बड़ी बढ़त देखने को मिली।
विशेषज्ञों ने उठाए RBI कम्युनिकेशन पर सवाल
एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज की अर्थशास्त्री माधवी अरोड़ा ने कहा कि सेंट्रल बैंक की प्रभावी कम्युनिकेशन क्षमता बाजार की उम्मीदों को तय करने में अहम भूमिका निभाती है। उनके मुताबिक बाजार नीतियों में बदलाव को अपना सकता है, लेकिन नीति को लेकर अनिश्चितता को समझना ज्यादा मुश्किल होता है।
यह पहली बार नहीं है जब RBI के फैसलों से बाजार अचानक प्रभावित हुआ है। इससे पहले पिछले साल जून में RBI ने उम्मीद से ज्यादा 50 बेसिस प्वाइंट की दर कटौती की थी, जिससे लंबे समय वाले बॉन्ड में बिकवाली देखने को मिली थी। वहीं अप्रैल में लिक्विडिटी नियमों में बदलाव ने भी बाजार में हलचल पैदा की थी।
FCNR(B) योजना की लागत पर थी बहस
RBI का यह फैसला ऐसे समय आया है जब इस योजना की लागत को लेकर चर्चा चल रही थी। पूर्व RBI गवर्नर दुव्वुरी सुब्बाराव ने भी विदेशी मुद्रा जमा योजना को महंगा बताया था। हालांकि कई बाजार विशेषज्ञों का मानना था कि RBI के पास करीब 700 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार है और हेजिंग कॉस्ट बड़ी चुनौती नहीं हो सकती।
SBI के ग्रुप चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर सौम्य कांति घोष के अनुसार, इस योजना की कुल लागत करीब 10.5 अरब डॉलर हो सकती है, जो RBI के विदेशी मुद्रा भंडार के मुकाबले बहुत कम है।
अब तक इस योजना के जरिए करीब 52 अरब डॉलर की जमा राशि आई है। बैंकों का अनुमान है कि अगस्त के अंत तक यह आंकड़ा बढ़कर करीब 80 से 85 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।
बैंकों के सामने लक्ष्य पूरा करने की चुनौती
RBI के फैसले से बैंकों के लिए भी परेशानी बढ़ गई है। कई बैंकों ने RBI के साथ बैठक में विदेशी मुद्रा जमा जुटाने के लक्ष्य तय किए थे। देश के सबसे बड़े बैंक SBI ने 10 अरब डॉलर जुटाने का लक्ष्य रखा था, जिसमें अगस्त के पहले हफ्ते तक करीब 6 अरब डॉलर जुटाए जा चुके थे।
बैंकरों के मुताबिक अब उन्हें अपनी एसेट-लायबिलिटी प्लानिंग में बदलाव करना पड़ेगा, क्योंकि पहले यह योजना सितंबर तक जारी रहने की उम्मीद थी। नए ग्राहकों को जोड़ना भी आसान नहीं है क्योंकि FCNR खाता खोलने और विदेश से फंड जुटाने में आमतौर पर 15 से 20 दिन का समय लगता है।
RBI के अचानक फैसले ने जहां विदेशी मुद्रा जमा योजना पर असर डाला है, वहीं केंद्रीय बैंक की पॉलिसी कम्युनिकेशन को लेकर भी नई बहस शुरू कर दी है।

