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अपने Goal पर आधारित म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो कैसे बनाएं? जानिए पूरी डिटेल

म्यूचुअल फंड में निवेश करते समय सिर्फ अच्छे फंड चुनना काफी नहीं है। सही रणनीति यह है कि निवेश को अपने वित्तीय लक्ष्यों से जोड़ा जाए। Goal Based Investing से यह तय करना आसान होता है कि किस लक्ष्य के लिए कितना जोखिम लेना है, Equity, Debt या Hybrid Fund में कितना निवेश करना चाहिए और कब Portfolio में बदलाव करना जरूरी है।

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सही Goal के बिना अधूरा है आपका Investment Plan
सही Goal के बिना अधूरा है आपका Investment Plan

In Short

  • लक्ष्य और समय सीमा के हिसाब से बनाएं Mutual Fund Portfolio
  • Short Term Goals के लिए Debt और Long Term Goals के लिए Equity पर करें फोकस
  • SIP को अलग-अलग वित्तीय लक्ष्यों से जोड़कर निवेश को करें आसान और ट्रैकable

म्यूचुअल फंड में निवेश करते समय सिर्फ अच्छे फंड चुनना ही काफी नहीं होता। सही तरीका यह है कि पहले अपने वित्तीय लक्ष्य तय करें और फिर उसी के हिसाब से निवेश का प्लान बनाएं। Goal Based Investing में हर निवेश को किसी खास जरूरत से जोड़ा जाता है, जैसे बच्चों की पढ़ाई, घर खरीदना, इमरजेंसी फंड या रिटायरमेंट की तैयारी।

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अगर निवेश बिना किसी लक्ष्य के किया जाए तो यह समझना मुश्किल हो जाता है कि कितना जोखिम लेना चाहिए और निवेश सही दिशा में बढ़ रहा है या नहीं। इसलिए पहले लक्ष्य, समय सीमा और जोखिम क्षमता को समझना जरूरी है।

समय के हिसाब से तय करें निवेश का तरीका

म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो बनाते समय अपने लक्ष्यों को तीन हिस्सों में बांटा जा सकता है। 3 साल से कम अवधि वाले लक्ष्य शॉर्ट टर्म, 3 से 7 साल वाले लक्ष्य मीडियम टर्म और 7 साल या उससे ज्यादा अवधि वाले लक्ष्य लॉन्ग टर्म माने जाते हैं।

शॉर्ट टर्म जरूरतों के लिए निवेश में सुरक्षा और पैसे की उपलब्धता ज्यादा जरूरी होती है। वहीं लंबे समय के लक्ष्यों के लिए, जोखिम लेने की क्षमता होने पर इक्विटी में ज्यादा निवेश किया जा सकता है।

Equity Debt Allocation कैसे तय करें?

निवेश में Equity और Debt का सही संतुलन बनाना जरूरी है। एक आम तरीका 100 माइनस उम्र का नियम है। जैसे अगर किसी निवेशक की उम्र 30 साल है तो 100-30 यानी 70 फीसदी तक इक्विटी में निवेश का संकेत मिलता है।

हालांकि यह सिर्फ एक शुरुआती तरीका है। निवेश का सही अनुपात उम्र के साथ-साथ आपकी आय, जोखिम लेने की क्षमता, परिवार की जिम्मेदारियों और लक्ष्य की समय सीमा पर निर्भर करता है।

हर लक्ष्य के लिए अलग SIP रखें

Goal Based Portfolio में हर SIP को किसी खास लक्ष्य से जोड़ना बेहतर माना जाता है। जैसे रिटायरमेंट के लिए अलग SIP और बच्चों की शिक्षा के लिए अलग SIP। इससे निवेश को ट्रैक करना आसान होता है और पता चलता रहता है कि कौन सा लक्ष्य कितना करीब पहुंचा है।

समय-समय पर करें Portfolio Review

निवेश शुरू करने के बाद समय-समय पर पोर्टफोलियो की समीक्षा करना जरूरी है। आय, लक्ष्य, जिम्मेदारियां या जोखिम क्षमता बदलने पर निवेश में बदलाव और Rebalancing की जरूरत पड़ सकती है। सही लक्ष्य आधारित रणनीति से म्यूचुअल फंड निवेश को ज्यादा व्यवस्थित बनाया जा सकता है।

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Disclaimer: म्यूचुअल फंड्स निवेश बाज़ार जोखिमों के अधीन है। ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। BT Bazaar अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है।