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iPhone और टीवी खरीदने के चक्कर में कर्ज के जाल में फंस रहे लोग! EMI ने बिगाड़ा घर का बजट

भारत में मोबाइल, टीवी और दूसरी जरूरतों के लिए लोन लेना आसान हो गया है। लेकिन अब EMI कई लोगों की जेब पर भारी पड़ रही है। कमाई के मुकाबले कर्ज तेजी से बढ़ रहा है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में सामने आए आंकड़े आने वाले आर्थिक दबाव की ओर इशारा करते हैं।

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In Short

  • भारत में मार्च तक के एक साल में घरेलू कर्ज 36% बढ़ा, उपभोक्ता कर्ज GDP के रिकॉर्ड 46% पर पहुंचा।
  • कमाई के मुकाबले तेजी से बढ़ रहा कर्ज, कई लोगों की सैलरी का बड़ा हिस्सा EMI चुकाने में खर्च हो रहा है।
  • गोल्ड लोन में करीब 45% की बढ़ोतरी, ब्याज दरें बढ़ने से कर्ज लेने वालों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।

भारत में लोगों के लिए लोन लेकर मोबाइल, टीवी और दूसरी चीजें खरीदना आसान हो गया है। लेकिन अब यही सुविधा कई परिवारों के लिए परेशानी बनती जा रही है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में लोगों की कमाई के मुकाबले कर्ज तेजी से बढ़ रहा है। EMI चुकाने में सैलरी का बड़ा हिस्सा खर्च हो रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या कर्ज के सहारे चल रही भारत की खपत की रफ्तार आगे भी बनी रह पाएगी?

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₹50,000 की सैलरी, आधी कमाई EMI में खत्म

25 साल के नवजोत सिंह एक रेस्टोरेंट में काम करते हैं। उनकी महीने की सैलरी ₹50,000 है। उन्होंने सबसे पहले iPhone खरीदने के लिए लोन लिया। इसके बाद PlayStation, टीवी, एक कोर्स और घर जाने के लिए भी कर्ज लिया।

धीरे-धीरे उनकी करीब आधी सैलरी EMI में जाने लगी। खर्च घटाने के लिए उन्होंने बाहर खाना, कपड़े खरीदना और जिम जाना कम कर दिया। नवजोत कहते हैं कि शुरुआत में EMI आसान लगती है, लेकिन धीरे-धीरे इंसान कर्ज के जाल में फंस जाता है।

एक साल में 36% बढ़ा परिवारों का कर्ज

रिजर्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक, मार्च तक के एक साल में घरेलू कर्ज 36% बढ़ा। उपभोक्ता कर्ज देश की GDP के रिकॉर्ड 46% तक पहुंच गया।

सेंटर फॉर सोशल एंड इकोनॉमिक प्रोग्रेस के आंकड़े बताते हैं कि 2025-26 में लोगों का कर्ज उनकी खर्च करने योग्य कमाई के मुकाबले करीब चार गुना तेजी से बढ़ा।

वहीं, 2025 तक के तीन वर्षों में महंगाई घटाने के बाद नियमित वेतन पाने वाले कर्मचारियों की औसत कमाई 4% से भी कम बढ़ी।

प्रतीकात्मक तस्वीर

गोल्ड लोन में भी तेज उछाल

आर्थिक दबाव का असर गोल्ड लोन पर भी दिख रहा है। मार्च तक के एक साल में सोने के बदले लिया जाने वाला कर्ज करीब 45% बढ़ा।

मुंबई के बाहरी इलाके में रहने वाले 35 वर्षीय विशाल गायकवाड़ चार अलग-अलग कर्ज चुका रहे हैं। उन्हें ऑफिस की नौकरी के बाद फूड डिलीवरी भी करनी पड़ती है। कर्ज और परिवार के इलाज के खर्च के कारण उन्होंने शादी तक टाल दी है।

ब्याज दरें बढ़ीं तो बढ़ सकती है मुश्किल

रिपोर्ट के मुताबिक, RBI की प्रमुख ब्याज दर 5.5% है और अर्थशास्त्रियों को आगे 0.75 से 1 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी की उम्मीद है।

CLSA के अनुमान के मुताबिक, मार्च 2025 तक परिवारों की कमाई का करीब 13% हिस्सा कर्ज चुकाने में खर्च हो रहा था, जबकि पिछले दशक में यह 10-11% था।

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हालांकि, बैंकों में खराब कर्ज का अनुपात अभी कई दशकों के निचले स्तर के करीब है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को भरोसा है कि देश में खपत मजबूत बनी रहेगी। लेकिन विशेषज्ञों की चिंता है कि बचत घटने और EMI बढ़ने से आगे लोगों की खरीदारी करने की क्षमता पर दबाव पड़ सकता है।

Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। BT Bazaar अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है।