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FD और SCSS में कहां मिलेगा बेहतर रिटर्न? रिटायरमेंट सेविंग्स के लिए करें सही चुनाव

सीनियर सिटीजन्स के लिए FD और SCSS दोनों कम जोखिम वाले निवेश विकल्प हैं। SCSS में फिलहाल 8.2% सालाना ब्याज मिल रहा है, जबकि FD में ज्यादा निवेश और अलग-अलग अवधि चुनने की सुविधा है। ऐसे में रिटायरमेंट के पैसे के लिए दोनों के नियम और फायदे समझना जरूरी है।

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In Short

  • SCSS पर FY 2026-27 की पहली तिमाही में 8.2% सालाना ब्याज
  • SCSS में अधिकतम ₹30 लाख निवेश, FD में कुछ बैंकों में ₹3 करोड़ तक की सीमा
  • SCSS सरकार समर्थित, जबकि बैंक FD पर DICGC के तहत ₹5 लाख तक डिपॉजिट इंश्योरेंस

रिटायरमेंट के बाद ऐसे निवेश विकल्प की जरूरत होती है, जहां जोखिम कम हो और पैसा नियमित रिटर्न देता रहे। सीनियर सिटीजन्स के लिए बैंक Fixed Deposit यानी FD और सरकार समर्थित Senior Citizen Savings Scheme यानी SCSS दो लोकप्रिय विकल्प हैं। हालांकि दोनों में ब्याज दर, निवेश की सीमा, अवधि, पैसे निकालने और टैक्स से जुड़े नियम अलग-अलग हैं।

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पिछले एक साल में Reserve Bank of India की ओर से रेपो रेट घटाए जाने के बाद बैंक FD की ब्याज दरों में गिरावट आई है। ऐसे में रिटायरमेंट सेविंग्स के एक हिस्से के लिए SCSS ज्यादा आकर्षक विकल्प हो सकता है।

ब्याज के मामले में SCSS आगे

FY 2026-27 की पहली तिमाही के लिए SCSS पर सालाना 8.2% ब्याज मिल रहा है। इसका ब्याज हर तिमाही दिया जाता है। अप्रैल 2023 से इसकी ब्याज दर 8.2% पर बनी हुई है।

दूसरी ओर सीनियर सिटीजन FD की ब्याज दर बैंक और अवधि के हिसाब से बदलती है। Jana Small Finance Bank और Slice Small Finance Bank तीन साल की FD पर 7.5% ब्याज दे रहे हैं। AU Small Finance Bank में यह दर 7.60% तक और Utkarsh Small Finance Bank में चुनिंदा स्लैब पर 7.75% तक है।

इस लिहाज से SCSS कई बैंक FD के मुकाबले ज्यादा ब्याज दे सकती है। हालांकि निवेश से पहले संबंधित बैंक और FD की अवधि के हिसाब से दर की तुलना जरूरी है।

कितना पैसा कर सकते हैं निवेश?

SCSS में न्यूनतम ₹1,000 और अधिकतम ₹30 लाख जमा किए जा सकते हैं। इसकी अवधि पांच साल है, जिसे तीन साल और बढ़ाया जा सकता है।

FD में निवेश की रकम और अवधि को लेकर ज्यादा विकल्प मिलते हैं। कुछ Small Finance Banks में सीनियर सिटीजन्स ₹3 करोड़ तक निवेश कर सकते हैं। इसलिए बड़ी रकम निवेश करने वालों के लिए FD ज्यादा विकल्प देती है।

सुरक्षा में क्या है अंतर?

SCSS सरकार समर्थित स्कीम है और इसे बेहद कम जोखिम वाला विकल्प माना जाता है। वहीं बैंक FD में DICGC के तहत प्रति जमाकर्ता प्रति बैंक ₹5 लाख तक का डिपॉजिट इंश्योरेंस मिलता है। इसमें Small Finance Banks के डिपॉजिट भी शामिल हैं।

FD में अवधि और ब्याज भुगतान को लेकर भी ज्यादा विकल्प हैं। निवेशक बैंक और FD के आधार पर मासिक, तिमाही या मैच्योरिटी पर ब्याज लेने का विकल्प चुन सकते हैं।

टैक्स के नियम भी समझें

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पुराने टैक्स रिजीम में SCSS में निवेश पर Section 80C के तहत ₹1.5 लाख तक की कटौती मिल सकती है। नए टैक्स रिजीम में यह फायदा उपलब्ध नहीं है। SCSS से मिलने वाला ब्याज निवेशक के लागू टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्सेबल है।

FD का ब्याज भी लागू स्लैब रेट के मुताबिक टैक्सेबल होता है। वहीं पात्र Tax-Saving FD में Section 80C का फायदा मिल सकता है।

FD या SCSS किसे चुनें?

सरकार समर्थित निवेश और अपेक्षाकृत ज्यादा तय रिटर्न चाहने वाले रिटायर्ड लोगों के लिए SCSS का पलड़ा भारी हो सकता है। वहीं ज्यादा रकम निवेश करने, अलग-अलग अवधि चुनने और लिक्विडिटी के ज्यादा विकल्प चाहने वालों के लिए FD उपयोगी हो सकती है।

कई सीनियर सिटीजन्स के लिए नियमित रिटायरमेंट इनकम के लिए SCSS और अतिरिक्त लचीलापन तथा डायवर्सिफिकेशन के लिए अलग-अलग बैंकों की FD का कॉम्बिनेशन एक संतुलित विकल्प हो सकता है।

Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। BT Bazaar अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है।