
Gen Z के लिए रियल एस्टेट या म्यूचुअल फंड...वेल्थ बनाने के लिए कहां पैसा लगाना हो सकता है बेहतर?
Gen Z के पास आज प्रॉपर्टी के अलावा इक्विटी, म्यूचुअल फंड और REITs जैसे कई निवेश विकल्प हैं। ऐसे में सवाल है कि क्या रियल एस्टेट अब भी वेल्थ बनाने की स्ट्रैटेजी में फिट बैठता है? एक्सपर्ट ने लिक्विडिटी, रिटर्न और बदलती निवेश जरूरतों के आधार पर इसका गणित समझाया है।

In Short
- Gen Z अब प्रॉपर्टी को इक्विटी, म्यूचुअल फंड और REITs के साथ तुलना करके देख रही है।
- युवा निवेशकों के लिए रिटर्न के साथ लिक्विडिटी और फ्लेक्सिबिलिटी भी अहम फैक्टर बन गए हैं।
- फ्रैक्शनल ओनरशिप और SM REIT ने बिना पूरी प्रॉपर्टी खरीदे रियल एस्टेट एक्सपोजर का विकल्प दिया है।
युवा निवेशकों खासकर Gen Z के पास आज निवेश के कई विकल्प मौजूद हैं। इक्विटी और म्यूचुअल फंड से लेकर REITs, एक्सचेंज ट्रेडेड फंड और डिजिटल इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म तक उनकी पहुंच है। ऐसे में रियल एस्टेट अब उनके लिए पहला और डिफॉल्ट निवेश नहीं रह गया है। युवा निवेशक प्रॉपर्टी को भी दूसरे एसेट क्लास के साथ रिटर्न, लिक्विडिटी और फ्लेक्सिबिलिटी के आधार पर परख रहे हैं।
पोर्टफोलियो में रियल एस्टेट की जगह
BOP.in के को-फाउंडर गौरव मावी के मुताबिक, डायवर्सिफाइड पोर्टफोलियो में रियल एस्टेट की भूमिका बनी रह सकती है। हालांकि, युवा निवेशकों का इसे देखने का तरीका पिछली पीढ़ियों से अलग है। पहले घर या प्रॉपर्टी खरीदना निवेश की शुरुआती प्राथमिकताओं में शामिल होता था, लेकिन अब युवा इसकी तुलना दूसरे निवेश विकल्पों से कर रहे हैं।
हाउसिंग मार्केट में बनी हुई है डिमांड
भारत के रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी मार्केट में मांग मजबूत बनी हुई है। Knight Frank के अनुमान के मुताबिक, 2025 में देश के आठ बड़े रेजिडेंशियल मार्केट में 3.48 लाख से ज्यादा घर बिके। इस दौरान प्रीमियम हाउसिंग की बाजार हिस्सेदारी भी बढ़ी।
मावी की ओर से बताए गए डेटा के मुताबिक, दिल्ली-एनसीआर के कई माइक्रो मार्केट में प्रॉपर्टी की कीमतों में सालाना करीब 10% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट भी रेजिडेंशियल और कमर्शियल प्रॉपर्टी में निवेश के फैसलों को प्रभावित कर रहा है।

Gen Z के लिए लिक्विडिटी क्यों अहम?
युवा निवेशकों के लिए लिक्विडिटी एक बड़ा मुद्दा है। करियर में बदलाव, कारोबार शुरू करने की योजना या बार-बार शहर बदलने जैसी जरूरतों के कारण कम उम्र में अपनी पूंजी का बड़ा हिस्सा फिजिकल प्रॉपर्टी में लगाना कम आकर्षक हो सकता है।
हालांकि, फ्रैक्शनल ओनरशिप और लिस्टेड रियल एस्टेट प्रोडक्ट्स ने नए विकल्प दिए हैं। SEBI ने मार्च 2024 में Small and Medium REIT यानी SM REIT फ्रेमवर्क पेश किया था। इसके जरिए पूरा घर या प्रॉपर्टी खरीदे बिना भी रियल एस्टेट में एक्सपोजर लिया जा सकता है।
मावी ने ICRA के डेटा का हवाला देते हुए बताया कि भारत में फ्रैक्शनल ओनरशिप प्लेटफॉर्म के जरिए करीब ₹5,000 करोड़ के एसेट मैनेज किए जा रहे हैं। वहीं, करीब ₹67,000 करोड़ से ₹71,000 करोड़ की पूरी हो चुकी ऑफिस प्रॉपर्टी को संभावित रूप से SM REIT स्ट्रक्चर के जरिए मॉनेटाइज किया जा सकता है।
फिजिकल प्रॉपर्टी के फायदे और चुनौतियां
फिजिकल प्रॉपर्टी से किराये की कमाई, किसी एसेट पर सीधा मालिकाना हक और लोन लेकर बड़ी वैल्यू की संपत्ति खरीदने जैसे फायदे मिल सकते हैं। इसके साथ ट्रांजैक्शन कॉस्ट, मेंटेनेंस, कर्ज से जुड़ा जोखिम और कम लिक्विडिटी जैसी चुनौतियां भी रहती हैं।
Dwarka Expressway, Yamuna Expressway, Greater Noida और Noida International Airport के आसपास कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ने के साथ रेजिडेंशियल और कमर्शियल गतिविधियां भी बढ़ रही हैं।
Gen Z के लिए अब सवाल केवल रियल एस्टेट या फाइनेंशियल एसेट में से किसी एक को चुनने का नहीं है। रियल एस्टेट, REITs, इक्विटी और दूसरे फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट पोर्टफोलियो में अलग-अलग जरूरतों को पूरा कर सकते हैं। इनमें निवेश का फैसला आय, निवेश की अवधि, लिक्विडिटी की जरूरत, जोखिम उठाने की क्षमता और प्रॉपर्टी की क्वालिटी व लोकेशन जैसे फैक्टर्स पर निर्भर करेगा।

