scorecardresearch

Akshaya Tritiya 2026: गोल्ड बॉन्ड, गोल्ड ईटीएफ या फिजिकल गोल्ड - कौन सा तरीका है स्मार्ट इंवेस्टमेंट?

आज निवेशकों के पास तीन प्रमुख विकल्प हैं- Sovereign Gold Bonds (SGBs), Gold ETFs और फिजिकल गोल्ड। हर ऑप्शन के अपने फायदे और सीमाएं हैं। जानिए आपके लिए क्या सही?

Advertisement
AI Generated Image

Akshaya Tritiya 2026: अक्षय तृतीया पर सोना खरीदना परंपरा रही है, लेकिन अब निवेशकों का नजरिया बदल रहा है। पिछले एक साल में सोने की कीमतों में करीब 60% उछाल और 9 साल में ~435% रिटर्न ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सिर्फ सोना खरीदना ही नहीं, बल्कि सही विकल्प चुनना ज्यादा जरूरी है।

advertisement

आज निवेशकों के पास तीन प्रमुख विकल्प हैं- Sovereign Gold Bonds (SGBs), Gold ETFs और फिजिकल गोल्ड। हर ऑप्शन के अपने फायदे और सीमाएं हैं।

SGB

SGBs लंबी अवधि के निवेश के लिए बेहद आकर्षक माने जाते हैं। इनमें 2.5% सालाना ब्याज मिलता है और मैच्योरिटी (8 साल) तक रखने पर कैपिटल गेन टैक्स फ्री होता है। साथ ही सरकार की गारंटी भी रहती है।

लेकिन फिलहाल नए इश्यू नहीं आने से निवेशकों को सेकेंडरी मार्केट में खरीदना पड़ रहा है, जहां लिक्विडिटी कम है और टैक्स बेनिफिट भी पूरी तरह नहीं मिलते। बिजनेस टुडे को Livelong Wealth के हरिप्रसाद ने बताया कि थ्योरी में SGB बेहतरीन हैं, लेकिन मौजूदा हालात में इनकी आकर्षकता कम हो गई है।

Gold ETF

Gold ETFs तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। बिजनेस टुडे को Mirae Asset Investment Managers ने बताया कि FY26 में इस कैटेगरी में ₹70,000 करोड़ का नेट इनफ्लो आया और कुल AUM ₹1.71 लाख करोड़ तक पहुंच गया। ETF के जरिए निवेश करने पर स्टोरेज, सिक्योरिटी और प्योरिटी की चिंता नहीं रहती। इन्हें स्टॉक एक्सचेंज पर आसानी से खरीदा-बेचा जा सकता है, जिससे लिक्विडिटी मिलती है।

हालांकि इसमें 0.5–1% तक का एक्सपेंस रेशियो और ब्रोकरेज लगता है, लेकिन सुविधा और फ्लेक्सिबिलिटी इसे मौजूदा बाजार में सबसे बेहतर विकल्प बनाती है।

फिजिकल गोल्ड

फिजिकल गोल्ड आज भी त्योहारों और पारंपरिक खरीदारी में सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है। लेकिन निवेश के नजरिए से यह कमजोर विकल्प माना जाता है। मेकिंग चार्ज, GST, स्टोरेज खर्च और रीसेल पर नुकसान- ये सभी रिटर्न को कम कर देते हैं। साथ ही सुरक्षा और शुद्धता से जुड़े जोखिम भी रहते हैं।

क्या हो निवेश की रणनीति?

एक्सपर्ट्स का मानना है कि सोने को पोर्टफोलियो का हिस्सा जरूर बनाना चाहिए, लेकिन इसे मुख्य निवेश नहीं, बल्कि ‘सेफ-हेवन’ के तौर पर देखना चाहिए। Gold ETF के जरिए धीरे-धीरे निवेश करना और इसे एसेट एलोकेशन का हिस्सा बनाना सबसे व्यावहारिक रणनीति मानी जा रही है।

  • SGB: लंबी अवधि के लिए अच्छा, लेकिन अभी सीमित मौके
  • Gold ETF: मौजूदा समय में सबसे आसान और लिक्विड विकल्प
  • फिजिकल गोल्ड: सिर्फ ज्वेलरी और परंपरा के लिए सही