SEBI Mutual Fund Tax Proposal: म्यूचुअल फंड निवेशकों को मिलेगी राहत? अब बिना टैक्स बदले सकेंगे स्कीम!
म्यूचुअल फंड में पैसा लगाने वालों के लिए टैक्स से जुड़ा एक अहम प्रस्ताव चर्चा में है। इसके लागू होने से निवेशकों के लिए एक स्कीम से दूसरी स्कीम में पैसा शिफ्ट करना आसान हो सकता है। टैक्स एक्सपर्ट गौरी चड्ढा ने बताया कि इससे निवेशकों और फंड कंपनियों पर क्या असर पड़ेगा।

In Short
- एक साल बाद म्यूचुअल फंड स्कीम बदलने पर तुरंत कैपिटल गेन टैक्स से राहत मिल सकती है।
- गौरी चड्ढा के मुताबिक, LTCG टैक्स में राहत केवल विदेशी निवेशकों तक सीमित नहीं होनी चाहिए।
- टैक्स-फ्री स्विचिंग से पोर्टफोलियो में बदलाव आसान होगा और फंड कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है।
म्यूचुअल फंड में निवेश करने वालों के लिए एक अहम प्रस्ताव चर्चा में है। इसके तहत अगर किसी निवेशक ने एक साल तक किसी म्यूचुअल फंड स्कीम में पैसा लगाया है, तो उसे दूसरी स्कीम में शिफ्ट करने पर तुरंत कैपिटल गेन टैक्स नहीं देना पड़ेगा। बिजनेस टुडे के शो में सीनियर एंकर साक्षी बत्रा के सवालों का जवाब देते हुए टैक्स एक्सपर्ट गौरी चड्ढा ने कहा कि अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो छोटे निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो में बदलाव करने में काफी आसानी होगी। साथ ही उनका पैसा लंबे समय तक बाजार में बना रह सकता है।
विदेशी निवेशकों को ही टैक्स में राहत देना कितना सही?
गौरी चड्ढा ने लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन यानी LTCG टैक्स को लेकर चल रही चर्चा पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि अगर सरकार केवल विदेशी संस्थागत निवेशकों को LTCG टैक्स से राहत देती है और घरेलू निवेशकों को इसका फायदा नहीं मिलता, तो यह गलत होगा।
उन्होंने कहा कि जब विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार से पैसा निकाल रहे थे, तब घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने बाजार को सहारा दिया। ऐसे में टैक्स से जुड़ी किसी भी राहत में घरेलू निवेशकों के योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
म्यूचुअल फंड स्कीम बदलने पर क्यों होती है परेशानी?
गौरी चड्ढा के मुताबिक, एक म्यूचुअल फंड स्कीम से दूसरी स्कीम में बिना तुरंत टैक्स चुकाए पैसा ट्रांसफर करने का प्रस्ताव काफी अच्छा है।
कई बार निवेशक अपने पोर्टफोलियो में बदलाव करना चाहते हैं। उदाहरण के लिए, कोई निवेशक स्मॉलकैप फंड से लार्जकैप फंड या इक्विटी से डेट फंड में पैसा लगाना चाहता है। लेकिन टैक्स लगने की वजह से वह ऐसा करने से बचता है।
उनका कहना है कि निवेशक अपना पैसा बाजार से बाहर नहीं निकालना चाहता, बल्कि बेहतर तरीके से निवेश करना चाहता है। इसके बावजूद टैक्स का बोझ उसके फैसले में रुकावट बन जाता है।
पैसा निकालने के बाद दोबारा निवेश नहीं करते कई लोग
गौरी चड्ढा ने अपने क्लाइंट्स के अनुभव के आधार पर बताया कि कई निवेशक म्यूचुअल फंड से पैसा निकालने के बाद दोबारा बाजार में जल्दी निवेश नहीं करते।
कुछ लोग बाजार में गिरावट का इंतजार करने लगते हैं, जबकि कुछ अपना पैसा फिक्स्ड डिपॉजिट यानी FD में लगा देते हैं। इससे लंबे समय तक निवेश बनाए रखने और कंपाउंडिंग का फायदा उठाने का मौका प्रभावित हो सकता है।
फंड कंपनियों पर भी बढ़ेगा बेहतर रिटर्न देने का दबाव
गौरी चड्ढा के मुताबिक, अगर म्यूचुअल फंड स्कीम बदलना आसान हो जाता है, तो इसका असर फंड कंपनियों पर भी पड़ेगा।
निवेशक खराब प्रदर्शन करने वाली स्कीम से आसानी से पैसा निकालकर बेहतर प्रदर्शन वाली स्कीम में लगा सकेंगे। इससे फंड हाउस के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है।
कुल मिलाकर, यह प्रस्ताव केवल टैक्स राहत तक सीमित नहीं है। इससे निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो को बेहतर तरीके से संभालने, लंबे समय तक बाजार में बने रहने और निवेश से जुड़े फैसले आसानी से लेने में मदद मिल सकती है।

