अमेरिका-ईरान तनाव में अचानक आई नरमी से तेल बाजार को राहत, लेकिन क्रूड की कीमतों पर अभी भी मंडरा रहा बड़ा सवाल!
अमेरिका और ईरान के बीच अचानक थमे सैन्य हमलों ने ग्लोबल ऑयल मार्केट को बड़ी राहत दी है। कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट आई है, लेकिन अहम समुद्री रास्तों पर शिपिंग अभी भी सामान्य नहीं हुई। क्या यह राहत टिकेगी या फिर तेल के दाम दोबारा बढ़ेंगे?

In Short
- अमेरिका और ईरान के बीच दो दिनों से कोई नया सैन्य हमला नहीं होने के कारण क्रूड ऑयल की कीमतों में 5 प्रतिशत तक गिरावट आई।
- ब्रेंट क्रूड 92.41 डॉलर प्रति बैरल और WTI क्रूड 85.01 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया।
- होर्मुज जलडमरूमध्य से ऑयल शिपिंग अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है, इसलिए बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है।
US-Iran conflict: अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य तनाव में फिलहाल थोड़ी शांति देखने को मिल रही है। वीकेंड पर दोनों देशों की ओर से कोई नया हमला नहीं हुआ, जिससे इंटरनेशनल ऑयल मार्केट को राहत मिली है।
अब उम्मीद की जा रही है कि बातचीत के जरिए मिडिल ईस्ट का तनाव कम हो सकता है और जरूरी शिपिंग रूट फिर से सामान्य हो सकते हैं। इसी उम्मीद की वजह से सोमवार को क्रूड ऑयल की कीमतों में गिरावट देखने को मिली।
शुरुआती कारोबार में करीब 5% गिरा तेल
सोमवार को बाजार खुलते ही कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिली। ब्रेंट क्रूड 4.37 डॉलर यानी 4.52 प्रतिशत गिरकर 92.41 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।
वहीं अमेरिकी WTI क्रूड 4.30 डॉलर यानी 4.81% सस्ता होकर 85.01 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। लेकिन इस गिरावट के बाद तेल की कीमतें आखिर कितने नीचे पहुंच गईं?
एक हफ्ते के सबसे निचले स्तर पर पहुंचीं कीमतें
लगातार तीन हफ्ते तक बढ़ने के बाद ब्रेंट और WTI दोनों एक हफ्ते के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए। सितंबर वाला ब्रेंट कॉन्ट्रैक्ट 4.9% गिरकर 92.02 डॉलर प्रति बैरल रह गया। वहीं सितंबर वाला अमेरिकी क्रूड कॉन्ट्रैक्ट 5.6% टूटकर 84.34 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।
दो दिनों से नहीं हुआ कोई नया सैन्य हमला
पिछले दो दिनों से अमेरिका और ईरान ने फारस की खाड़ी में कोई नया हमला नहीं किया है। करीब दो हफ्ते तक लगातार हमले होने के बाद अब माहौल थोड़ा शांत हुआ है, जिससे तेल बाजार को राहत मिली है।
अमेरिका के राजदूत माइक वाल्ट्ज ने कहा कि राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने बातचीत के लिए समय देने के मकसद से हमले रोके हैं। अब सवाल है कि क्या दोनों देशों के बीच समझौता होने से तनाव और कम हो सकता है?
समझौता हुआ तो और कम हो सकता है तनाव
एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर 14-पॉइंट समझौते पर बात बन जाती है और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर हालात साफ हो जाते हैं, तो तनाव और कम हो सकता है। हाल के टकराव की वजह से ब्रेंट क्रूड की कीमत 102 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी,
जो मई के बाद सबसे ऊंचा स्तर था। लेकिन क्या हमले रुकने के बाद ऑयल शिपिंग भी पूरी तरह सामान्य हो गई है?
ऑयल शिपिंग अभी पूरी तरह सामान्य नहीं
हमले रुकने के बाद भी होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। Kpler के डेटा के मुताबिक वीकेंड के दौरान हर दिन 10 से भी कम ऑयल शिप इस रास्ते से गुजरे।
वहीं लाल सागर में हूथी विद्रोहियों के हमलों की वजह से बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य से भी कम जहाज निकले। आखिर होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के ऑयल मार्केट के लिए इतना जरूरी क्यों है?
दुनिया के 20 प्रतिशत तेल की सप्लाई वाला अहम रास्ता
दुनिया का करीब 20% तेल होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। फरवरी में अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद से यह रास्ता ग्लोबल ऑयल मार्केट के लिए बड़ा मुद्दा बना हुआ है। तेल की कीमतें पिछले हफ्ते के ऊंचे स्तर से नीचे जरूर आई हैं,
लेकिन टकराव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। इसी वजह से बाजार में डर और उलझन अब भी बनी हुई है।

