भारतीय शेयर बाजार में बढ़ेगी हलचल! 10 साल बाद वापसी की तैयारी में ब्रिटेन का ये दिग्गज बैंक
ब्रिटेन का दिग्गज बैंक बार्कलेज भारत के शेयर बाजार में बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रहा है। करीब 10 साल बाद बैंक एक ऐसे कारोबार में वापसी पर विचार कर रहा है, जहां IPO की बढ़ती गतिविधियों ने नए अवसर पैदा किए हैं। जानिए क्या है बार्कलेज की पूरी योजना।

In Short
- बार्कलेज करीब 10 साल बाद भारत के इक्विटी कैपिटल मार्केट कारोबार में वापसी की तैयारी कर रहा है।
- बैंक ने पिछले पांच वर्षों में भारत में 500 मिलियन पाउंड से ज्यादा की पूंजी लगाई है।
- भारत के मजबूत IPO बाजार और निवेशकों की भागीदारी को देखते हुए बैंक कारोबार बढ़ाना चाहता है।
ब्रिटेन का दिग्गज बैंक बार्कलेज (Barclays Plc) भारत के इक्विटी कैपिटल मार्केट (ECM) कारोबार में दोबारा उतरने की तैयारी कर रहा है। बैंक भारतीय शेयर बाजार में बढ़ते अवसरों को देखते हुए अपनी मौजूदगी मजबूत करना चाहता है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, बार्कलेज भारत में नए बैंकरों की नियुक्ति करने के साथ-साथ पूंजी निवेश भी बढ़ा रहा है, ताकि शेयर बिक्री और IPO से जुड़े कारोबार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा सके।
करीब 10 साल बाद वापसी की तैयारी
नई दिल्ली में आयोजित ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम के दौरान बार्कलेज इंडिया के CEO प्रमोद कुमार ने एक टीवी इंटरव्यू में कहा कि भारत में लंबी अवधि के लिए कारोबार बढ़ाने के बड़े अवसर मौजूद हैं।
उन्होंने बताया कि बार्कलेज पहले से ही फाइनेंसिंग, मर्जर एंड एक्विजिशन (M&A) और कॉरपोरेट बैंकिंग जैसी सेवाओं में मजबूत स्थिति रखता है। हालांकि, इक्विटी कैपिटल मार्केट ऐसा क्षेत्र है, जहां बैंक अपनी मौजूदगी दोबारा बनाना चाहता है।
प्रमोद कुमार के मुताबिक, बैंक इस कारोबार में वापसी को लेकर गंभीरता से विचार कर रहा है।
भारत के IPO बाजार पर नजर
बार्कलेज की यह योजना इसलिए भी अहम है क्योंकि बैंक करीब एक दशक बाद भारत के इक्विटी कैपिटल मार्केट कारोबार में वापसी कर सकता है।
भारत में पिछले दो वर्षों के दौरान IPO और शेयर बिक्री से जुड़े रिकॉर्ड सौदे देखने को मिले हैं। ऐसे में बार्कलेज भी कंपनियों के शेयर जारी करने और पूंजी जुटाने से जुड़े सौदों में अपनी भूमिका बढ़ाना चाहता है।
भारतीय बाजार में बढ़ते अवसरों को देखते हुए Emirates NBD और DBS Group Holdings जैसे बैंक भी अपनी मौजूदगी बढ़ाने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।
कारोबार शुरू करने में लगेगा समय
प्रमोद कुमार ने साफ किया कि इक्विटी कैपिटल मार्केट कारोबार में वापसी तुरंत नहीं होगी। उनके मुताबिक, बैंक को इस कारोबार की शुरुआत लगभग शून्य से करनी होगी, इसलिए इसमें समय लग सकता है।
उन्होंने कहा कि फिलहाल कैपिटल मार्केट में कुछ कमजोरी जरूर दिखाई दे रही है, लेकिन भारत में फंड जुटाने का माहौल आगे भी मजबूत रहने की उम्मीद है।
इसकी एक बड़ी वजह रिटेल और संस्थागत निवेशकों की भागीदारी है, जो भारतीय बाजार को लगातार समर्थन दे रहे हैं।
पांच साल में 500 मिलियन पाउंड से ज्यादा निवेश
बार्कलेज भारत में अपने अलग-अलग बैंकिंग कारोबार को मजबूत करने के लिए निवेश बढ़ा रहा है।
प्रमोद कुमार के मुताबिक, बैंक ने पिछले पांच वर्षों में भारत में 500 मिलियन पाउंड यानी करीब 664 मिलियन डॉलर से ज्यादा की पूंजी लगाई है।
इसके अलावा पिछले एक साल में नए बैंकरों की नियुक्तियां की गई हैं और टेक्नोलॉजी में भी निवेश किया जा रहा है।
रुपये के बॉन्ड बाजार में भी मजबूत मौजूदगी
बार्कलेज भारत में अपने इन्वेस्टमेंट बैंकिंग कारोबार के साथ कॉरपोरेट और प्राइवेट बैंकिंग सेवाओं का भी विस्तार कर रहा है।
प्रमोद कुमार ने बताया कि बैंक भारतीय रुपये के बाजार में सबसे सक्रिय संस्थानों में शामिल है। इसमें ग्राहकों के लिए रुपये में जारी होने वाले बॉन्ड की सिंडिकेशन से जुड़ी सेवाएं भी शामिल हैं।
बैंक की योजना भारत में अपने मौजूदा कारोबार को मजबूत करने के साथ इक्विटी कैपिटल मार्केट में दोबारा जगह बनाने की है।

