
Banking Sector पर मां लक्ष्मी की मेहरबानी, मीडिल क्लास खाली
मिडिल क्लास के लोन वाली जिंदगी की बदौलत ही बैंकों की चाँदी हो रही है। वित्त वर्ष 2022-23 की चौथी तिमाही में आए बैंकों के आंकड़े इस बात की तस्दीक भी करते हैं। जिन्हे देखकर अनुमान लगा सकते हैं कि बैंको की तिजोरियां भर गईं हैं।

Banking Sector पर इन दिनों मां लक्ष्मी की मेहरबानी है लेकिन दूसरी तरफ मीडिल क्लास की जेब खाली है। बैंकिंग सेक्टर ने दूसरे सेक्टरों की तुलना में अच्छा प्रदर्शन किया है, एक के बाद एक बैंकों के शानदार रिजल्ट आ रहे हैं। घरेलू इकोनॉमी में कर्ज की मांग खूब बढ़ रही है। बैंकों के तिमाही नतीजे शानदार हैं और कई बैकिंग शेयर अपने 52 हफ्तों की ऊंचाई पर चले गए हैं।
लेकिन दूसरी तरफ मीडिल क्लास खड़ा है। क्योंकि मिडिल क्लास के लोन वाली जिंदगी की बदौलत ही बैंकों की चाँदी हो रही है। वित्त वर्ष 2022-23 की चौथी तिमाही में आए बैंकों के आंकड़े इस बात की तस्दीक भी करते हैं। जिन्हे देखकर अनुमान लगा सकते हैं कि बैंको की तिजोरियां भर गईं हैं।

HDFC, ICICI, Punjab & Sind Bank, INDUS BANK, BANK OF MAHARASHTRA और AU SMALL FINANCE बैंकों ने वित्त वर्ष 2022-23 की चौथी तिमाही में अच्छा-खासा नेट प्रॉफिट दर्ज किया है। HDFC बैंक का नेट प्रॉफिट 12047 करोड़ रुपए और वार्षिक आधार पर 19.8 फीसदी का उछाल दर्ज किया गया। इसी तरह यस बैंक और आईसीआईसीआई बैंक ने भी प्रॉफिट दर्ज किया है।
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AU SMALL FINANCE बैंक का तिमाही लाभ 23% तक बढ़ा है और बैंक का शुद्ध लाभ 26% YoY बढ़कर 1,428 करोड़ रुपये हो गया है। इंडस बैंक का लाभ भी 50 फीसदी बढ़ा है।

यूको बैंक के मुनाफे में 86.2% फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। बैंक का चौथी तिमाही में मुनाफा 312.18 करोड़ रुपये से बढ़कर 581.24 करोड़ रुपये रहा। वहीं सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक ऑफ महाराष्ट्र ने भी चौथी तिमाही में नेट प्रॉफिट दोगुना किया है। सार्वजनिक क्षेत्र के एक और बैंक पंजाब एंड सिंध का चौथी तिमाही में शुद्ध लाभ 32 प्रतिशत से बढ़कर 457 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है।

Kotak Mahindra Asset Management Co. Ltd के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ नीलेश शाह के मुताबिक बैंकों की इनकम के कई सोर्स होते हैं। वो कॉर्पोरेट और रिटेल ग्राहकों से पैसे कमाते हैं। वो बैंकिंग और गैर-बैंकिंग, फंड और गैर-फंड सर्विस से पैसे कमाते हैं। बैंक के मुनाफे में रिटेल लैंडर के योगदान को अनुमान लगाना मुश्किल होगा। एक तरफ बैंक अपने बही-खाते में शुद्ध लाभ दर्ज कर रहे हैं वहीं दूसरी तरफ मिडिल क्लास की कमर टूट पड़ी है। मिडिल क्लास घरों, कारों और पर्सनल लोन की मोटी-मोटी EMI के बोझ तले चुपचाप दबाव महसूस कर रहा है।
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कमाने वाले बैंकों ने अपनी ब्याज़ दर में थोड़ी-सी कमी की होती तो यकीनन मिडिल क्लास राहत महसूस करता। लेकिन पिछले एक वर्ष में रेपो रेट के आधार पर सभी बैंकों ने इंटरेस्ट रेट में निरंतर इज़ाफा कर आम आदमी की सांस फूला दी थी। मोटा इंटरेस्ट वसूल कर बैंकों ने खूब प्रॉफिट बटोर लिया है। इस कारण बैंकों की बैलेंसशीट तो अच्छी रही लेकिन Middle Class का गणित यानि हिसाब-किताब बिगड़ा है।

हालांकि भारतीय बैंकों के गुल्लक का यूं भरते रहना अच्छी खबर है। क्योंकि अमेरिका में तो बैंकों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। Kotak Mahindra Asset Management Co. Ltd के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ नीलेश शाह का मानना है कि US में ब्याज दरें 12 महीनों से कम समय में 450 बेसिस प्वाइंट से ऊपर बढ़ी हैं। अमेरिका में ज्यादातर हाउसिंग लोन फिक्स्ड जबकि भारत में फ्लोटिंग रेट पर होते हैं। लगातार बढ़ती ब्याज दरों के चलते बैंकों की फिक्स्ड इन्कम सिक्योरिटीज को नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। लंबी अवधि वाली सिक्योरिटीज की कीमतों में 25-30% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है। बैंक लेवरेज वाला बिजनेस होता है। 10 गुना लेवरेज पर, पोर्टफोलियो वैल्यू में 10% की गिरावट पूरे नेट वर्थ को साफ कर सकती है। उन अमेरिकी बैंकों को जो बढ़ते ब्याज दर वाले माहौल में सही मैनेजमेंट नहीं कर पाए, उन्हें इसका खामियाज़ा भुगतना पड़ रहा है। भारत में ब्याज दरों में 250 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी हुई है और भारतीय बैंकों के पास बेहतर रिस्क मैनेजमेंट व्यवस्थाएं हैं।

गौरतलब है कि कैलिफोर्निया का सिलिकॉन वैली बैंक 10 मार्च को दिवालिया हो गया था। सिलिकॉन वैली बैंक और सिग्नेचर बैंक के डूबने के बाद अमेरिका का बैंकिंग सेक्टर दबाव में है। अमेरिकी बैंकिंग सेक्टर के इतिहास में लीमन ब्रदर्स संकट के बाद दूसरी सबसे बड़ी बैंक नाकामी मानी जा रही है। अमेरिका के कई दूसरे बैंकों पर भी आर्थिक संकट के काले बादल छाए हुए हैं। ऐसे में भारतीय बैंकों की स्थिति अमेरिकन बैंकों के मुकाबले बहुत बेहतर है। लेकिन मीडिल क्लास को अभी कोई राहत मिलती दिखाई नहीं दे रही है क्योंकि आपकी EMI बढ़ी हुई है।

