scorecardresearch

ELSS vs PPF: टैक्स बचाने के लिए कौन सा विकल्प बेहतर? निवेश से पहले समझें फर्क

टैक्स बचाने के लिए निवेश करने वालों के बीच ELSS और PPF दोनों लोकप्रिय विकल्प हैं। एक में बाजार से ज्यादा रिटर्न की संभावना है, तो दूसरे में सुरक्षा और तय ब्याज का फायदा मिलता है। निवेश से पहले दोनों के जोखिम, लॉक-इन अवधि और टैक्स नियमों को समझना जरूरी है।

Advertisement
AI generated image

In Short

  • ELSS में पैसा शेयर बाजार से जुड़ा होता है, इसलिए इसमें ज्यादा रिटर्न की संभावना के साथ जोखिम भी रहता है।
  • PPF सरकार समर्थित योजना है, जिसमें बाजार का जोखिम नहीं होता और लंबी अवधि की सुरक्षित बचत मिलती है।
  • ELSS का लॉक-इन 3 साल और PPF की अवधि 15 साल होती है, इसलिए चुनाव अपनी जरूरत और जोखिम क्षमता के आधार पर करें।

Investment Options India: टैक्स बचाने के साथ अगर आप भविष्य के लिए पैसा भी जोड़ना चाहते हैं, तो ईएलएसएस (ELSS) और पीपीएफ (PPF) दो लोकप्रिय विकल्प हैं। दोनों के जरिए पुरानी टैक्स व्यवस्था में नियमों के तहत धारा 80C का फायदा लिया जा सकता है। हालांकि दोनों में जोखिम, रिटर्न और लॉक-इन का तरीका अलग है। इसलिए निवेश से पहले इनके बीच का अंतर समझना जरूरी है।

advertisement

ELSS में बाजार से जुड़ा रहता है पैसा

ELSS एक इक्विटी म्यूचुअल फंड स्कीम है। इसमें कम से कम 80% पैसा इक्विटी और इक्विटी से जुड़े साधनों में निवेश किया जाता है। इसका रिटर्न शेयर बाजार के प्रदर्शन पर निर्भर करता है, इसलिए किसी तय रिटर्न की गारंटी नहीं होती।

 ELSS में 3 साल का लॉक-इन होता है। अगर एसआईपी के जरिए निवेश किया जाता है, तो हर किस्त का तीन साल का लॉक-इन अलग-अलग गिना जाता है।

PPF में बाजार का जोखिम नहीं

 PPF सरकार समर्थित छोटी बचत योजना है। इसकी ब्याज दर सरकार तय करती है। फिलहाल PPF पर 7.1% सालाना ब्याज मिल रहा है। इसमें एक वित्त वर्ष में न्यूनतम 500 रुपये और अधिकतम 1.5 लाख रुपये जमा किए जा सकते हैं। इसकी मूल अवधि 15 साल है।

दोनों में सबसे बड़ा अंतर क्या है?

ELSS और PPF के बीच सबसे बड़ा अंतर जोखिम, रिटर्न और लॉक-इन का है। ELSS शेयर बाजार से जुड़ा है, इसलिए इसमें ज्यादा रिटर्न मिलने की संभावना हो सकती है, लेकिन नुकसान का जोखिम भी रहता है।

इसके उलट PPF बाजार से जुड़ा नहीं है और इसकी ब्याज दर सरकार तय करती है। ईएलएसएस का लॉक-इन तीन साल है, जबकि PPF की अवधि 15 साल की होती है। इसलिए कम लॉक-इन और इक्विटी में निवेश चाहने वाले ELSS पर विचार कर सकते हैं, जबकि सुरक्षा को प्राथमिकता देने वालों के लिए PPF ज्यादा उपयुक्त हो सकता है।

टैक्स बचत का क्या है नियम?

पुरानी टैक्स व्यवस्था में पात्र निवेशक धारा 80C के तहत कुल 1.5 लाख रुपये तक की कटौती का फायदा ले सकते हैं। इस सीमा में ELSS और PPF के अलावा 80C में आने वाले दूसरे पात्र निवेश और खर्च भी शामिल होते हैं।

नई टैक्स व्यवस्था में सामान्य तौर पर धारा 80C की यह कटौती उपलब्ध नहीं होती।

मैच्योरिटी पर टैक्स में भी फर्क

PPF पर मिलने वाला ब्याज और नियमों के तहत मैच्योरिटी की रकम टैक्स मुक्त होती है। वहीं ELSS में यूनिट बेचने पर इक्विटी म्यूचुअल फंड के कैपिटल गेन टैक्स नियम लागू होते हैं।

advertisement

मौजूदा नियमों के मुताबिक एक वित्त वर्ष में इक्विटी से कुल 1.25 लाख रुपये तक का लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स मुक्त है। इससे ज्यादा के योग्य लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन पर 12.5% टैक्स लगता है।

आखिर किसे चुनें?

अगर आप बाजार का जोखिम उठा सकते हैं और लंबी अवधि में इक्विटी के जरिए पैसा बढ़ाना चाहते हैं, तो ELSS एक विकल्प हो सकता है। वहीं सुरक्षा और बाजार से दूर लंबे समय की बचत चाहते हैं, तो PPF ज्यादा उपयुक्त हो सकता है। निवेश का फैसला अपनी जरूरत, समय और जोखिम उठाने की क्षमता के आधार पर करना बेहतर है।

Disclaimer: म्यूचुअल फंड्स निवेश बाज़ार जोखिमों के अधीन है। ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। BT Bazaar अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है।