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एक साथ पूरा पैसा शेयर बाजार में लगाना सही या बड़ी गलती? जानें एक्सपर्ट की राय

शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच क्या एकमुश्त बड़ी रकम निवेश करना सही फैसला होगा? अगर आप भी बाजार में रिकवरी की उम्मीद देखकर पैसा लगाने की सोच रहे हैं, तो एक्सपर्ट शरद टंडन की सलाह आपके काम आ सकती है। जानिए निवेश से पहले किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है।

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In Short

  • बाजार में रिकवरी की उम्मीद देखकर पूरी रकम इक्विटी में लगाने से बचने की सलाह।
  • बैंक या लिक्विड फंड में ₹20-30 लाख होने पर निवेशक की जोखिम उठाने की क्षमता ज्यादा हो सकती है।
  • सिर्फ 1-2 साल के निवेश के लिए स्मॉलकैप और मिडकैप में ज्यादा जोखिम लेने से बचें।

 शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच अगर आप भी एकमुश्त बड़ी रकम निवेश करने की सोच रहे हैं, तो जल्दबाजी करना भारी पड़ सकता है। बिजनेस टुडे के शो में सीनियर एंकर साक्षी बत्रा के सवालों का जवाब देते हुए Invest at Ease के फाउंडर शरद टंडन ने कहा कि बाजार में रिकवरी की उम्मीद देखकर पूरा पैसा इक्विटी में लगाना सही रणनीति नहीं है। निवेश से पहले अपनी जोखिम उठाने की क्षमता, जरूरत और निवेश की अवधि को समझना बेहद जरूरी है।

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निवेश से पहले एसेट एलोकेशन क्यों जरूरी?

शरद टंडन के मुताबिक, रिटेल निवेशकों के लिए एसेट एलोकेशन यानी अलग-अलग जगह पैसा बांटकर निवेश करना सबसे जरूरी है। खासकर ऐसे समय में जब लंबी गिरावट के बाद बाजार में रिकवरी की उम्मीद बन रही हो।

उन्होंने कहा कि फाइनेंशियल प्लानिंग और एसेट एलोकेशन का एक ही फॉर्मूला सभी निवेशकों पर लागू नहीं होता। हर व्यक्ति की आर्थिक स्थिति और जोखिम उठाने की क्षमता अलग होती है। इसलिए निवेश का पोर्टफोलियो भी उसकी जरूरतों के हिसाब से तैयार होना चाहिए।

बैंक में ₹20-30 लाख हैं तो कितना जोखिम ले सकते हैं?

शरद टंडन ने बताया कि अगर किसी निवेशक के पास पहले से बैंक एफडी, सेविंग अकाउंट या लिक्विड फंड में ₹20-30 लाख रखे हैं, तो उसकी जोखिम उठाने की क्षमता ज्यादा हो सकती है।

वहीं, जिस व्यक्ति के पास इमरजेंसी के लिए अलग से पैसा नहीं है, उसे ज्यादा जोखिम लेने से बचना चाहिए।

उनके मुताबिक, बैंक या लिक्विड फंड में पर्याप्त पैसा होने से निवेशक बाजार के उतार-चढ़ाव का बेहतर तरीके से सामना कर सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं कि वह बिना सोचे-समझे कहीं भी निवेश कर दे।

1-2 साल के लिए पैसा लगाना है तो इन फंड्स से बचें

शरद टंडन ने साफ कहा कि अगर कोई निवेशक सिर्फ 12 से 24 महीने के लिए पैसा लगाना चाहता है, तो उसे स्मॉलकैप और मिडकैप जैसे ज्यादा उतार-चढ़ाव वाले सेगमेंट में आक्रामक निवेश नहीं करना चाहिए।

लेकिन अगर निवेश का लक्ष्य 5 से 7 साल का है, तो निवेशक ज्यादा जोखिम वाले सेगमेंट पर विचार कर सकता है। हालांकि, इसके लिए पहले इमरजेंसी फंड तैयार होना जरूरी है।

निवेशकों के लिए क्या है सबसे बड़ी सीख?

शरद टंडन के मुताबिक, निवेशकों को बाजार के सबसे निचले स्तर पर पैसा लगाने की कोशिश करने के बजाय सही एसेट एलोकेशन पर ध्यान देना चाहिए।

उनकी सलाह है कि पहले अपनी जरूरतों के लिए सुरक्षित रकम अलग रखें और उसके बाद लंबी अवधि के निवेश की योजना बनाएं। सही निवेश वही है, जो आपकी आर्थिक स्थिति, जोखिम उठाने की क्षमता और भविष्य के लक्ष्यों के मुताबिक हो।

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Disclaimer: म्यूचुअल फंड्स निवेश बाज़ार जोखिमों के अधीन है। ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। BT Bazaar अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है।