अल्टिवा हाइब्रिड लॉन्ग-शॉर्ट फंड ने बेंचमार्क को छोड़ा पीछे, 6 महीने में 13.62% सालाना रिटर्न
अल्टिवा हाइब्रिड लॉन्ग-शॉर्ट फंड ने छह महीने में 13.62% सालाना रिटर्न देकर अपने बेंचमार्क को बड़े अंतर से पीछे छोड़ा है। फंड इक्विटी, डेट, आर्बिट्राज और डेरिवेटिव्स जैसी कई स्ट्रैटेजी का इस्तेमाल करता है, जिससे बाजार में गिरावट के दौरान भी नुकसान को सीमित रखने की कोशिश की जाती है।

In Short
- छह महीने में डायरेक्ट-ग्रोथ प्लान ने 13.62% सालाना रिटर्न दिया
- 31 जुलाई 2026 तक फंड का एयूएम 7,186 करोड़ रुपये रहा
- मार्च की गिरावट में निफ्टी 50 के 11.31% टूटने के मुकाबले फंड सिर्फ 1.53% गिरा
अल्टिवा हाइब्रिड लॉन्ग-शॉर्ट फंड ने कम समय में ऐसा प्रदर्शन दिखाया है, जिसने निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। यह फंड सिर्फ शेयर बाजार के ऊपर जाने पर निर्भर नहीं रहता, बल्कि इक्विटी, डेट, आर्बिट्राज, डेरिवेटिव्स और स्पेशल सिचुएशंस जैसी अलग-अलग स्ट्रैटेजी का इस्तेमाल करता है। इसका मकसद रिटर्न कमाने के साथ पोर्टफोलियो में उतार-चढ़ाव को भी सीमित रखना है। अब समझते हैं कि पिछले छह महीनों में फंड ने कितना रिटर्न दिया, पैसा कहां लगाया और इसकी स्ट्रैटेजी आम म्यूचुअल फंड से कैसे अलग है।
6 महीने में 13.62% सालाना रिटर्न
31 जुलाई 2026 को खत्म हुए छह महीनों में अल्टिवा हाइब्रिड लॉन्ग-शॉर्ट फंड के डायरेक्ट-ग्रोथ प्लान ने 13.62% सालाना रिटर्न दिया। इसी दौरान इसका बेंचमार्क निफ्टी 50 हाइब्रिड कंपोजिट डेट 50:50 इंडेक्स -0.74% सालाना रिटर्न पर रहा। रेगुलर-ग्रोथ प्लान ने भी इसी अवधि में 12.59% सालाना रिटर्न दिया। ये आंकड़े एडलवाइस म्यूचुअल फंड के जुलाई पोर्टफोलियो अपडेट के मुताबिक हैं।
लॉन्च के बाद से भी बेंचमार्क से आगे
फंड को 20 अक्टूबर 2025 को लॉन्च किया गया था। शुरुआत से 31 जुलाई 2026 तक इसके डायरेक्ट-ग्रोथ प्लान ने 12.89% सालाना रिटर्न दिया, जबकि बेंचमार्क का रिटर्न -1.84% रहा। रेगुलर-ग्रोथ प्लान ने इसी अवधि में 11.81% सालाना रिटर्न दिया। 31 जुलाई 2026 तक फंड का एयूएम 7,186 करोड़ रुपये था।
कहां लगाया गया है फंड का पैसा?
31 जुलाई तक पोर्टफोलियो का 39.49% हिस्सा फिक्स्ड इनकम में था। करीब 38% पैसा कैश-फ्यूचर आर्बिट्राज और कवर्ड-कॉल स्ट्रैटेजी में लगाया गया था। लगभग 9% एलोकेशन दूसरी डेरिवेटिव स्ट्रैटेजी में था, जबकि करीब 5% आरईआईटी और इनविट्स में निवेश किया गया था। फिक्स्ड-इनकम पोर्टफोलियो में हाई-क्वालिटी इंस्ट्रूमेंट्स पर फोकस रखा गया। इसका ब्लेंडेड वाईटीएम बढ़कर करीब 8% हो गया, जबकि पोर्टफोलियो ड्यूरेशन घटकर करीब 1.5 साल रह गई।
बाजार गिरा तो नुकसान रहा सीमित
फंड की डिफेंसिव स्ट्रैटेजी का असर मार्च की मार्केट सेल-ऑफ के दौरान भी दिखा। उस समय निफ्टी 50 में 11.31% की गिरावट आई, जबकि अल्टिवा हाइब्रिड लॉन्ग-शॉर्ट फंड सिर्फ 1.53% गिरा। शुरुआत से फंड की रिपोर्टेड वोलैटिलिटी करीब 3.4% रही, जबकि निफ्टी 50 की वोलैटिलिटी 14.3% थी। फंड ने दो-तिहाई से ज्यादा ट्रेडिंग डेज में पॉजिटिव रिटर्न भी दिया।
क्या है हाइब्रिड लॉन्ग-शॉर्ट एसआईएफ?
अल्टिवा एक स्पेशलाइज्ड इन्वेस्टमेंट फंड यानी एसआईएफ स्ट्रैटेजी है। एसआईएफ म्यूचुअल फंड के फ्रेमवर्क के अंदर ही काम करता है, लेकिन इसमें सामान्य म्यूचुअल फंड के मुकाबले ज्यादा फ्लेक्सिबल इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजी इस्तेमाल की जा सकती हैं। इसमें मार्केट-न्यूट्रल और लॉन्ग-शॉर्ट तकनीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है। लिमिटेड शॉर्ट एक्सपोजर के लिए अनहेज्ड डेरिवेटिव्स में 25% तक एक्सपोजर की इजाजत है, लेकिन लेवरेज की अनुमति नहीं है।
निवेश के लिए कम से कम 10 लाख रुपये जरूरी
अल्टिवा की एसआईएफ स्ट्रैटेजी में मिनिमम इन्वेस्टमेंट 10 लाख रुपये है। तुलना करें तो म्यूचुअल फंड में मिनिमम इन्वेस्टमेंट 100 रुपये तक हो सकता है, पीएमएस में 50 लाख रुपये और एआईएफ में 1 करोड़ रुपये की जरूरत होती है। कैटेगरी-3 एआईएफ में ग्रॉस एक्सपोजर 200% तक हो सकता है और लेवरेज का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। अल्टिवा में 30 दिन के भीतर पैसा निकालने पर 0.50% एग्जिट लोड है, जबकि उसके बाद कोई एग्जिट लोड नहीं है। इस तरह यह स्ट्रैटेजी ट्रेडिशनल म्यूचुअल फंड और अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट प्रोडक्ट्स के बीच एक अलग निवेश विकल्प के तौर पर सामने आती है।

