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कितनी मेहनत करते हैं आप, जिससे आपकी कमाई बढ़ सके?

कितनी मेहनत करते हैं आप? हर वो कोशिश करते हैं, जिससे आपकी कमाई बढ़ सके। लेकिन अब एक कड़वा सच सुनिए। आप शायद कमाना तो जानते हैं लेकिन बचाना नहीं। क्योंकि जितना आप कमाते हैं उसमें से एक बड़ी रकम तो टैक्स के तौर पर गंवा देते हैं। जी हां ये सच है... आज भी बहुत लोग जानकारी के अभाव में या फिर लापरवाही के चलते अच्छी खासी रकम टैक्स के तौर पर चुका देते है, जो वो बचा सकते थे। हम ये नहीं कह रहे टैक्स चुकाना गलत है। लेकिन जो आपकी मेहनत की कमाई बच सकती है वो तो बचाइये। इसलिए आज हम आपको सालाना 12 लाख तक की कमाई पर जीरो टैक्स करने का शानदार तरीका बताएंगे। और ये भी समझ लीजिए हम उन्हीं टैक्स छूट की बात करेंगे जिसका सीधे तौर पर आपका सरोकार है...

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कितनी मेहनत करते हैं आप, जिससे आपकी कमाई बढ़ सके?

कितनी मेहनत करते हैं आप? हर वो कोशिश करते हैं, जिससे आपकी कमाई बढ़ सके। लेकिन अब एक कड़वा सच सुनिए। आप शायद कमाना तो जानते हैं लेकिन बचाना नहीं। क्योंकि जितना आप कमाते हैं उसमें से एक बड़ी रकम तो टैक्स के तौर पर गंवा देते हैं। जी हां ये सच है, आज भी बहुत लोग जानकारी के अभाव में या फिर लापरवाही के चलते अच्छी खासी रकम टैक्स के तौर पर चुका देते है, जो वो बचा सकते थे। हम ये नहीं कह रहे टैक्स चुकाना गलत है। लेकिन जो आपकी मेहनत की कमाई बच सकती है वो तो बचाइये। इसलिए आज हम आपको सालाना 12 लाख तक की कमाई पर जीरो टैक्स करने का शानदार तरीका बताएंगे। और ये भी समझ लीजिए हम उन्हीं टैक्स छूट की बात करेंगे जिसका सीधे तौर पर आपका सरोकार है।

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इसके लिए हम एक एग्जाम्प्ल लेकर चलते हैं। हमने एक करैक्टर चुना है जिसका नाम राम है। उसकी सालाना सैलरी 12 लाख रुपए है। टैक्स का नाम सुनते ही राम को भी उतनी ही टेंशन होती है जितनी आपको होती है। राम की सैलरी पर कैलकुलेशन शुरू करें तो उससे पहले आप कुछ बेसिक नियम जान लीजिए। 

हम जो भी सालाना आधार पर कमाई करते हैं सरकार उस पर टैक्स काटती है। अब सवाल उठता है किस आधार पर टैक्स काटा जाता है। तो इसके लिए टैक्स स्लैब बनाए गए हैं। जैसे 5%, 20%, 30%...ये पुरानी टैक्स व्यवस्था है। नई टैक्स व्यवस्था पर फिर दोबारा बात करेंगे। नियम के तहत अगर आपकी सालाना आय 2.5 लाख तक है तो आपको कोई टैक्स नहीं चुकाना होगा। लेकिन अगर आपकी सालाना आय 2.5 लाख से 5 लाख के बीच है, तो आपको 5 प्रतिशत के हिसाब से टैक्स देना होगा। इस हिसाब से ढाई लाख पर 5 प्रतिशत टैक्स बनेगा यानि की 12,500 रुपए। 

2.5 लाख - 5 लाख = 2.5 लाख
2.5 लाख X 5
------------------ = 12,500 रुपए

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अब यहां आप 12,500 रुपए टैक्स चुकाने से भी बच सकते हैं। कैसे? सेक्शन 87A की रिबेट के जरिए। इस छूट के तहत आपके 12,500 रुपए पर टैक्स, ZERO हो जाएगा। यानि 5 लाख तक की कमाई पर आपको कोई टैक्स नहीं चुकाना। अब राम को ये तो समझ में आ गया कि 12 लाख में से 5 लाख पर उसे कोई टैक्स नहीं चुकाना, लेकिन अब राम को ये देखना है कि 7 लाख पर कैसे टैक्स बचाएं।  

12 लाख - 5 लाख = 7 लाख रुपये

अब बात करते हैं स्टैंडर्ड डिडक्शन की, नियम के तहत हर नौकरीपेशा और पेंशनर्स को कुल इनकम में से 50,000 रुपए तक की रकम पर टैक्‍स की देनदारी कम करने का मौका मिलता है। इस लिहाज से राम की 7 लाख की आय में से 50 हजार घटाएंगे तो साढे 6 लाख रह जाएगा।

