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बॉन्ड में निवेश की शुरुआत कैसे करें? आसान भाषा में एक्सपर्ट से समझें रिटर्न, ब्याज और क्रेडिट रेटिंग क्या है

FD के अलावा निवेश का विकल्प तलाश रहे लोगों के लिए बॉन्ड काम आ सकते हैं, लेकिन ज्यादा रिटर्न के साथ जोखिम भी बढ़ता है। IndiaBonds के को-फाउंडर विशाल गोयनका ने बताया कि पहली बार बॉन्ड खरीदने से पहले किन बातों को समझना चाहिए और कैसे सही बॉन्ड चुना जा सकता है।

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In Short

  • Indiabonds के को-फाउंडर विशाल गोयनका के मुताबिक, बॉन्ड में ज्यादा यील्ड के साथ जोखिम भी बढ़ता है।
  • पहली बार निवेश करने वालों को लिस्टेड बॉन्ड और क्रेडिट रेटिंग पर ध्यान देना चाहिए।
  • सिर्फ रेटिंग नहीं, निवेश से पहले रेटिंग रिपोर्ट और इंफॉर्मेशन मेमोरेंडम भी पढ़ना जरूरी है।

फिक्स्ड डिपॉजिट यानी FD के अलावा निवेश का दूसरा विकल्प तलाश रहे निवेशकों के लिए बॉन्ड एक विकल्प हो सकता है। लेकिन बॉन्ड में सिर्फ ज्यादा रिटर्न देखकर पैसा लगाना सही तरीका नहीं है। इसमें निवेश करने से पहले यह समझना जरूरी है कि आपका पैसा कौन उधार ले रहा है और उससे जुड़ा जोखिम कितना है।

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बिजनेस टुडे के एक शो में सीनियर एंकर साक्षी बत्रा के सवालों का जवाब देते हुए Indiabonds के को-फाउंडर विशाल गोयनका ने कहा कि बॉन्ड पोर्टफोलियो को डायवर्सिफाई करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं, लेकिन निवेशकों को ज्यादा रिटर्न के पीछे भागने के बजाय रिस्क और रिटर्न के बीच के अंतर को समझना चाहिए।

बॉन्ड आखिर होता क्या है?

विशाल गोयनका ने बॉन्ड को आसान तरीके से समझाते हुए कहा कि बॉन्ड एक तरह का लोन है, जो आप किसी कंपनी या सरकार को देते हैं। बॉन्ड के डॉक्यूमेंट में कूपन, ब्याज दर और पैसा वापस मिलने की समयसीमा जैसी जानकारियां दी जाती हैं।

उनके मुताबिक, बॉन्ड चुनते समय सबसे पहले यह देखना चाहिए कि पैसा कौन ले रहा है। उन्होंने बताया कि इस संदर्भ में भारत सरकार के बॉन्ड को प्रभावी रूप से रिस्क-फ्री माना जाता है और लंबी अवधि में इन पर करीब 7% यील्ड मिल रही है। इसी आधार पर कॉरपोरेट बॉन्ड के रिटर्न और जोखिम को समझा जा सकता है।

ज्यादा रिटर्न तो ज्यादा रिस्क

विशाल गोयनका के मुताबिक, बॉन्ड की क्रेडिट रेटिंग और उससे मिलने वाले रिटर्न के बीच सीधा संबंध है। AAA रेटिंग वाला बॉन्ड करीब 7.5% रिटर्न दे सकता है। AA रेटिंग वाले बॉन्ड में यह करीब 8% से 8.5% हो सकता है।

प्रतीकात्मक तस्वीर

वहीं, सिंगल-A बॉन्ड में रिटर्न 10% तक और BBB+ बॉन्ड में 12% तक हो सकता है। हालांकि, ज्यादा रिटर्न के साथ जोखिम भी बढ़ता है। उन्होंने साफ किया कि बॉन्ड पूरी तरह रिस्क-फ्री नहीं हैं और इनमें रिटर्न की गारंटी भी नहीं होती।

पहली बार बॉन्ड खरीद रहे हैं तो क्या देखें?

नए निवेशकों के लिए विशाल गोयनका ने तीन बातों पर ध्यान देने को कहा। निवेश के लिए रेगुलेटेड या सेमी-रेगुलेटेड प्लेटफॉर्म चुनें, केवल लिस्टेड बॉन्ड खरीदें और क्रेडिट रेटिंग को शुरुआती जांच के तौर पर जरूर देखें।

उन्होंने अनलिस्टेड बॉन्ड को लेकर भी सावधानी बरतने की बात कही, क्योंकि समस्या होने पर निवेशकों के पास समाधान के विकल्प काफी कम हो सकते हैं।

सिर्फ रेटिंग देखकर न लगाएं पैसा

विशाल गोयनका ने निवेशकों को क्रेडिट रेटिंग के अलावा रेटिंग रिपोर्ट और इंफॉर्मेशन मेमोरेंडम भी पढ़ने की सलाह दी। साथ ही, अलग-अलग इश्यूअर और रिस्क कैटेगरी में निवेश को बांटने पर जोर दिया।

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उनके मुताबिक, बॉन्ड को इक्विटी के विकल्प के तौर पर देखने के बजाय पोर्टफोलियो में एक फिक्स्ड-इनकम विकल्प के रूप में समझना चाहिए। ज्यादा यील्ड पाने की कोशिश में निवेशकों को उससे जुड़े अतिरिक्त जोखिम को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। BT Bazaar अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है।