नौकरी चली गई लेकिन पर्सनल लोन की EMI तो देनी है...घबराने से अच्छा तुरंत फॉलो करें ये 4 स्टेप
अचानक नौकरी छूटना किसी के लिए भी बड़ा झटका होता है। इसका असर सिर्फ मानसिक तनाव तक सीमित नहीं रहता, बल्कि घर की पूरी वित्तीय योजना भी गड़बड़ा जाती है। स्थिति तब और कठिन हो जाती है, जब हर महीने पर्सनल लोन की ईएमआई चुकानी हो।

अचानक नौकरी छूटना किसी के लिए भी बड़ा झटका होता है। इसका असर सिर्फ मानसिक तनाव तक सीमित नहीं रहता, बल्कि घर की पूरी वित्तीय योजना भी गड़बड़ा जाती है। स्थिति तब और कठिन हो जाती है, जब हर महीने पर्सनल लोन की ईएमआई चुकानी हो। ऐसे समय में घबराने के बजाय सोच-समझकर और समय रहते कदम उठाना बेहद जरूरी है।
शांत होकर करें ये काम
1. नौकरी जाने के बाद आपको सबसे पहला काम अपनी मौजूदा आर्थिक स्थिति को समझना होना चाहिए। इसमें बचत, इमरजेंसी फंड, किसी से पैसा लेना हो इत्यादी शामिल है। इससे यह साफ होगा कि आप कितने महीनों तक ईएमआई बिना दिक्कत के चुका सकते हैं।
2. इस दौरान खर्चों पर सख्त नियंत्रण जरूरी है। बाहर खाना, सब्सक्रिप्शन या शौक से जुड़े खर्च फिलहाल रोक दें। किराया, बिजली-पानी के बिल और पर्सनल लोन ईएमआई जैसे जरूरी खर्चों को प्राथमिकता दें।
3. जिस बैंक या वित्तीय संस्था से आपका पर्सनल लोन चल रहा है उससे जल्दी संपर्क करें। आमतौर पर लेंडर ड्यू डेट मिस होने से पहले ज्यादा सहयोगी रहते हैं। आप उनसे अस्थायी मोरेटोरियम, सिर्फ ब्याज चुकाने का विकल्प या लोन की अवधि बढ़ाने जैसी राहत मांग सकते हैं। अगर नौकरी ढूंढने में समय लग रहा है, तो औपचारिक री-स्ट्रक्चरिंग का अनुरोध भी किया जा सकता है। इससे पेनल्टी, अतिरिक्त ब्याज और क्रेडिट स्कोर पर पड़ने वाले बुरे असर से बचा जा सकता है।
4. जहां तक संभव हो, थोड़ा प्रीपेमेंट करते रहें, ताकि कुल ब्याज कम हो। कम ब्याज दर वाले लेंडर में बैलेंस ट्रांसफर पर भी विचार किया जा सकता है, लेकिन फीस और शर्तों को ध्यान से समझना जरूरी है। फ्रीलांसिंग, पार्ट-टाइम या छोटे कॉन्ट्रैक्ट से अस्थायी आय जुटाकर ईएमआई मैनेज की जा सकती है।
पर्सनल लोन अनसिक्योर्ड लोन होते हैं, इसलिए इन पर ब्याज ज्यादा होता है। ऐसे में समय रहते प्लान करना, लेंडर से खुलकर बात करना और बजट को नए सिरे से तय करना ही नौकरी जाने के इस मुश्किल दौर से बिना अतिरिक्त वित्तीय जोखिम के निकलने का सबसे सुरक्षित रास्ता बन सकता है।

