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गिफ्ट लेने वाले या देने वाले - किसे देना होता है टैक्स? ITR फाइल करने से पहले जान लें जरूरी बातें

टैक्स फाइलिंग सीजन में गिफ्ट को लेकर नियम समझना जरूरी है। गैर-रिश्तेदार से ₹50,000 से ज्यादा का गिफ्ट टैक्सेबल होता है। कैश, प्रॉपर्टी और शेयर सभी शामिल हैं। गलत जानकारी देने या गिफ्ट छुपाने पर नोटिस और पेनाल्टी का जोखिम बढ़ सकता है, इसलिए सही तरीके से रिपोर्ट करना जरूरी है।

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AI Generated Image

Income Tax: टैक्स फाइलिंग सीजन शुरू होते ही कई लोगों को पता चल रहा है कि गिफ्ट भी टैक्स के दायरे में आ सकता है। कैश, प्रॉपर्टी या शेयर के रूप में मिले गिफ्ट अब आयकर विभाग की नजर में हैं और इन्हें सही तरीके से रिपोर्ट करना जरूरी हो गया है।

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गिफ्ट देने वाला या पाने वाला- किसे देना होगा टैक्स?

बिजनेस टुडे को Basiz Fund Services के फाउंडर और एमडी सीए आदित्य सेश ने बताया कि सबसे बड़ी गलतफहमी यही है कि गिफ्ट देने वाले पर टैक्स लगता है। उन्होंने साफ किया कि भारत में आमतौर पर गिफ्ट पाने वाला व्यक्ति टैक्स देता है, न कि देने वाला।

अगर किसी व्यक्ति को ₹50,000 से ज्यादा का गिफ्ट किसी गैर-रिश्तेदार से मिलता है, तो पूरी रकम उसकी आय मानी जाती है और उस पर टैक्स लगता है। यह नियम कैश, प्रॉपर्टी और अन्य एसेट्स सभी पर लागू होता है।

किन गिफ्ट्स पर नहीं लगता टैक्स?

हालांकि कानून में कुछ अहम छूट भी हैं। माता-पिता, पति/पत्नी, भाई-बहन या बच्चों से मिला गिफ्ट पूरी तरह टैक्स-फ्री होता है, चाहे राशि कितनी भी हो। शादी के दौरान मिले गिफ्ट या वसीयत/इनहेरिटेंस के जरिए मिले एसेट्स भी टैक्स से बाहर रहते हैं।

गिफ्ट लेने के बाद असली पेच तब आता है जब आप उस एसेट को बेचते हैं। सीए आदित्य सेश बताते हैं कि बेचते समय आपको गिफ्ट देने वाले की मूल खरीद कीमत को ही आधार मानना होगा, न कि मौजूदा वैल्यू।

इसका मतलब है कि अगर किसी प्रॉपर्टी को कम कीमत पर खरीदा गया था और बाद में ज्यादा कीमत पर बेचा गया, तो कैपिटल गेन ज्यादा दिखेगा और टैक्स भी बढ़ सकता है।

AIS से बढ़ी निगरानी

अब Annual Information Statement (AIS) के जरिए आयकर विभाग बड़े लेन-देन पर नजर रख रहा है। इसमें प्रॉपर्टी खरीद-बिक्री और बड़े ट्रांजैक्शन शामिल होते हैं। ऐसे में किसी भी गिफ्ट को छुपाना मुश्किल हो गया है।

इनकम टैक्स रिटर्न में ऐसे गिफ्ट्स को सही तरीके से दिखाना जरूरी है, आमतौर पर ITR-2 या ITR-3 में। एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि गिफ्ट डीड, बैंक रिकॉर्ड और रिश्ते का प्रमाण जैसे दस्तावेज संभालकर रखें। गलत जानकारी देने या गिफ्ट छुपाने पर नोटिस, पेनाल्टी या री-असेसमेंट का जोखिम बढ़ सकता है।