चार सोने की चूड़ियों से खड़ी कर दी हजारों करोड़ की कंपनी, क्लास 5 छोड़ने वाले Kiran Kumar की कहानी
क्लास 5 के बाद पढ़ाई छोड़ने वाले किरण कुमार ने मां की चार सोने की चूड़ियों से अपना कारोबार शुरू किया था। आज उनकी ललिता ज्वेलरी हजारों करोड़ रुपये की कंपनी बन चुकी है और आईपीओ के जरिए शेयर बाजार में उतरने की तैयारी कर रही है। जानिए संघर्ष से सफलता तक का पूरा सफर।

In Short
- क्लास 5 के बाद पढ़ाई छोड़कर 12 साल की उम्र में शुरू किया था गहनों का कारोबार
- मां की चार सोने की चूड़ियों को बनाया पहला निवेश और खड़ा किया बड़ा बिजनेस
- ललिता ज्वेलरी का कारोबार बढ़कर 25 हजार करोड़ रुपये के रेवेन्यू तक पहुंचा
गरीबी और मुश्किल हालात के बीच पढ़ाई छोड़ने वाले किरण कुमार ने अपनी मेहनत और कारोबार की समझ से ललिता ज्वेलरी को एक बड़े गहनों के ब्रांड में बदल दिया। कभी शुरुआत के लिए उनके पास सिर्फ मां की दी हुई चार सोने की चूड़ियां थीं, लेकिन आज उनकी कंपनी शेयर बाजार में उतरने की तैयारी कर रही है और इसकी कीमत करीब 11,250 करोड़ रुपये आंकी जा रही है। इस सफर की शुरुआत उस समय हुई जब किरण कुमार ने बहुत कम उम्र में गहनों के कारोबार में कदम रखा था और यहीं से उनके संघर्ष और कामयाबी की कहानी आगे बढ़ी।
12 साल की उम्र में शुरू किया गहनों का कारोबार
नेल्लोर के एक कमजोर आर्थिक स्थिति वाले परिवार में जन्मे किरण कुमार अपने परिवार में आठवें बच्चे थे। उनके पिता ज्वेलर्स के यहां अकाउंटेंट यानी हिसाब-किताब रखने का काम करते थे, लेकिन परिवार का खर्च चलाना आसान नहीं था।
पैसों की कमी के कारण किरण कुमार ने 5वीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ दी। करीब 12 साल की उम्र में उन्होंने नेल्लोर में गहनों के कारोबार में काम करना शुरू किया। इसी दौरान उन्होंने देखा कि नेल्लोर में बनने वाले गहने चेन्नई और हैदराबाद जैसे बड़े बाजारों में भेजे जाते हैं। यहीं से उनके मन में अपना कारोबार शुरू करने का विचार आया।
चार चूड़ियों को बनाया कारोबार की पहली पूंजी
किरण कुमार के पास अपना कारोबार शुरू करने के लिए पैसे नहीं थे। ऐसे समय में उनकी मां ने उन्हें चार सोने की चूड़ियां दीं। इन चूड़ियों का वजन करीब 48 ग्राम था।किरण कुमार ने इस सोने से एक सुनार के जरिए छह बालियां बनवाईं और उन्हें लेकर चेन्नई पहुंच गए। यहां उन्होंने ग्राहकों और कारोबारियों से संपर्क करना शुरू किया।
उनका पहला बड़ा मौका टी नगर की ललिता ज्वेलरी से मिला। देर रात दुकान बंद होने के समय वह वहां पहुंचे और दुकान के मालिक एम एस कंदास्वामी पिल्लई को अपने गहने दिखाए। गहनों की गुणवत्ता पसंद आने पर पिल्लई ने पहले 100 ग्राम का ऑर्डर दिया, जो बाद में बढ़कर 200 ग्राम हो गया।
थोक कारोबार से खुदरा कारोबार तक का सफर
इसके बाद किरण कुमार ने नेल्लोर और चेन्नई के बीच लगातार यात्रा करते हुए अपना थोक कारोबार बढ़ाया। धीरे-धीरे उन्होंने आंध्र प्रदेश के साथ-साथ बड़े शोरूम और कनाडा लंदन सिंगापुर और दुबई जैसे विदेशी बाजारों में भी गहने भेजने शुरू कर दिए।
