पश्चिम बंगाल से गुजरात तक बनेगा 2,052 KM लंबा फ्रेट कॉरिडोर! इन राज्यों और उद्योगों को होगा फायदा
भारतीय रेलवे पश्चिम बंगाल से गुजरात तक 2,052 किलोमीटर लंबा नया फ्रेट कॉरिडोर बनाने की योजना पर काम कर रहा है। इस मेगा प्रोजेक्ट से देश के औद्योगिक शहरों और बंदरगाहों को बेहतर कनेक्टिविटी मिल सकती है। जानिए प्रस्तावित रूट, प्रोजेक्ट की खासियत और रेलवे की तैयारियों से जुड़ी अहम जानकारी।

औद्योगिक शहरों को कैसे मिलेगा फायदा?
कॉरिडोर का रूट तय करते समय कच्चे माल के स्रोतों, मैन्युफैक्चरिंग सेंटर और बड़े बाजारों को ध्यान में रखा जा रहा है। इसका मकसद उद्योगों के बीच माल परिवहन को बेहतर बनाना है। अंतिम अलाइनमेंट तय होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि किन औद्योगिक क्षेत्रों को सीधा फायदा मिलेगा।

बंदरगाहों तक माल पहुंचाना होगा आसान?
प्रस्तावित कॉरिडोर का एक बड़ा उद्देश्य प्रमुख औद्योगिक केंद्रों और बंदरगाहों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी विकसित करना है। इससे भविष्य में माल ढुलाई की दक्षता बढ़ सकती है। हालांकि, परिवहन लागत कितनी घटेगी या कारोबारियों को कितनी बचत होगी, इसका अभी कोई निश्चित आंकड़ा सामने नहीं आया है।

कब तक तैयार होगा नया फ्रेट कॉरिडोर?
फिलहाल कॉरिडोर के अंतिम रूट, जरूरी मंजूरियों, जमीन और निर्माण से जुड़े फैसलों का इंतजार है। इसके बाद टेंडर और निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी। रेलवे ने अभी इसके चालू होने की कोई निश्चित तारीख नहीं बताई है। इसलिए इसे फिलहाल प्रस्तावित परियोजना ही माना जाना चाहिए।