स्टैंडर्ड डिडक्शन    50,000  
7 लाख -  50,000  = 6.50 लाख

इसके बाद राम ने सोचा कि सबसे पॉपुलर सेक्शन 80C के बारे में भी पूरी जानकारी ले ली जाए, तो राम को पता चला कि इस सेक्शन में ढेरों टैक्स छूट के विकल्प हैं। जैसे LIC, पब्लिक प्रोविडेड फंड, इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम, ULIP, होम लोन का प्रिंसपिल अमाउंट, फिक्स्ड डिपॉजिट, सुकन्य समृद्धि योजना, नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट और भी ढेरों विकल्प। ऐसे में राम ने 80C में 1.5 लाख रुपये निवेश कर दिए, क्योंकि इसकी अधिकतम सीमा डेढ लाख ही है। तो इस हिसाब से साढ़े 6 लाख में से डेढ लाख घटाए तो रह गए 5 लाख रुपये, लेकिन 5 लाख पर टैक्स क्यों चुकाया जाए, जब बचाया जा सकता है। 

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6.50 लाख - 1.50 लाख = 5 लाख रुपये

अब राम की ठीक-ठाक सैलरी थी, तो राम ने घर भी खरीदा हुआ था। जिस पर EMI जा रही थी। तो राम को सेक्शन 24B के बारे में पता चला, जिसके तहत हर साल होम लोन पर अदा की जाने वाली EMI के ब्याज पर अधिकतम 2 लाख तक की छूट मिलती है। यानि 5 लाख में से 2 लाख और घटा दिया जाए, तो ये 3 लाख रुपए रह जाएंगे। 

5 लाख - 2 लाख = 3 लाख रुपये

अब राम ने सोचा 60 के बाद भी तो ठाठ लेने जरूरी है। तो इसकी भी व्यवस्था लगे हाथों कर लेते हैं और साथ ही ऐसी कोई स्कीम चुन लेते हैं, जो टैक्स बचत भी करा दे। तो राम ने सेक्शन 80CCD (Ib) के तहत आने वाली नेशनल पेंशन स्कीम यानि NPS को चुना। यहां पर राम को निवेश पर अधिकतम 50,000 की छूट भी मिल गई। आपको बता दें NPS में 80C के अलावा अतिरिक्त छूट मिलती है। इस हिसाब से ये हो गए 3 लाख में से 50 हजार घटे तो ढाई लाख।

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3 लाख - 50 हजार = 2.50 लाख

लेकिन अभी भी ढाई लाख की टेंशन थी, लेकिन राम समझदार था और कोरोना से सबक ले चुका था कि प्राइवेट नौकरी है तो अपने पूरे परिवार के लिए अनचाहे मेडिकल खर्चों से बचने का एक ही तरीका है, वो है मेडिकल इंश्योरेंस। तो राम ने पहले अपने और अपनी पत्नी, दो बच्चों के लिए पॉलिसी खरीदी। जिसके तहत राम अधिकतम इंश्योरेंस पॉलिसी के प्रीमियम पर 25 हजार तक की छूट मिल सकती है। उसके साथ ही राम के माता-पिता भी सीनियर सिटीजन थे और बढ़ती उम्र में कई तरह की गंभीर बीमारियां के इलाज के लिए वित्तीय बोझ से बचने के चलते राम ने अपने माता-पिता के लिए भी मेडिकल पॉलिसी खरीद ली। यहां पर राम, अधिकतम 50 हजार के प्रीमियम चुकाने पर टैक्स छूट क्लेम कर सकता है। तो 25 हजार और 50 हजार कुल मिलाकर हुए 75 हजार रुपए। यानि की ढाई लाख में से 75 हजार गए तो रह गए 1 लाख 75 हजार 

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25,000 + 50,000 = 75,000
2.50 लाख - 75,000 = 1.75 लाख रुपए

अब राम ने सोचा कि घर हो गया, बुढ़ापे के लिए तैयारी हो गई, मेडिकल इमरजेंसी के लिए भी प्लानिंग हो गई। जहां जरूरी चीजों में निवेश भी हो गया और उससे टैक्स बचत भी हो गई। लेकिन अभी भी 1.75 लाख बच रहे थे। तो राम ने इलेक्ट्रिक व्हीकल खरीदने का फैसला किया। जिसमें इनकम टैक्स के सेक्शन 80EEB के तहत 1 लाख 50 हजार रुपये तक का टैक्स छूट का फायदा उठाया जा सकता है। इस लिहाज से 1 लाख 75 हजार में से डेढ लाख को घटा दिया तो रह गए 25 हजार रुपए। 

1.75 लाख - 1.50 लाख = 25,000

अभी भी राम के पास कई विकल्प बचे हैं। राम ने एजुकेशन लोन लिया हुआ है। इस सेक्शन 80E के तहत अगर आप अपने लिए या बच्चों या पति/पत्नी के तौर पर किसी के लिए एजुकेशन लोन ले रहे हैं तो लोन के ब्याज भुगतान पर छूट मिलती है और इसकी कोई अधिकतम सीमा नहीं है। हालांकि लोन की EMI शुरू होने से 8 सालों तक ही आपको ये टैक्स छूट मिलेगी। इसलिए बेहतर होगा कि 8 सालों में ही पूरा लोन चुका दें।

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तो हम मान लेते हैं कि राम ने 5 लाख का एजुकेशन लोन लिया है। इस लोन का अगर 10 प्रतिशत भी ब्याज बना तो 50,000 रुपये की टैक्स बचत राम को मिल जाएगी। इस हिसाब से राम का अब टैक्स Zero हो गया। ऊपर से 25,000 एक्स्ट्रा ही बच गए। तो आपने देखा और समझा, थोड़ी सी समझदारी और जानकारी से कोई भी 12 लाख तक की कमाई पर टैक्स जीरो कर सकता है।