ETF क्या है और कैसे करता है काम? जानिए नए निवेशकों के लिए कितना फायदेमंद है ये ऑप्शन
शेयर बाजार में ETF का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है। इसमें निवेशक बिना अलग-अलग शेयर चुने कई कंपनियों में पैसा लगा सकते हैं। बिजनेस टुडे के शो में एक्सपर्ट शरद कोहली ने ETF और BEES का अंतर समझाया। जानिए दोनों में क्या खास है और निवेशकों के लिए कौन सा ऑप्शन उपयोगी हो सकता हैं।

In Short
- ETF में एक साथ कई कंपनियों के शेयरों में निवेश का मौका मिलता है।
- डिफेंस, FMCG और IT जैसे सेक्टर में ETF से निवेश कर सकते हैं।
- BEES के जरिए NIFTY 50 जैसे बड़े इंडेक्स में निवेश संभव है।
शेयर बाजार में निवेश करने वाले लोगों के बीच एक्सचेंज ट्रेडेड फंड यानी ETF तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। खासकर ऐसे निवेशक, जो शेयर बाजार में पैसा तो लगाना चाहते हैं, लेकिन किसी एक कंपनी के शेयर में ज्यादा जोखिम नहीं लेना चाहते, उनके लिए ETF एक विकल्प बनकर उभरा है। इसकी खासियत यह है कि निवेशक एक साथ कई कंपनियों के शेयरों में पैसा लगा सकते हैं और शेयरों की तरह इसकी खरीद-बिक्री भी कर सकते हैं।
बिजनेस टुडे के शो में सीनियर एंकर साक्षी बत्रा के सवालों का जवाब देते हुए KCC ग्रुप के फाउंडर और चेयरमैन शरद कोहली ने ETF और BEES के बीच अंतर समझाया। उन्होंने बताया कि पिछले दो-तीन साल में ETF की लोकप्रियता काफी बढ़ी है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि निवेशकों को अलग-अलग शेयर चुनने की जरूरत नहीं पड़ती।
ETF में निवेश करने का क्या फायदा?
शरद कोहली के मुताबिक, ETF निवेशकों को एक साथ कई कंपनियों के शेयरों में निवेश करने की सुविधा देता है। इसका मतलब है कि निवेशक को हर कंपनी का शेयर अलग से खरीदने की जरूरत नहीं होती।
मान लीजिए कोई निवेशक किसी खास सेक्टर में पैसा लगाना चाहता है, लेकिन उसे यह नहीं पता कि उस सेक्टर की कौन-सी कंपनी बेहतर प्रदर्शन करेगी। ऐसे में वह उस सेक्टर से जुड़े ETF में निवेश कर सकता है।
एक शेयर की जगह पूरे सेक्टर में निवेश
शरद कोहली ने बताया कि ETF के जरिए निवेशक डिफेंस, FMCG या IT जैसे सेक्टर में पैसा लगा सकते हैं।
अगर कोई निवेशक एक ही सेक्टर की 10 कंपनियों के शेयर खरीदता है, तो उसे यह समझना मुश्किल हो सकता है कि कौन-सी कंपनी अच्छा प्रदर्शन करेगी और कौन-सी नहीं।
वहीं, सेक्टर आधारित ETF खरीदने पर उसे एक साथ कई कंपनियों में निवेश का मौका मिलता है। इससे किसी एक कंपनी पर निर्भरता कम होती है और जोखिम अलग-अलग शेयरों में बंट जाता है।
ETF और BEES में क्या अंतर है?
शरद कोहली के मुताबिक, ETF और BEES में एक अहम अंतर है। जहां कई ETF किसी खास सेक्टर पर आधारित होते हैं, वहीं BEES यानी Benchmark Exchange Traded Schemes आमतौर पर किसी इंडेक्स को ट्रैक करते हैं।
उदाहरण के लिए, अगर कोई निवेशक NIFTY 50 BEES खरीदता है, तो उसे निफ्टी 50 इंडेक्स में शामिल कंपनियों में निवेश का मौका मिलता है।
इसमें निवेशक किसी एक सेक्टर पर दांव लगाने के बजाय पूरे इंडेक्स के प्रदर्शन में भागीदारी करता है।
निवेशकों के लिए कौन-सा ऑप्शन बेहतर?
शरद कोहली की बातों के मुताबिक, जो निवेशक किसी खास सेक्टर में निवेश करना चाहते हैं, उनके लिए सेक्टर आधारित ETF उपयोगी हो सकते हैं।
वहीं, जो लोग लंबे समय के लिए किसी बड़े इंडेक्स में निवेश करना चाहते हैं, उनके लिए BEES एक विकल्प हो सकता है।
दोनों का सबसे बड़ा फायदा यह है कि निवेशकों को हर कंपनी का शेयर अलग-अलग चुनने की जरूरत नहीं पड़ती। साथ ही शेयर बाजार में निवेश करते हुए पोर्टफोलियो में विविधता बनाए रखने का मौका भी मिलता है।

