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अभी FD कराएं या दिसंबर तक इंतजार करें? ज्यादा ब्याज पाने के लिए एक्सपर्ट ने बताई रणनीति

RBI की ओर से ब्याज दरें बढ़ाए जाने के बाद FD निवेशकों के सामने बड़ा सवाल है कि अभी पैसा लगाएं या दिसंबर तक इंतजार करें? क्या आने वाले महीनों में ज्यादा ब्याज मिल सकता है? एक्सपर्ट पंकज मथपाल ने बताया कि फिलहाल कौन सी रणनीति बेहतर हो सकती है।

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In Short

  • ब्याज दरें और बढ़ने की उम्मीद, लंबी अवधि की FD कराने में जल्दबाजी न करें।
  • एक्सपर्ट ने फिलहाल 3 से 6 महीने की छोटी अवधि की FD कराने की सलाह दी।
  • सिर्फ ज्यादा ब्याज के चक्कर में न पड़ें, निवेश में एसेट एलोकेशन का ध्यान रखें।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक बार फिर ब्याज दरें बढ़ाने का सिलसिला शुरू कर दिया है। ऐसे में फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में निवेश करने वाले लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि क्या अभी लंबी अवधि की FD करानी चाहिए या फिर ब्याज दरें और बढ़ने का इंतजार करना बेहतर होगा।

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बिजनेस टुडे के शो में सीनियर एंकर साक्षी बत्रा के सवालों का जवाब देते हुए ऑप्टिमा मनी मैनेजर्स (Optima Money Managers) के फाउंडर और मैनेजिंग डायरेक्टर पंकज मथपाल ने कहा कि निवेशकों को फिलहाल लंबी अवधि की FD कराने में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। अगर आने वाले महीनों में ब्याज दरें और बढ़ती हैं, तो अभी पैसा लॉक करने वाले निवेशक ज्यादा रिटर्न पाने का मौका गंवा सकते हैं।

लंबी अवधि की FD कराने का सही समय कब?

पंकज मथपाल के मुताबिक, लंबी अवधि की FD कराने का सबसे अच्छा समय वह होता है, जब ब्याज दरें अपने ऊपरी स्तर पर पहुंच चुकी हों और आगे इनमें गिरावट की संभावना दिखाई दे रही हो।

उन्होंने कहा कि जब आपको लगे कि अब ब्याज दरें नीचे आना शुरू हो सकती हैं, तब मौजूदा ऊंची दरों पर पैसा लॉक करना बेहतर फैसला हो सकता है।

फिलहाल ब्याज दरों में बढ़ोतरी का सिलसिला जारी है। अगर दिसंबर या उसके बाद RBI फिर से दरें बढ़ाता है, तो बैंकों की FD पर मिलने वाला ब्याज भी बढ़ सकता है। ऐसे में पहले से लंबी अवधि की FD करा चुके निवेशकों को नई दरों का फायदा नहीं मिलेगा।

अभी 3 से 6 महीने की FD क्यों बेहतर?

पंकज मथपाल ने निवेशकों को फिलहाल छोटी अवधि की FD कराने की सलाह दी है। उनके मुताबिक, इस समय तीन महीने या छह महीने की FD कराना ज्यादा समझदारी भरा कदम हो सकता है।

इसका फायदा यह होगा कि निवेशकों का पैसा लंबे समय तक एक ही ब्याज दर पर लॉक नहीं रहेगा। अगर आने वाले महीनों में बैंक FD की ब्याज दरें बढ़ाते हैं, तो निवेशक अपनी छोटी अवधि की FD मैच्योर होने के बाद नई दरों पर दोबारा निवेश कर सकेंगे।

सिर्फ ज्यादा ब्याज देखकर निवेश का फैसला न करें

पंकज मथपाल ने यह भी साफ किया कि FD पर ज्यादा ब्याज मिलना निवेश का पूरा आधार नहीं होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि निवेशकों को ब्याज दरें बढ़ने के कारण एसेट एलोकेशन के सिद्धांत को नहीं भूलना चाहिए। इसका मतलब है कि अपनी पूरी बचत केवल FD में लगाने के बजाय अलग-अलग एसेट क्लास में संतुलन बनाए रखना जरूरी है।

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ब्याज दरों में बदलाव का असर इक्विटी, डेट और दूसरे निवेश विकल्पों पर अलग-अलग तरीके से पड़ता है। इसलिए निवेश का फैसला अपनी पूरी फाइनेंशियल प्लानिंग को ध्यान में रखकर करना चाहिए।

FD निवेशकों के लिए क्या है एक्सपर्ट की सलाह?

पंकज मथपाल की सलाह का सीधा मतलब है कि फिलहाल निवेशकों को धैर्य रखना चाहिए। पूरी रकम एक साथ लंबी अवधि की FD में लगाने के बजाय छोटी अवधि के विकल्प चुनना बेहतर हो सकता है।

जब ब्याज दरों में बढ़ोतरी का सिलसिला थमने और दरों के नीचे आने के संकेत मिलने लगें, तब लंबी अवधि के लिए पैसा लॉक करने पर विचार किया जा सकता है।

Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। BT Bazaar अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है।