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हर महीने तय रकम जमा करना जरूरी नहीं: जोमैटो, स्विगी, ओला और उबर वर्कर्स ऐसे बनाएं रिटायरमेंट फंड

जोमैटो, स्विगी, ओला और उबर जैसे प्लेटफॉर्म से जुड़े गिग वर्कर्स अब अपनी कमाई के हिसाब से रिटायरमेंट के लिए बचत कर सकते हैं। एनपीएस ई-श्रमिक मॉडल में कोई तय मिनिमम या मैक्सिमम कॉन्ट्रिब्यूशन नहीं है। वर्कर कमाई ज्यादा होने पर ज्यादा और कम होने पर कम पैसा जमा कर सकता है।

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In Short

  • एनपीएस ई-श्रमिक मॉडल में कोई फिक्स्ड मिनिमम या मैक्सिमम कॉन्ट्रिब्यूशन तय नहीं है।
  • वर्कर 99 रुपये जैसी छोटी रकम से भी रिटायरमेंट सेविंग शुरू कर सकता है।
  • कॉन्ट्रिब्यूशन वर्कर, प्लेटफॉर्म एग्रीगेटर या दोनों मिलकर कर सकते हैं।

जोमैटो, स्विगी, ओला, उबर और अर्बन कंपनी जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म से कमाई करने वाले गिग वर्कर्स के लिए रिटायरमेंट की बचत करना आसान हो सकता है। ऐसे वर्कर्स की कमाई हर महीने एक जैसी नहीं होती, इसलिए उनके लिए तय रकम जमा करना मुश्किल हो सकता है। इसी जरूरत को देखते हुए एनपीएस ई-श्रमिक मॉडल में ऐसा सिस्टम बनाया गया है, जहां वे अपनी कमाई के हिसाब से पैसा जमा कर सकते हैं। आइए समझते हैं कि यह मॉडल कैसे काम करता है और इसमें वर्कर के लिए क्या-क्या विकल्प दिए गए हैं।

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29 अक्टूबर 2025 को लॉन्च हुआ एनपीएस ई-श्रमिक मॉडल

पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी यानी पीएफआरडीए ने एनपीएस ई-श्रमिक यानी प्लेटफॉर्म सर्विस पार्टनर मॉडल को 29 अक्टूबर 2025 को लॉन्च किया था। इसका मकसद डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए काम करने वाले लोगों को एक स्ट्रक्चर्ड रिटायरमेंट सेविंग सिस्टम से जोड़ना है। इसमें जोमैटो, स्विगी, ओला, उबर और अर्बन कंपनी जैसे प्लेटफॉर्म से जुड़े वर्कर्स शामिल हो सकते हैं।

कोई फिक्स्ड मिनिमम या मैक्सिमम रकम नहीं

इस मॉडल की सबसे खास बात यह है कि पीएफआरडीए ने इंडिविजुअल पेंशन अकाउंट के लिए कोई फिक्स्ड मिनिमम या मैक्सिमम कॉन्ट्रिब्यूशन तय नहीं किया है। यानी वर्कर को हर महीने एक तय रकम जमा करने की मजबूरी नहीं है। पीएफआरडीए ने हाल में बताया कि वर्कर 99 रुपये जैसी छोटी रकम से भी शुरुआत कर सकते हैं। हालांकि 99 रुपये को रेगुलेटर की ओर से तय मिनिमम रकम नहीं माना जाना चाहिए।

अच्छी कमाई वाले महीने में ज्यादा पैसा जमा करने का विकल्प

गिग वर्कर्स की कमाई बुकिंग, डिलीवरी, राइड या असाइनमेंट पर निर्भर करती है। इसलिए किसी महीने कमाई ज्यादा और किसी महीने कम हो सकती है। इस मॉडल में वर्कर ज्यादा कमाई वाले महीने में ज्यादा कॉन्ट्रिब्यूशन कर सकता है और कम कमाई होने पर रकम घटा या कॉन्ट्रिब्यूशन स्किप भी कर सकता है। यह प्लेटफॉर्म और वर्कर के बीच तय शर्तों पर निर्भर करेगा।

वर्कर और प्लेटफॉर्म दोनों कर सकते हैं कॉन्ट्रिब्यूशन

एनपीएस ई-श्रमिक में सिर्फ वर्कर का पैसा जमा करना जरूरी नहीं है। कॉन्ट्रिब्यूशन केवल वर्कर, केवल प्लेटफॉर्म एग्रीगेटर या दोनों मिलकर कर सकते हैं। पीएफआरडीए के अक्टूबर 2025 के सर्कुलर के मुताबिक पॉइंट्स ऑफ प्रेजेंस यानी पीओपी प्लेटफॉर्म एग्रीगेटर्स से संपर्क करने, वर्कर्स को जानकारी देने और उनके ऑनबोर्डिंग में मदद करने के लिए जिम्मेदार हैं।

लंबे समय तक पैसा जमा करना होगा जरूरी

गिग वर्कर्स को आम तौर पर रेगुलर नौकरी करने वाले कर्मचारियों जैसी फिक्स्ड सैलरी और एम्प्लॉयमेंट से जुड़े रिटायरमेंट बेनिफिट्स नहीं मिलते। एनपीएस ई-श्रमिक इसी सोशल सिक्योरिटी गैप को कम करने की कोशिश करता है। हालांकि इसमें कॉन्ट्रिब्यूशन की पूरी फ्लेक्सिबिलिटी है, लेकिन बड़ा रिटायरमेंट कॉर्पस बनाने के लिए वर्कर्स को कमाई होने पर लगातार पैसा जमा करते रहना और लंबे समय तक निवेश बनाए रखना जरूरी होगा।

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Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। BT Bazaar अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है।