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रियल एस्टेट में टैक्स छूट, शेयर बाजार में क्यों नहीं? लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए उठी मांग

शेयर बाजार में निवेश करने वालों पर टैक्स का बोझ कम करने की मांग तेज हो रही है। टैक्स एक्सपर्ट अंकित जैन ने लंबे समय तक निवेश करने वालों को राहत देने की वकालत की है। उन्होंने बताया कि मौजूदा टैक्स व्यवस्था में क्या कमियां हैं और सरकार किन बदलावों पर विचार कर सकती है।

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In Short

  • टैक्स एक्सपर्ट अंकित जैन ने लंबे समय तक शेयर बाजार में निवेश करने वालों को टैक्स में राहत देने की मांग की।
  • इक्विटी निवेश पर कई तरह के टैक्स और चार्ज से बढ़ रहा निवेशकों का बोझ।
  • सेबी की रिपोर्ट का हवाला देकर अंकित जैन ने कहा, 93% रिटेल ट्रेडर्स को होता है नुकसान।

भारत में शेयर बाजार में निवेश पर लगने वाले टैक्स को लेकर बहस तेज हो रही है। सवाल यह है कि क्या लंबे समय तक शेयरों में पैसा लगाने वाले निवेशकों को टैक्स में राहत मिलनी चाहिए? टैक्स एक्सपर्ट अंकित जैन का मानना है कि सरकार को मौजूदा इक्विटी टैक्स व्यवस्था पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। उनके मुताबिक, लंबे समय तक निवेश करने वालों को प्रोत्साहन देने के लिए टैक्स नियमों में बदलाव किया जा सकता है।

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बिजनेस टुडे के शो में सीनियर एंकर साक्षी बत्रा के सवालों का जवाब देते हुए Ved Jain & Associates के पार्टनर अंकित जैन ने कहा कि सरकार को इक्विटी पर लगने वाले टैक्स के मौजूदा ढांचे पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि लंबे समय तक निवेश करने वालों को प्रोत्साहित किया जाना जरूरी है, क्योंकि ऐसे निवेशक बाजार को स्थिरता देने के साथ कंपनियों और कारोबारों के विकास में भी योगदान करते हैं।

लंबे समय तक निवेश करने वालों को मिले राहत

अंकित जैन के मुताबिक, सरकार को ऐसी टैक्स व्यवस्था पर विचार करना चाहिए, जिसमें लंबे समय तक निवेश बनाए रखने वालों को फायदा मिले। इसके लिए शेयरों को रखने की अवधि में बदलाव या दो से तीन साल तक निवेश बनाए रखने वाले निवेशकों के लिए अलग टैक्स व्यवस्था जैसे विकल्पों पर विचार किया जा सकता है।

उनका कहना है कि इस तरह के कदम से लंबे समय तक निवेश करने वालों को प्रोत्साहन मिलेगा। इसका उद्देश्य केवल टैक्स में कटौती करना नहीं, बल्कि निवेशकों को बार-बार खरीद-बिक्री करने के बजाय धैर्य के साथ निवेश बनाए रखने के लिए प्रेरित करना होना चाहिए।

रियल एस्टेट और शेयरों के टैक्स में अंतर

अंकित जैन ने शेयर बाजार और रियल एस्टेट में निवेश पर मिलने वाले टैक्स लाभ के अंतर की ओर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि रियल एस्टेट में लंबे समय तक निवेश करने वालों को कुछ परिस्थितियों में इनकम टैक्स कानून के सेक्शन 54 के तहत पूंजीगत लाभ पर छूट मिल सकती है। इसके विपरीत, शेयरों में निवेश करने वालों को इसी तरह का लाभ नहीं मिलता।

प्रतीकात्मक तस्वीर

उनके मुताबिक, यह अंतर इक्विटी निवेशकों के लिए नुकसानदेह हो सकता है। शेयर बाजार में निवेश करने वालों को केवल कैपिटल गेन टैक्स ही नहीं, बल्कि सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT), स्टांप ड्यूटी, ब्रोकरेज पर GST और डिपॉजिटरी चार्ज जैसे खर्च भी उठाने पड़ते हैं। इन सभी लागतों का संयुक्त असर निवेश को महंगा बना सकता है।

सिर्फ टैक्स कटौती नहीं, सही नीति की जरूरत

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अंकित जैन के मुताबिक, सभी एसेट क्लास पर टैक्स व्यवस्था को आसान और समान बनाना उपयोगी हो सकता है, लेकिन शेयर बाजार की भूमिका को अलग नजरिए से देखना जरूरी है। शेयरों में निवेश से कंपनियों को पूंजी मिलती है, जिससे उद्योग और कारोबार के विस्तार में मदद मिलती है। वहीं, सोना मुख्य रूप से संपत्ति रखने और निवेश के विकल्प के तौर पर इस्तेमाल होता है।

ऐसे में इक्विटी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए लंबे समय तक निवेश बनाए रखने वालों के लिए अलग टैक्स व्यवस्था पर विचार किया जा सकता है।

रिटेल ट्रेडर्स के नुकसान का भी उठाया मुद्दा

अंकित जैन ने सेबी की एक हालिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि रिटेल ट्रेडर्स में 93 फीसदी को नुकसान होता है। उनके मुताबिक, नीति बनाते समय लंबे समय तक निवेश करने वालों और बार-बार ट्रेडिंग करने वालों के बीच अंतर करना जरूरी है।

अगर सरकार शेयर बाजार पर लगने वाले टैक्स की समीक्षा करती है, तो लंबे समय तक निवेश करने वालों को राहत देना एक अहम विकल्प हो सकता है। इससे निवेशकों को धैर्य के साथ बाजार में बने रहने के लिए प्रोत्साहन मिल सकता है और टैक्स नीति को उत्पादक निवेश के लक्ष्य के अनुरूप बनाया जा सकता है।

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Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। BT Bazaar अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है।