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Mutual Fund से ₹1 लाख निकालने पर कितना टैक्स लगेगा? जानिए मुनाफे पर टैक्स का पूरा हिसाब

म्यूचुअल फंड से ₹1 लाख निकालने पर क्या पूरी रकम पर टैक्स लगेगा या सिर्फ मुनाफे पर? इसका जवाब आपके फंड के प्रकार और निवेश की अवधि पर निर्भर करता है। जानिए इक्विटी और डेट फंड से पैसे निकालने पर टैक्स कैसे तय होता है और किन मामलों में छूट मिल सकती है।

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Mutual Fund से ₹1 लाख निकालने पर कितना टैक्स लगेगा?
Mutual Fund से ₹1 लाख निकालने पर कितना टैक्स लगेगा?

In Short

  • म्यूचुअल फंड से निकाली गई पूरी रकम पर नहीं, आमतौर पर उसमें शामिल मुनाफे पर टैक्स लगता है
  • इक्विटी फंड के पात्र लॉन्ग टर्म मुनाफे पर एक वित्त वर्ष में ₹1.25 लाख तक की छूट मिलती है
  • टैक्स की रकम फंड के प्रकार, निवेश की अवधि और कुल कैपिटल गेन पर निर्भर करती है

म्यूचुअल फंड में निवेश करने वाले कई लोगों को लगता है कि अगर वे अपने फंड से ₹1 लाख निकालते हैं, तो पूरी रकम पर टैक्स देना होगा। लेकिन ऐसा नहीं है। टैक्स आमतौर पर निकाली गई पूरी रकम पर नहीं, बल्कि उसमें शामिल मुनाफे पर लगता है। टैक्स कितना होगा, यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि आपने किस तरह के म्यूचुअल फंड में निवेश किया है और निवेश कितने समय तक रखा है।

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₹1 लाख निकालने पर टैक्स कैसे लगेगा?

मान लीजिए, आपने म्यूचुअल फंड में ₹80,000 लगाए थे। कुछ समय बाद उसकी कीमत ₹1 लाख हो गई और आपने पूरा निवेश निकाल लिया। इस स्थिति में आपका मुनाफा ₹20,000 है। टैक्स की गणना ₹1 लाख के बजाय इस ₹20,000 के मुनाफे पर होगी।

अगर आपने किसी बड़े निवेश में से केवल ₹1 लाख निकाले हैं, तो उस निकासी में शामिल निवेश की मूल रकम और मुनाफे का हिसाब अलग होगा।

Equity Mutual Fund से पैसे निकालने पर कितना टैक्स?

अगर आपने इक्विटी म्यूचुअल फंड की यूनिट्स 12 महीने से ज्यादा रखी हैं, तो उनसे मिलने वाला मुनाफा लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) माना जाता है। ऐसे इक्विटी फंड और शेयरों से एक वित्त वर्ष में कुल ₹1.25 लाख तक के पात्र लॉन्ग टर्म मुनाफे पर टैक्स नहीं लगता। इससे ज्यादा मुनाफे पर 12.5% टैक्स लगता है। लागू सेस और सरचार्ज अलग से जुड़ सकते हैं। 

यानी अगर आपने एक साल से ज्यादा पुराने इक्विटी फंड से ₹1 लाख निकाले और उसमें ₹20,000 मुनाफा है, तो इस निकासी पर LTCG टैक्स नहीं लगेगा, बशर्ते उसी वित्त वर्ष में आपके अन्य पात्र शेयरों और इक्विटी फंड से हुए मुनाफे को जोड़ने के बाद भी कुल रकम ₹1.25 लाख से अधिक न हो।

वहीं, इक्विटी फंड की यूनिट्स 12 महीने या उससे कम समय में बेचने पर मुनाफे पर सामान्यतः 20% शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG) टैक्स लगता है। उदाहरण के लिए, ₹20,000 के मुनाफे पर बेस टैक्स ₹4,000 होगा। इस पर लागू सेस और सरचार्ज अलग हो सकते हैं। 

Debt Mutual Fund में क्या नियम हैं?

डेट म्यूचुअल फंड के टैक्स नियम अलग हैं। 1 अप्रैल 2023 या उसके बाद खरीदी गई ऐसी निर्दिष्ट डेट फंड यूनिट्स पर मुनाफा, निवेश कितने भी समय तक रखा गया हो, शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन माना जाता है। इस पर निवेशक की लागू इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है। 

ध्यान रखें: ₹1 लाख की निकासी पर सबके लिए एक जैसा टैक्स नहीं है। सही हिसाब लगाने के लिए फंड का प्रकार, यूनिट्स खरीदने और बेचने की तारीख, निकासी में शामिल मुनाफा और उसी साल के दूसरे कैपिटल गेन देखना जरूरी है।

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Disclaimer: म्यूचुअल फंड्स निवेश बाज़ार जोखिमों के अधीन है। ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। BT Bazaar अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है।