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सऊदी, तुर्किये और पाकिस्तान की डिफेंस डील पर ट्रंप की मुहर, भारत के लिए क्यों अहम है मक्का एग्रीमेंट?

सऊदी अरब, तुर्किये और पाकिस्तान के बीच हुए मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा और अहम कदम बताया है। इस समझौते में किसी एक देश पर हमला तीनों पर हमला माना जाएगा। भारत अब इस डील के नेशनल सिक्योरिटी और रीजनल स्टेबिलिटी पर असर का आकलन कर रहा है।

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In Short

  • सऊदी अरब, तुर्किये और पाकिस्तान ने 7 अगस्त को मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट साइन किया
  • किसी एक सदस्य देश पर आर्म्ड अटैक को तीनों देशों पर हमला माना जाएगा
  • भारत ने कहा कि वह समझौते के नेशनल सिक्योरिटी और रीजनल स्टेबिलिटी पर असर की जांच कर रहा है

सऊदी अरब, तुर्किये और पाकिस्तान के बीच हुआ नया डिफेंस एग्रीमेंट अब सिर्फ इन तीन देशों तक सीमित मामला नहीं रह गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे बड़ा और अहम कदम बताया है, जबकि भारत इसके नेशनल सिक्योरिटी और रीजनल स्टेबिलिटी पर असर को समझ रहा है। आखिर इस डील में क्या तय हुआ है, ट्रंप ने इसका समर्थन क्यों किया और भारत इसे लेकर सतर्क क्यों है, आइए आसान भाषा में समझते हैं।

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ट्रंप ने बताया बड़ा और अहम पहला कदम

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को ट्रुथ सोशल पर इस समझौते की तारीफ की। उन्होंने कहा कि वह सऊदी अरब, तुर्किये और पाकिस्तान के मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट से बहुत खुश हैं। ट्रंप के मुताबिक यह दिखाता है कि मिडिल ईस्ट के देश एक साथ आ रहे हैं और अब वे ज्यादा असरदार तरीके से अपनी रक्षा कर सकेंगे। उन्होंने इसे “बिग, बोल्ड एंड इम्पॉर्टेंट फर्स्ट स्टेप” बताया।

एक देश पर हमला मतलब तीनों पर हमला

यह समझौता 7 अगस्त को सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, तुर्किये के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने साइन किया। एग्रीमेंट के तहत तीनों देशों में से किसी एक पर आर्म्ड अटैक होता है, तो उसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। इसका मकसद कलेक्टिव डिटरेंस मजबूत करना और डिफेंस कोऑपरेशन बढ़ाना है।

पाकिस्तान ने कहा किसी देश के खिलाफ नहीं है डील

पाकिस्तान ने इस समझौते को पूरी तरह डिफेंसिव बताया है। पाकिस्तान के फॉरेन ऑफिस स्पोक्सपर्सन ताहिर अंद्राबी ने कहा कि इसके जरिए तीनों देश सिक्योरिटी थ्रेट्स और चुनौतियों का मिलकर सामना कर सकेंगे। पाकिस्तान के डिप्टी प्रधानमंत्री इशाक डार भी कह चुके हैं कि यह डील किसी खास देश के खिलाफ नहीं है।

तीनों देशों की ताकत क्यों बनाती है समझौते को खास

पाकिस्तान दुनिया का एकमात्र न्यूक्लियर आर्म्ड मुस्लिम देश है। सऊदी अरब में इस्लाम के सबसे पवित्र स्थल मौजूद हैं और वह दुनिया के बड़े ऑयल एक्सपोर्टर्स में शामिल है। वहीं तुर्किये नाटो का सदस्य है। ऐसे में इन तीनों देशों का एक कॉमन डिफेंस फ्रेमवर्क में आना रीजनल सिक्योरिटी के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

भारत कर रहा असर का आकलन

विदेश मंत्रालय के स्पोक्सपर्सन रणधीर जायसवाल ने 11 अगस्त को कहा कि भारत इस समझौते को अपनी नेशनल सिक्योरिटी और रीजनल पीस एंड स्टेबिलिटी के नजरिए से देख रहा है। उन्होंने साफ किया कि भारत अपने नेशनल इंटरेस्ट की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाएगा और वेस्ट एशिया के घटनाक्रम पर करीब से नजर रख रहा है।

पाकिस्तान को लेकर भारत ने फिर उठाए सवाल

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जायसवाल ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर और पाकिस्तान के दूसरे हिस्सों में ह्यूमन राइट्स वायलेशन का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि इंटरनेशनल कम्युनिटी को पाकिस्तान को इन मामलों और क्रॉस बॉर्डर टेररिज्म के लिए जवाबदेह ठहराना चाहिए।