AI एजेंट्स से Zomato और Blinkit को कितना खतरा? दीपिंदर गोयल ने बताई अपनी रणनीति
AI एजेंट्स ऑनलाइन शॉपिंग और फूड डिलीवरी का तरीका बदल सकते हैं, लेकिन दीपिंदर गोयल का मानना है कि Zomato और Blinkit की ताकत सिर्फ उनके ऐप नहीं, बल्कि उनका मजबूत डिलीवरी नेटवर्क है। आखिर AI के दौर में ये प्लेटफॉर्म अपनी पकड़ कैसे बनाए रख सकते हैं?

In Short
- AI एजेंट्स के दौर में Zomato और Blinkit को डिलीवरी नेटवर्क का फायदा।
- Zomato पर 65% से ज्यादा ऐप ओपनिंग फूड एक्सप्लोरेशन के लिए।
- AI से District जैसे प्लेटफॉर्म पर ज्यादा असर पड़ने की आशंका।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल से ऑनलाइन शॉपिंग, फूड डिलीवरी और दूसरी डिजिटल सेवाओं का तरीका बदल सकता है। AI एजेंट्स की मदद से लोग बिना किसी ऐप को खोले ही खाना ऑर्डर करने, खरीदारी करने और बुकिंग जैसे काम कर सकेंगे। हालांकि, Eternal के सीईओ दीपिंदर गोयल का मानना है कि Zomato और Blinkit जैसे प्लेटफॉर्म इस बदलाव का सामना करने के लिए बेहतर स्थिति में हैं। कंपनी की दूसरी तिमाही की रिपोर्ट में उन्होंने इसकी वजह इन प्लेटफॉर्म्स का मजबूत डिलीवरी नेटवर्क और सामान पहुंचाने की व्यवस्था बताई है।
सिर्फ ऐप नहीं, डिलीवरी का पूरा नेटवर्क है असली ताकत
दीपिंदर गोयल के मुताबिक, फूड डिलीवरी का काम सिर्फ किसी रेस्टोरेंट को चुनने और ऑर्डर देने तक सीमित नहीं है। Zomato को रेस्टोरेंट की रसोई, डिलीवरी पार्टनर्स और ग्राहकों की मांग के बीच तालमेल बनाना पड़ता है।
इसी तरह Blinkit का कारोबार भी डार्क स्टोर्स, सामान की उपलब्धता, इन्वेंट्री मैनेजमेंट और तय समय में ऑर्डर की पैकिंग व डिलीवरी पर निर्भर करता है। AI एजेंट ग्राहक की ओर से ऑर्डर तो दे सकता है, लेकिन सामान उपलब्ध कराना, ऑर्डर तैयार करवाना और सही समय पर ग्राहक तक पहुंचाना अलग चुनौती है।
गोयल का मानना है कि इन प्लेटफॉर्म्स का मजबूत ऑपरेशनल नेटवर्क उन्हें AI के दौर में भी अहम बनाए रख सकता है।
खाना ऑर्डर करना सिर्फ जरूरत नहीं, पसंद का मामला भी
गोयल ने इस धारणा पर भी सवाल उठाया कि ग्राहक भविष्य में खाने का चुनाव पूरी तरह AI एजेंट्स पर छोड़ देंगे। उनके मुताबिक, Zomato ऐप के 65% से ज्यादा ओपन होने के पीछे खोजने और अलग-अलग विकल्प देखने की आदत है। ऑर्डर देने से पहले ग्राहक औसतन 12 मेन्यू और 100 से ज्यादा खाने की तस्वीरें देखते हैं।
इससे पता चलता है कि लोग केवल खाना मंगाना ही नहीं चाहते, बल्कि नए रेस्टोरेंट और डिशेज तलाशने में भी दिलचस्पी रखते हैं।
हालांकि, रोजाना एक ही खाना ऑर्डर करने या बार-बार खरीदी जाने वाली जरूरी चीजों को मंगाने जैसे काम AI एजेंट्स के लिए आसान हो सकते हैं। गोयल के अनुसार, Zomato और Blinkit पर ऐसे दोबारा ऑर्डर करने वाले कार्ट की हिस्सेदारी कम है। इन जरूरतों को ऐप के भीतर मौजूद AI असिस्टेंट भी पूरा कर सकते हैं।
कुछ डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ज्यादा असर संभव
गोयल के मुताबिक, AI का असर सभी डिजिटल कारोबारों पर एक जैसा नहीं होगा। District जैसे प्लेटफॉर्म पर इसका खतरा ज्यादा हो सकता है, क्योंकि रेस्टोरेंट की बुकिंग और इवेंट टिकट जैसी सेवाओं की उपलब्धता दूसरे माध्यमों से भी मिल सकती है। ऐसे में AI एजेंट दूसरे विकल्पों के जरिए सीधे बुकिंग कर सकता है।
वहीं, रिव्यू, रेटिंग और सुझावों पर आधारित प्लेटफॉर्म्स की बढ़त भी AI के कारण कमजोर पड़ सकती है।
AI से बदल सकता है ग्राहकों तक पहुंचने का तरीका
AI एजेंट्स के बढ़ने से ग्राहक उस प्लेटफॉर्म को प्राथमिकता दे सकते हैं, जहां बेहतर कीमत, सामान की उपलब्धता और भरोसेमंद डिलीवरी मिले। इससे कंपनियों के बीच मुकाबला बढ़ सकता है।
हालांकि, गोयल के मुताबिक, अगर ग्राहक सीधे ऐप के बजाय AI एजेंट के जरिए ऑर्डर करते हैं, तब भी Zomato और Blinkit जैसे प्लेटफॉर्म कारोबार का हिस्सा बने रह सकते हैं। इसके लिए उन्हें अपने डिलीवरी नेटवर्क को नए डिजिटल माध्यमों से जोड़ने और सेवाओं की गुणवत्ता बनाए रखने पर ध्यान देना होगा।

