गोल्ड या सिल्वर किसमें ज्यादा दम? सोने को सेंट्रल बैंकों का सहारा, चांदी में छठे साल भी सप्लाई की कमी
गोल्ड और सिल्वर दोनों में तेजी की कहानी अलग-अलग वजहों पर टिकी है। गोल्ड को सेंट्रल बैंकों की मजबूत खरीद का सहारा मिल रहा है, जबकि सिल्वर में इंडस्ट्रियल डिमांड और लगातार छठे साल सप्लाई डेफिसिट का अनुमान है। ऐसे में निवेशकों के लिए दोनों धातुओं का रोल अलग बनता है।

In Short
- 2026 की दूसरी तिमाही में सेंट्रल बैंकों ने 289 टन गोल्ड खरीदा
- सिल्वर में 2026 लगातार छठा साल सप्लाई डेफिसिट रहने का अनुमान
- टाटा म्यूचुअल फंड ने गोल्ड-सिल्वर में 70:30 एलोकेशन को प्राथमिकता दी
कीमती धातुओं की तेजी में गोल्ड और सिल्वर दोनों चर्चा में हैं, लेकिन दोनों को ऊपर ले जाने वाली वजहें अलग हैं। गोल्ड को जहां सेंट्रल बैंकों की खरीद, सेफ हेवन डिमांड और पोर्टफोलियो डायवर्सिफिकेशन का सहारा मिल रहा है, वहीं सिल्वर की कहानी इंडस्ट्रियल डिमांड और सप्लाई डेफिसिट पर टिकी है। इसी वजह से आने वाले समय में दोनों का प्रदर्शन भी अलग रह सकता है। अब समझते हैं कि गोल्ड और सिल्वर में किसकी डिमांड स्टोरी ज्यादा मजबूत दिख रही है।
गोल्ड को सेंट्रल बैंकों की खरीद से मिल रहा मजबूत सहारा
गोल्ड की सबसे बड़ी ताकत उसका मॉनेटरी रोल है। सेंट्रल बैंक अपने रिजर्व को डायवर्सिफाई करने के लिए लगातार गोल्ड खरीद रहे हैं। टाटा म्यूचुअल फंड के अगस्त 2026 आउटलुक में दिए वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के डेटा के मुताबिक, 2026 की दूसरी तिमाही में सेंट्रल बैंकों ने 289 टन गोल्ड खरीदा। यह अब तक की किसी भी दूसरी तिमाही की सबसे बड़ी खरीद रही। वहीं 2026 की पहली छमाही में कुल खरीद 345 टन रही।
मार्च 2026 में अमेरिका-ईरान संघर्ष शुरू होने के बाद गोल्ड ईटीएफ से तेज आउटफ्लो देखने को मिला था, लेकिन जुलाई से ईटीएफ फ्लो में स्थिरता के शुरुआती संकेत दिखे। टाटा म्यूचुअल फंड का मानना है कि सेंट्रल बैंक की खरीद, निवेश की मांग और पोर्टफोलियो डायवर्सिफिकेशन आगे भी गोल्ड के मीडियम से लॉन्ग टर्म आउटलुक को सपोर्ट कर सकते हैं।
गोल्ड की कीमतों में भी दिखी मजबूती
15 अगस्त 2026 को 24 कैरेट गोल्ड की कीमत ₹1,53,660 प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट गोल्ड की कीमत ₹1,40,750 प्रति 10 ग्राम थी। इससे पहले 6 अगस्त को 24 कैरेट गोल्ड ₹1,45,160 और 22 कैरेट गोल्ड ₹1,38,250 प्रति 10 ग्राम था। यानी हाल के दिनों में गोल्ड की कीमतों में अच्छी तेजी देखने को मिली।
सिल्वर में छठे साल भी सप्लाई डेफिसिट का अनुमान
सिल्वर की डिमांड स्टोरी गोल्ड से अलग है। टाटा म्यूचुअल फंड को उम्मीद है कि 2026 लगातार छठा साल होगा जब सिल्वर मार्केट डेफिसिट में रहेगा, यानी मांग उपलब्ध सप्लाई से ज्यादा रह सकती है। सिल्वर का बड़ा हिस्सा इंडस्ट्रियल इस्तेमाल में जाता है। इसका उपयोग इलेक्ट्रॉनिक्स, एआई हार्डवेयर, रिन्यूएबल एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर और सोलर एप्लिकेशन में होता है।
सप्लाई के मोर्चे पर भी कंसंट्रेशन काफी ज्यादा है। टाटा म्यूचुअल फंड के मुताबिक, चीन के पास दुनिया के करीब 11% सिल्वर रिजर्व हैं और वह 60 से 70% रिफाइनिंग कैपेसिटी को कंट्रोल करता है। ऐसे में अगर चीन घरेलू सप्लाई को प्राथमिकता देता है या सप्लाई चेन पर कंट्रोल बढ़ाता है तो ग्लोबल मार्केट में सिल्वर की उपलब्धता और कम हो सकती है।
सिल्वर में तेजी के साथ उतार-चढ़ाव भी ज्यादा
13 अगस्त 2026 को सिल्वर की कीमत ₹2,342 प्रति 10 ग्राम और ₹2,34,200 प्रति किलो थी। 31 जुलाई को यह ₹2,182 प्रति 10 ग्राम और ₹2,18,200 प्रति किलो थी। हालांकि सिल्वर का इंडस्ट्रियल एक्सपोजर ज्यादा होने के कारण ग्लोबल ग्रोथ, मैन्युफैक्चरिंग और इंटरेस्ट रेट में बदलाव का असर इस पर गोल्ड के मुकाबले ज्यादा पड़ सकता है।
टाटा म्यूचुअल फंड ने यह भी कहा है कि सोलर इंस्टॉलेशन की रफ्तार कम होने और सप्लाई की तंगी में कुछ राहत मिलने से निकट अवधि में सिल्वर में कंसॉलिडेशन और ज्यादा वोलैटिलिटी देखने को मिल सकती है।
निवेशकों के लिए गोल्ड-सिल्वर का क्या है सही बैलेंस?
गोल्ड की डिमांड ज्यादा डिफेंसिव और मॉनेटरी है, जबकि सिल्वर की मांग इंडस्ट्रियल ग्रोथ से जुड़ी है। इसी फर्क को देखते हुए टाटा म्यूचुअल फंड कीमती धातुओं में डायवर्सिफाइड एक्सपोजर के लिए 70:30 गोल्ड टू सिल्वर एलोकेशन को प्राथमिकता देता है। यानी पोर्टफोलियो में गोल्ड को ज्यादा वेट और सिल्वर को सीमित लेकिन ग्रोथ से जुड़ा एक्सपोजर देने की रणनीति अपनाई जा सकती है।

