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ETF में निवेश करते समय न करें ये गलतियां! , एक्सपर्ट ने बताया कमाई का सही तरीका

ETF और BEES में निवेश करने वालों के लिए एक्सपर्ट शरद कोहली ने अहम सलाह दी है। उन्होंने बताया कि सही सेक्टर चुनने के बावजूद निवेशकों को नुकसान क्यों हो सकता है और बार-बार ट्रेडिंग कैसे मुनाफे पर असर डाल सकती है। जानिए ETF में निवेश करते समय किन गलतियों से बचना जरूरी है।

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In Short

  • ETF में निवेश से पहले सेक्टर की रिसर्च जरूरी, कमजोर प्रदर्शन से रिटर्न पर पड़ सकता है असर।
  • एक ही सेक्टर के ETF में पूरा पैसा लगाने के बजाय अलग-अलग सेक्टर में निवेश से कम हो सकता है जोखिम।
  • - ETF में बार-बार ट्रेडिंग करने से मुनाफे पर पड़ सकता है असर, एक्सपर्ट ने दी लंबी अवधि तक निवेश की सलाह।

शेयर बाजार में निवेश करने वालों के बीच ETF और BEES तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। कई निवेशक इनमें पैसा लगाकर अच्छा रिटर्न कमाना चाहते हैं। लेकिन ETF में निवेश करना जितना आसान दिखता है, उतना ही जरूरी इससे जुड़े जोखिम को समझना भी है। खासकर जब बात अलग-अलग सेक्टर में पैसा लगाने और सही समय तक निवेश बनाए रखने की हो। ऐसे में सवाल उठता है कि ETF चुनते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए और बार-बार ट्रेडिंग करने से क्यों बचना चाहिए?

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बिजनेस टुडे के शो में सीनियर एंकर साक्षी बत्रा के सवालों का जवाब देते हुए KCC ग्रुप के फाउंडर और चेयरमैन शरद कोहली ने कहा कि ETF में निवेश करने से पहले उस सेक्टर की अच्छी तरह रिसर्च करनी चाहिए। उन्होंने समझाया कि अगर कोई निवेशक FMCG, डिफेंस या IT सेक्टर के ETF में पैसा लगाता है, तो उसका रिटर्न इस बात पर निर्भर करेगा कि आने वाले महीनों में वह सेक्टर कैसा प्रदर्शन करता है।

कोहली के मुताबिक, भले ही फंड मैनेजर ETF में शामिल कंपनियों के शेयर सोच-समझकर चुनें, लेकिन अगर पूरा सेक्टर कमजोर चल रहा है, तो ETF के रिटर्न पर भी असर पड़ सकता है।

एक ही ETF में पूरा पैसा लगाने से बचें

शरद कोहली ने बताया कि निवेशकों को सिर्फ एक सेक्टर के ETF पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। शेयर बाजार में अलग-अलग समय पर अलग-अलग सेक्टर अच्छा प्रदर्शन करते हैं। कभी डिफेंस में तेजी आती है, तो कभी FMCG, IT, रिन्यूएबल एनर्जी या ऑटोमोबाइल सेक्टर बेहतर प्रदर्शन करता है।

ऐसे में अलग-अलग सेक्टर के ETF में पैसा लगाने से जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है। अगर एक सेक्टर में गिरावट आती है, तो दूसरे सेक्टर का बेहतर प्रदर्शन पोर्टफोलियो को सहारा दे सकता है।

प्रतीकात्मक तस्वीर

BEES में निवेश करते समय भी रखें ध्यान

कोहली के मुताबिक, BEES यानी बेंचमार्क एक्सचेंज ट्रेडेड स्कीम में निवेश करते समय भी सही बेंचमार्क चुनना जरूरी है। उदाहरण के लिए, NIFTY 50 BEES में निवेश करने से निवेशकों को इंडेक्स में शामिल अलग-अलग कंपनियों में पैसा लगाने का मौका मिलता है।

हालांकि, सेक्टर आधारित BEES में उस इंडस्ट्री की स्थिति समझना जरूरी है। उन्होंने IT सेक्टर का उदाहरण देते हुए बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी चिंताओं के कारण इस सेक्टर में दबाव देखने को मिला था, जिसके बाद रिकवरी भी हुई।

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ETF में बार-बार ट्रेडिंग क्यों पड़ सकती है भारी?

शरद कोहली ने निवेशकों को ETF में बार-बार ट्रेडिंग करने से बचने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि ETF को शेयरों की तरह बाजार खुलने के दौरान खरीदा और बेचा जा सकता है, लेकिन छोटे-छोटे मुनाफे के लिए लगातार ट्रेडिंग करना सही रणनीति नहीं हो सकती।

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उनके मुताबिक, ट्रेडिंग से मिलने वाला छोटा मुनाफा एक्सपेंस रेशियो जैसे खर्चों से प्रभावित हो सकता है। इसलिए ETF को म्यूचुअल फंड की तरह लंबी अवधि के निवेश के नजरिए से देखना बेहतर हो सकता है।

Disclaimer: म्यूचुअल फंड्स निवेश बाज़ार जोखिमों के अधीन है। ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। BT Bazaar अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है।