SIP ने बदली महिलाओं की निवेश की आदत, 5 साल में तीन गुना बढ़ा म्यूचुअल फंड निवेश
महिलाएं अब सिर्फ बचत नहीं, बल्कि निवेश के जरिए अपने फाइनेंशियल फैसले खुद ले रही हैं। म्यूचुअल फंड और SIP में उनकी बढ़ती हिस्सेदारी ने मार्केट की तस्वीर बदल दी है। आखिर इस इन्वेस्टमेंट बूम के पीछे कौन-से कारण हैं और छोटे शहरों तक यह ट्रेंड कैसे पहुंचा?

In Short
- दिसंबर 2025 तक महिलाओं का म्यूचुअल फंड निवेश बढ़कर करीब ₹18 लाख करोड़ पहुंच गया, जो दिसंबर 2020 में ₹5.4 लाख करोड़ था।
- साल 2020 से 2025 के बीच महिलाओं के SIP अकाउंट तीन गुना बढ़कर 29.3 मिलियन हो गए।
- स्मार्टफोन, डिजिटल इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म और बढ़ती फाइनेंशियल अवेयरनेस ने छोटे शहरों की महिलाओं के लिए भी निवेश आसान बनाया।
Women Mutual Fund Investment: भारत में महिलाएं अब अपनी बचत को सिर्फ गोल्ड या प्रॉपर्टी में नहीं लगा रही हैं। म्यूचुअल फंड और शेयर मार्केट में भी उनकी हिस्सेदारी तेजी से बढ़ रही है।
बढ़ती कमाई, डिजिटल प्लेटफॉर्म, स्मार्टफोन और फाइनेंशियल जानकारी ने निवेश को आसान बनाया है। आइए जानते हैं कि महिलाओं का निवेश कितना बढ़ा और इसके पीछे कौन-से बड़े कारण हैं।
पांच साल में तीन गुना से ज्यादा बढ़ा निवेश
ब्लूमबर्ग न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, दिसंबर 2025 तक महिला म्यूचुअल फंड निवेशकों का एसेट अंडर मैनेजमेंट यानी AUM करीब ₹18 लाख करोड़ पहुंच गया।
दिसंबर 2020 में यह करीब ₹5.4 लाख करोड़ था। यानी पांच साल में निवेश तीन गुना से ज्यादा बढ़ा है। ये आंकड़े AMFI और क्रिसिल इंटेलिजेंस के डेटा पर आधारित हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के स्टॉक मार्केट निवेशकों में अब हर चार में से करीब एक निवेशक महिला है। यह बदलाव मेट्रो शहरों के साथ छोटे शहरों और सेमी-अर्बन इलाकों में भी दिखाई दे रहा है।
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SIP बना निवेश का पसंदीदा रास्ता
महिलाओं के निवेश बढ़ने में सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान यानी SIP की बड़ी भूमिका है। साल 2020 से 2025 के बीच महिलाओं के SIP अकाउंट की संख्या तीन गुना बढ़कर 29.3 मिलियन हो गई।
SIP में कम रकम से शुरुआत की जा सकती है और हर महीने तय रकम निवेश होती है। इसी वजह से महिलाएं रिटायरमेंट प्लानिंग, बच्चों की एजुकेशन और लंबे समय में वेल्थ बनाने के लिए इसे चुन रही हैं। सस्ते स्मार्टफोन, कम कीमत वाले डेटा और इन्वेस्टमेंट ऐप ने भी निवेश करना आसान बनाया है।
कम्युनिटी ग्रुप से बढ़ रही जानकारी
महिलाओं के इन्वेस्टमेंट ग्रुप भी मार्केट की समझ बढ़ाने में मदद कर रहे हैं। बुलिश वुमन सर्कल की शुरुआत करिश्मा नाहर और सलोनी मुथा ने एक व्हाट्सऐप ग्रुप के रूप में की थी। अब इससे 450 से ज्यादा सदस्य जुड़ चुके हैं।
यहां वैल्यूएशन रेशियो, टेक्निकल एनालिसिस और मार्केट से जुड़े फ्री सेशन होते हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि निवेश महिलाओं को फाइनेंशियल इंडिपेंडेंस देता है, लेकिन लंबे समय के लिए स्थिर नौकरी और ज्यादा इनकम भी जरूरी है।

