
SUV के बढ़ते क्रेज से 62 महीने की EMI तक, ऐसे बदल रही हैं भारतीयों की कार खरीदने की आदतें
भारत में कार खरीदने का ट्रेंड तेजी से बदल रहा है। महंगी SUV और ज्यादा फीचर्स वाली गाड़ियों के लिए लोग बड़ा लोन ले रहे हैं और EMI की अवधि बढ़ा रहे हैं। छोटे शहरों में भी यह बदलाव दिख रहा है। आखिर कार खरीदने की नई आदतें आपकी जेब पर कितना असर डालेंगी?

In Short
- भारत में औसत कार लोन 49% बढ़कर 8.2 लाख रुपये पहुंचा, EMI की अवधि बढ़कर 62 महीने हुई।
- महंगी कारों के लिए लोन लेने वाले 51% ग्राहक छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों से हैं।
- टू-व्हीलर लोन में NBFC की 73% हिस्सेदारी, जून 2026 तक सक्रिय कार लोन ग्राहकों की संख्या 2.5 करोड़ पहुंची।
भारत में कार खरीदने का तरीका तेजी से बदल रहा है। अब लोग छोटी कारों के बजाय बड़ी SUV और ज्यादा फीचर्स वाली गाड़ियां खरीदना पसंद कर रहे हैं। लेकिन महंगी कारों का सपना पूरा करने के लिए लोग ज्यादा लोन लेने के साथ EMI चुकाने की अवधि भी बढ़ा रहे हैं। खास बात यह है कि यह बदलाव सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में भी दिखाई दे रहा है।
ट्रांसयूनियन सिबिल की Shifting Gears 2026: Credit Drives Today’s Mobility रिपोर्ट में वाहन खरीदने और लोन लेने की बदलती आदतों का खुलासा हुआ है।
कार लोन बढ़कर 8.2 लाख रुपये पहुंचा
रिपोर्ट के मुताबिक, 2019 की पहली छमाही से 2026 की पहली छमाही के बीच पैसेंजर व्हीकल के औसत लोन में 49% की बढ़ोतरी हुई है। अब औसत कार लोन 8.2 लाख रुपये तक पहुंच गया है।
वहीं, लोन चुकाने की औसत अवधि पांच महीने बढ़कर 62 महीने यानी पांच साल से ज्यादा हो गई है। लंबी अवधि में EMI कम हो सकती है, लेकिन इससे कुल ब्याज का बोझ बढ़ने की संभावना भी रहती है।
छोटे शहरों में भी महंगी कारों की मांग
महंगी कारों का क्रेज अब महानगरों से बाहर भी बढ़ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, 2026 की पहली छमाही में दूसरी या अगली ज्यादा कीमत वाली कार के लिए लोन लेने वाले 51% ग्राहक छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों से थे। यह हिस्सेदारी 2019 के मुकाबले छह प्रतिशत अंक ज्यादा है।
ग्रामीण इलाकों में दोपहिया वाहन से कार की ओर बढ़ने वाले ग्राहकों के लोन में 2019 से सालाना औसतन 15% की वृद्धि हुई है।

टू-व्हीलर लोन लेने वालों की बदली तस्वीर
दोपहिया वाहन खरीदने वालों की आदतें भी बदल रही हैं। साल 2019 में टू-व्हीलर लोन लेने वालों में 58% पहली बार कर्ज लेने वाले थे। 2026 की पहली छमाही में यह हिस्सेदारी घटकर 39% रह गई।
जून 2026 तक टू-व्हीलर लोन का बकाया बढ़कर 1.76 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। वहीं, सक्रिय कर्जदारों की संख्या 1.7 करोड़ से बढ़कर 3.3 करोड़ हो गई।
वाहन लोन में NBFC का दबदबा
रिपोर्ट के मुताबिक, दोपहिया वाहन लोन में NBFC की हिस्सेदारी 73% और पैसेंजर व्हीकल लोन में 37% रही। वहीं, पैसेंजर व्हीकल लोन में निजी बैंकों की हिस्सेदारी 26% थी।
जून 2026 तक कार लोन लेने वाले सक्रिय ग्राहकों की संख्या 2.5 करोड़ पहुंच गई।
कार खरीदते समय सिर्फ EMI न देखें
रिपोर्ट से साफ है कि भारतीय ग्राहक बेहतर और महंगी गाड़ियों के लिए ज्यादा कर्ज ले रहे हैं। हालांकि, लंबी अवधि की EMI चुनते समय कुल ब्याज, बीमा, ईंधन और मेंटेनेंस का खर्च भी देखना जरूरी है। कम EMI का मतलब हमेशा सस्ती कार नहीं होता।

