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मिडिल ईस्ट में फिर जंग भारत के लिए बढ़ीं मुश्किलें, जानें क्या 5 बड़े हो सकते है नुकसान

अमेरिका और ईरान के बीच दोबारा शुरू हुई जंग से भारत की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। होर्मुज स्ट्रेट में रुकावट आई तो तेल की सप्लाई प्रभावित होगी। जानिए भारत के लिए पांच बड़े नुकसान क्या हो सकते है।

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AI Generated Image

In Short

  • होर्मुज स्ट्रेट में रुकावट से भारत की तेल और गैस सप्लाई प्रभावित हो सकती है।
  • कच्चा तेल महंगा होने पर आयात बिल बढ़ेगा और पेट्रोल-डीजल सस्ता होने की उम्मीद घट सकती है।

US Iran war impact on India: अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई दोबारा शुरू होने से मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ गया है। अमेरिका ने बुधवार को ईरान के 90 ठिकानों को निशाना बनाया। इसके बाद होर्मुज स्ट्रेट में रुकावट का खतरा फिर बढ़ गया है।

दुनिया की करीब 20% तेल सप्लाई इसी समुद्री रास्ते से गुजरती है। ऐसे में इस जंग का असर भारत की तेल सप्लाई पर दिखाई दे सकता है।जानिए भारत के लिए पांच बड़े नुकसान क्या हो सकते है। 

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1) तेल और गैस की सप्लाई पर खतरा

भारत के लिए होर्मुज स्ट्रेट तेल और गैस की सप्लाई का अहम रास्ता है। युद्ध से पहले भारत के कुल कच्चे तेल आयात का करीब 40% और LNG का लगभग 60% इसी रास्ते से आता था।

पिछले संघर्ष के दौरान इस रास्ते में रुकावट आने से भारत में तेल और गैस की सप्लाई पर दबाव बढ़ा था। इसके बाद पेट्रोल-डीजल और LPG की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई थी। अगर दोबारा होर्मुज में आवाजाही प्रभावित होती है तो देश को फिर ऐसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

2) भारत का आयात बिल बढ़ सकता है

भारत अपनी जरूरत का करीब 85% कच्चा तेल दूसरे देशों से खरीदता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने का सीधा असर देश के खर्च पर पड़ता है।

होर्मुज स्ट्रेट बंद होने या सप्लाई रुकने से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है। इससे भारत का आयात बिल बढ़ेगा। ज्यादा डॉलर खर्च होने से रुपये पर दबाव पड़ सकता है और देश का चालू खाते का घाटा भी बढ़ सकता है।

3) पेट्रोल-डीजल सस्ता होने की उम्मीद कम

पिछले अमेरिका-ईरान संघर्ष के दौरान पेट्रोल और डीजल की कीमतों में चार बार बढ़ोतरी की गई थी। कुल मिलाकर ईंधन के दाम करीब 7 रुपये प्रति लीटर बढ़े थे। LPG की कीमतों में भी इजाफा हुआ था।

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सीजफायर के बाद कच्चे तेल की कीमतें नीचे आने से लोगों को पेट्रोल-डीजल सस्ता होने की उम्मीद थी। लेकिन जंग दोबारा शुरू होने और तेल महंगा होने से अब यह उम्मीद कमजोर पड़ सकती है।

4) महंगाई बढ़ने का डर

तेल महंगा होने पर ट्रांसपोर्ट और सामान पहुंचाने का खर्च बढ़ सकता है। ज्यादा आयात बिल से रुपये पर दबाव बढ़ेगा और विदेशों से आने वाला सामान महंगा हो सकता है। इसका असर रोजमर्रा की चीजों की कीमतों पर पड़ने का खतरा है।

5) शेयर बाजार पर भी दबाव

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जंग या किसी बड़े ग्लोबल संकट के समय निवेशक अक्सर सुरक्षित जगहों पर पैसा लगाते हैं। इससे शेयर बाजार में बिकवाली बढ़ सकती है।

डोनाल्ड ट्रंप के ईरान को लेकर सख्त बयान के बाद बुधवार को भारतीय शेयर बाजार में तेज गिरावट देखने को मिली थी। ऐसे में अमेरिका-ईरान युद्ध शेयर बाजार और विदेशी पोर्टफोलियो निवेश पर भी दबाव बढ़ा सकता है।