24 फरवरी 1999 को उनके कारोबार में बड़ा बदलाव आया। ललिता ज्वेलरी के मालिक कंदास्वामी पिल्लई आर्थिक परेशानियों और कर्ज से जूझ रहे थे। किरण कुमार ने कारोबार संभालने का फैसला किया और उनकी देनदारियां चुकाने में मदद की।
किरण कुमार ने कई बार साफ किया है कि उन्होंने ललिता ज्वेलरी की शुरुआत नहीं की थी, बल्कि पहले से चल रहे कारोबार को संभाला था। बाद में उन्होंने नाम में एक अतिरिक्त 'ए' जोड़कर ललिता ज्वेलरी ब्रांड बनाया।
कम कीमत और ज्यादा बिक्री बनी कंपनी की पहचान
थोक कारोबार में मजबूत पकड़ रखने वाले किरण कुमार के लिए खुदरा कारोबार एक नया अनुभव था। उन्हें समझना पड़ा कि ग्राहक गहने खरीदते समय किन बातों को महत्व देते हैं और कीमत किस तरह खरीदारी का फैसला बदलती है।
उन्होंने ललिता ज्वेलरी को कम कीमत और ज्यादा बिक्री की रणनीति पर खड़ा किया। कंपनी ने अतिरिक्त शुल्क कम रखने और बीआईएस हॉलमार्क वाले सोने को बढ़ावा दिया।
ललिता ज्वेलरी की मार्केटिंग का तरीका भी अलग रहा। कंपनी ग्राहकों को कीमतों की तुलना करने के लिए कहती थी, ताकि वे दूसरी दुकानों और ललिता ज्वेलरी की कीमतों में अंतर देख सकें।
इस रणनीति से कंपनी ने गहनों के बाजार में अपनी अलग पहचान बनाई, जहां ग्राहक अक्सर मेकिंग चार्ज और दूसरे खर्चों की वजह से सही कीमत का अंदाजा नहीं लगा पाते।
61 स्टोर और हजारों करोड़ का कारोबार
धीरे-धीरे ललिता ज्वेलरी एक बड़े खुदरा नेटवर्क में बदल गई। कंपनी के पास आंध्र प्रदेश कर्नाटक तमिलनाडु तेलंगाना और पुडुचेरी में 61 स्टोर हैं।कंपनी की कमाई में भी तेजी से बढ़ोतरी हुई। ललिता ज्वेलरी का रेवेन्यू वित्त वर्ष 2024 में 16,800.62 करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 2025 में बढ़कर 16,907.88 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2026 में 25,039.80 करोड़ रुपये हो गया।
कंपनी का प्रॉफिट आफ्टर टैक्स यानी टैक्स चुकाने के बाद मुनाफा वित्त वर्ष 2024 में 359.83 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2025 में 364.73 करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 2026 में बढ़कर 1,009.82 करोड़ रुपये पहुंच गया।वहीं कंपनी की संपत्ति वित्त वर्ष 2024 में 5,182.26 करोड़ रुपये थी, जो वित्त वर्ष 2025 में 6,929.68 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2026 में 10,945.14 करोड़ रुपये हो गई।
कंपनी की आईपीओ दस्तावेजों में दी गई क्रिसिल रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2022 से वित्त वर्ष 2024 के बीच रेवेन्यू बढ़ोतरी के मामले में ललिता ज्वेलरी क्षेत्रीय ज्वेलरी कंपनियों में दूसरी सबसे तेजी से बढ़ने वाली कंपनी रही।
कभी मां की चार सोने की चूड़ियों से शुरू हुआ किरण कुमार का सफर अब ललिता ज्वेलरी मार्ट के आईपीओ तक पहुंच चुका है। क्लास 5 के बाद पढ़ाई छोड़ने वाले इस कारोबारी ने अपनी मेहनत और सही रणनीति के दम पर हजारों करोड़ रुपये का गहनों का साम्राज्य खड़ा कर दिया।

