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महिलाओं की निवेश यात्रा में रुकावट बनते हैं ये मिथक! जानिए इन मिथ की सच्चाई

घर का बजट संभालने वाली महिलाएं अब अपनी बचत को बढ़ाने के लिए म्यूचुअल फंड का सहारा ले सकती हैं। कम रकम से शुरू होने वाला यह निवेश उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में मदद कर सकता है। जानिए कैसे म्यूचुअल फंड महिलाओं के लिए वेल्थ बनाने का बेहतर विकल्प बन सकता है।

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AI Generated Image

In Short

  • महिलाएं म्यूचुअल फंड के जरिए अपनी आर्थिक आजादी और वेल्थ बना सकती हैं।
  • प्रोफेशनल मैनेजमेंट और SEBI की निगरानी से म्यूचुअल फंड निवेश को मिलता है भरोसा।
  • बच्चों की पढ़ाई से लेकर रिटायरमेंट तक अलग-अलग जरूरतों के लिए मौजूद हैं कई फंड विकल्प।

महिलाएं घर की आर्थिक जिम्मेदारियां संभालने में बड़ी भूमिका निभाती हैं। घर का बजट बनाने से लेकर भविष्य की जरूरतों के लिए बचत करने तक, उनका योगदान बेहद अहम होता है। इसके बावजूद निवेश के मामले में महिलाएं अभी भी पुरुषों से पीछे हैं। म्यूचुअल फंड निवेश महिलाओं को अपनी बचत बढ़ाने और लंबे समय के लिए आर्थिक मजबूती बनाने का मौका दे सकता है। आइए जानते हैं कैसे म्यूचुअल फंड महिलाओं के लिए एक बेहतर निवेश विकल्प बन सकता है।

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म्यूचुअल फंड से मिल सकती है आर्थिक आजादी

दुनियाभर में महिलाओं को कम वेतन, प्रॉपर्टी राइट्स और आर्थिक फैसलों में कम भागीदारी जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। म्यूचुअल फंड निवेश भी इसी असमानता का एक हिस्सा है। कई महिलाएं घर की पूरी आर्थिक व्यवस्था संभालती हैं, लेकिन अपने नाम से निवेश करने में पीछे रह जाती हैं। बचत, बच्चों की पढ़ाई, भविष्य की जरूरतों और रिटायरमेंट की प्लानिंग के लिए म्यूचुअल फंड एक अच्छा विकल्प हो सकता है।

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निवेश के लिए कई विकल्प मौजूद

म्यूचुअल फंड में महिलाओं के लिए अलग-अलग जरूरतों के हिसाब से कई विकल्प मौजूद हैं। एक सर्वे के अनुसार, महिलाएं म्यूचुअल फंड में इक्विटी एसेट क्लास को पसंद करती हैं। लंबे समय में वेल्थ बनाने के लिए इक्विटी म्यूचुअल फंड उपयोगी हो सकते हैं। इसके अलावा बॉन्ड, गोल्ड और सिल्वर जैसे विकल्प भी मौजूद हैं। निवेशक अपनी जरूरत और रिस्क के हिसाब से सही विकल्प चुन सकती हैं।

प्रोफेशनल मैनेजमेंट का फायदा

सीधे स्टॉक या बॉन्ड में निवेश करना हर किसी के लिए आसान नहीं होता, क्योंकि इसके लिए मार्केट की अच्छी जानकारी जरूरी होती है। म्यूचुअल फंड में एसेट मैनेजमेंट कंपनियों के प्रोफेशनल मैनेजर निवेश संभालते हैं। इनके पास मार्केट की गहरी जानकारी और अनुभव होता है, जिससे कम जानकारी रखने वाले निवेशकों को भी बेहतर तरीके से निवेश करने में मदद मिलती है।

SEBI की निगरानी से बढ़ता भरोसा

भारत में म्यूचुअल फंड और कैपिटल मार्केट को सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया यानी SEBI रेगुलेट करता है। निवेशकों के हितों की सुरक्षा SEBI की बड़ी जिम्मेदारियों में शामिल है। SEBI समय-समय पर निवेशकों को जागरूक करने के लिए एजुकेशन प्रोग्राम भी चलाता है। इसी निगरानी के कारण पिछले दो दशकों में भारतीय कैपिटल मार्केट और म्यूचुअल फंड सेक्टर में बड़ा विकास हुआ है।

महिलाओं के लिए नया दौर शुरू करने का मौका

भारत में आर्थिक विकास के साथ लोगों की संपत्ति भी बढ़ी है। पिछले एक दशक में म्यूचुअल फंड निवेश पांच गुना बढ़कर जनवरी 2023 तक 39 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। लेकिन सवाल यह है कि क्या इस ग्रोथ का फायदा महिलाओं को भी बराबर मिला है। घर में पैसे बचाने के लिए इस्तेमाल होने वाली पारंपरिक बरनी की जगह अब महिलाएं म्यूचुअल फंड जैसे विकल्पों के जरिए अपनी संपत्ति बढ़ाने पर ध्यान दे सकती हैं।

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अलग-अलग जरूरतों के लिए अलग फंड

छोटी अवधि की बचत के लिए लिक्विड फंड और अल्ट्रा शॉर्ट टर्म फंड जैसे विकल्प मौजूद हैं, जिनमें रिस्क और रिटर्न दोनों कम होते हैं। लंबे समय में संपत्ति बनाने के लिए इक्विटी आधारित फंड उपयोगी हो सकते हैं। बच्चों की पढ़ाई के लिए भी इक्विटी आधारित फंड चुने जा सकते हैं, जबकि रिटायरमेंट के लिए इक्विटी और डेट का संतुलित मिश्रण बेहतर विकल्प हो सकता है।

म्यूचुअल फंड महिलाओं के लिए सिर्फ निवेश का जरिया नहीं, बल्कि अपनी आर्थिक पहचान मजबूत करने का एक मौका भी है। कम रकम से शुरुआत करके महिलाएं धीरे-धीरे अपनी वेल्थ बना सकती हैं और अपने साथ-साथ परिवार के भविष्य को भी सुरक्षित कर सकती हैं।

Disclaimer: म्यूचुअल फंड्स निवेश बाज़ार जोखिमों के अधीन है। ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। BT Bazaar अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है।