scorecardresearch

Credit Card की लिमिट पार की तो लगेगा चार्ज, जानें Over Limit Facility कैसे करती है काम

Credit Card की तय लिमिट से ज्यादा खर्च करने की सुविधा मुश्किल समय में काम आ सकती है, लेकिन इसके साथ लगने वाली फीस जेब पर भारी पड़ सकती है। साथ ही, बार-बार ओवर लिमिट खर्च करने से क्रेडिट स्कोर भी प्रभावित हो सकता है। जानिए यह सुविधा कैसे काम करती है और इस्तेमाल से पहले किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

Advertisement

In Short

  • क्रेडिट लिमिट से ज्यादा खर्च करने पर बैंक ओवर लिमिट फीस लगा सकता है।
  • इस फीस पर 18% GST भी देना पड़ सकता है।
  • बार-बार लिमिट पार करने से क्रेडिट यूटिलाइजेशन बढ़ता है, जिससे क्रेडिट स्कोर प्रभावित हो सकता है।

Credit Card :  आजकल Credit Card का इस्तेमाल शॉपिंग, बिल भरने और अचानक आए खर्चों के लिए काफी बढ़ गया है। लेकिन कार्ड चलाते समय सिर्फ ऑफर और रिवॉर्ड देखना ही काफी नहीं है, उसकी लिमिट और बैंक के नियम भी समझना जरूरी है। कई बार जरूरत के समय कार्ड की तय सीमा कम पड़ जाती है। आखिर Credit Card Over Limit Facility क्या होती है और बैंक इस पर कितना चार्ज लगाते हैं?

advertisement

क्या है Credit Card Over Limit Facility?

हर Credit Card के साथ बैंक खर्च करने की एक तय लिमिट देता है। मान लीजिए आपके कार्ड की लिमिट 1 लाख रुपये है और आपका खर्च इससे ऊपर चला जाता है, तो इसे ओवर लिमिट इस्तेमाल कहा जाता है।

आमतौर पर लिमिट पूरी होने के बाद कार्ड से पेमेंट रुक सकता है। लेकिन कुछ बैंक ग्राहकों को तय लिमिट से ज्यादा खर्च करने की मंजूरी दे देते हैं और इसके बदले ओवर लिमिट फीस लेते हैं। बैंक चाहे तो ऐसे पेमेंट को मंजूर कर सकता है या रोक सकता है। अब सवाल है कि Credit Card की यह ओवर लिमिट सुविधा काम कैसे करती है?

ये खबर पढ़ना ना भूलें: सिर्फ 1 दिन लेट हो गई EMI...जानिए कितना कम होगा आपका सिबिल/क्रेडिट स्कोर

कैसे काम करती है यह सुविधा?

Credit Card के जरिए बैंक ग्राहक को बिना कोई सामान या संपत्ति गिरवी रखे खर्च करने के लिए पैसा देता है। जब बैंक लिमिट से ज्यादा खर्च करने की मंजूरी देता है, तो इसके बदले ओवर लिमिट फीस लेता है। इससे बैंक अपने नुकसान के खतरे को कम करता है।

यह फीस ग्राहकों को जरूरत से ज्यादा खर्च करने से भी रोकती है। वहीं, इलाज या किसी अचानक आए जरूरी खर्च में ओवर लिमिट सुविधा काम आ सकती है। लेकिन इसका बार-बार इस्तेमाल करने से आपका बिल और खर्च दोनों बढ़ सकते हैं। ऐसे में बैंक आपके Credit Card की लिमिट किन बातों को देखकर तय करता है?

किन बातों से तय होती है क्रेडिट लिमिट?

बैंक Credit Card की लिमिट तय करते समय आपकी कमाई, क्रेडिट स्कोर, पुराने लोन, बिल चुकाने की आदत और कार्ड के प्रकार को देखता है। जो ग्राहक समय पर बिल भरते हैं और जिनका रिकॉर्ड अच्छा रहता है, उन्हें ज्यादा लिमिट मिलने का मौका बढ़ जाता है।

बैंक यह भी देखता है कि आप अपनी कुल लिमिट में से कितना खर्च करते हैं। इसे क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेशियो कहा जाता है। अगर आप लिमिट का छोटा हिस्सा इस्तेमाल करते हैं, तो इसे सही तरीके से कार्ड चलाने का संकेत माना जाता है। लेकिन बार-बार लिमिट पार करने से आपके क्रेडिट स्कोर पर क्या असर पड़ सकता है?

advertisement

क्रेडिट स्कोर पर पड़ सकता है असर

ओवर लिमिट फीस की जानकारी सीधे क्रेडिट ब्यूरो को नहीं भेजी जाती, इसलिए सिर्फ यह फीस लगने से क्रेडिट स्कोर पर सीधा असर नहीं पड़ता। लेकिन लिमिट से ज्यादा खर्च करने पर आपका क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेशियो बढ़ जाता है।

आमतौर पर इस रेशियो को 30 प्रतिशत के आसपास रखना बेहतर माना जाता है। अगर आप बार-बार पूरी लिमिट खर्च करते हैं या उससे ऊपर चले जाते हैं, तो धीरे-धीरे आपका क्रेडिट स्कोर खराब हो सकता है। अब सवाल है कि लिमिट पार करने पर बैंक आपसे कितना ओवर लिमिट चार्ज ले सकता है?

कितना लग सकता है ओवर लिमिट चार्ज?

बैंक लिमिट से ज्यादा खर्च की गई रकम पर परसेंटेज के हिसाब से फीस ले सकता है।मान लीजिए बैंक ओवर लिमिट रकम पर 2% चार्ज करता है और कम से कम फीस 500 रुपये तय है। ऐसे में चार्ज 500 रुपये से कम नहीं होगा। इसके ऊपर 18% GST भी देना पड़ेगा।

इस सुविधा का इस्तेमाल सिर्फ बहुत जरूरी समय पर करना चाहिए। Credit Card लेने या इस्तेमाल करने से पहले उसके चार्ज और नियम जरूर पढ़ें। कोशिश करें कि आपका खर्च हमेशा तय लिमिट के अंदर ही रहे।

advertisement

Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। BT Bazaar अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है।