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UPI पेमेंट पर 0.4% चार्ज का विरोध तेज, इंदौर के लाखों व्यापारियों ने उठाया बड़ा कदम जानें क्या है मामला

UPI पेमेंट पर प्रस्तावित MDR शुल्क को लेकर इंदौर के व्यापारियों ने विरोध का रास्ता अपनाया है। बाजारों में स्कैनर ढककर नकद लेनदेन शुरू किया गया। आखिर नए नियम में क्या बदलाव होने वाला है और व्यापारी क्यों कर रहे हैं इसका विरोध, जानने के लिए पढ़ें पूरी खबर।

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In Short

  • इंदौर में 100 से ज्यादा व्यापार संगठनों ने UPI पेमेंट का विरोध करते हुए मनाया ‘नो UPI डे’
  • 15 अक्टूबर 2026 से 2,000 रुपये से ज्यादा के P2M UPI पेमेंट पर 0.4% MDR शुल्क प्रस्तावित
  • - भोपाल ग्वालियर और जबलपुर के व्यापारिक संगठनों ने भी नए शुल्क के खिलाफ उठाई आवाज़

UPI पेमेंट पर प्रस्तावित 0.4% Merchant Discount Rate (MDR) शुल्क के विरोध में इंदौर के व्यापारियों ने 23 सितंबर को ‘नो UPI डे’ मनाया। शहर के 100 से ज्यादा व्यापारिक संगठनों ने अपने पेमेंट स्कैनर को काले कपड़े से ढक दिया और डिजिटल पेमेंट बंद कर नकद लेनदेन शुरू कर दिया।

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यह प्रदर्शन अहिल्या चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के नेतृत्व में हुआ। यह संगठन 125 से ज्यादा स्थानीय व्यापार समूहों का प्रतिनिधित्व करता है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस अभियान में करीब दो लाख व्यापारियों ने हिस्सा लिया।

बड़े बाजारों में दिखा विरोध

इंदौर के सराफा, मराठिया, सियागंज किराना हब, कपड़ा और प्लाईवुड बाजारों में व्यापारियों ने UPI पेमेंट का विरोध किया। दुकानों के बाहर पोस्टर लगाए गए और सोशल मीडिया व कॉल सेंटर के जरिए ग्राहकों तक अभियान पहुंचाया गया।

व्यापारियों का कहना है कि नया शुल्क छोटे कारोबारियों के लिए परेशानी बढ़ा सकता है। अहिल्या चैंबर के अध्यक्ष रमेश खंडेलवाल ने कहा कि MDR शुल्क डिजिटल इंडिया अभियान के लिए बड़ी रुकावट बन सकता है। उन्होंने बताया कि व्यापारी इस फैसले का विरोध कर रहे हैं।

2,000 रुपये से ज्यादा के UPI पेमेंट पर शुल्क का विरोध

प्रस्तावित नियमों के अनुसार, 15 अक्टूबर 2026 से 2,000 रुपये से ज्यादा के Person-to-Merchant (P2M) UPI पेमेंट पर 0.4% शुल्क लगेगा। वहीं 2,000 रुपये तक के पेमेंट पर कोई MDR नहीं होगा।

व्यापारियों ने कहा है कि वे 15 अक्टूबर तक UPI स्वीकार करेंगे, लेकिन अगर MDR व्यवस्था वापस नहीं ली गई तो वे 2,000 रुपये से ज्यादा के डिजिटल पेमेंट को सीमित कर नकद भुगतान की मांग करेंगे।

इंदौर रिटेल गारमेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष और अहिल्या चैंबर के संयुक्त सचिव अक्षय जैन ने कहा कि रिटेल कारोबार कम मार्जिन पर चलता है और ट्रांजैक्शन शुल्क का बोझ व्यापारियों के लिए मुश्किल पैदा करेगा।

Image Credit: AajTak

दूसरे शहरों में भी विरोध तेज

इंदौर के अलावा मध्य प्रदेश के दूसरे शहरों में भी व्यापारिक संगठनों ने विरोध शुरू किया है। भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने 23 सितंबर को बैठक कर केंद्र और राज्य सरकार से MDR शुल्क वापस लेने की मांग की।

ग्वालियर के रिटेल व्यापार संगठनों ने 22 सितंबर को 2,000 रुपये से ज्यादा के लेनदेन के लिए नकद भुगतान को बढ़ावा देने का फैसला किया। वहीं जबलपुर के थोक बाजारों में 20 सितंबर से पोस्टर अभियान शुरू किया गया।

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क्या है MDR शुल्क व्यवस्था

NPCI की ओर से 15 सितंबर 2026 को घोषित इस व्यवस्था के तहत 2,000 रुपये से ज्यादा के P2M बैंक अकाउंट UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4% MDR लागू होगा। 75,000 रुपये या उससे ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर यह शुल्क अधिकतम 300 रुपये तक सीमित रहेगा।

यह शुल्क व्यापारी से लिया जाएगा और पेमेंट ऐप या व्यापारी इसे ग्राहक से अलग से वसूल नहीं सकेंगे।

किन पेमेंट पर नहीं लगेगा MDR

व्यक्तियों के बीच होने वाले Person-to-Person (P2P) ट्रांसफर पूरी तरह मुफ्त रहेंगे। 2,000 रुपये तक के छोटे व्यापारिक पेमेंट पर भी कोई शुल्क नहीं लगेगा। छोटे व्यापारी, जिनकी UPI आय हर महीने 1 लाख रुपये तक है, उन्हें भी छूट दी गई है।

सरकार और NPCI के अनुसार, MDR से मिलने वाली राशि डिजिटल पेमेंट सिस्टम के सर्वर इंफ्रास्ट्रक्चर, फ्रॉड रोकथाम और नेटवर्क विस्तार में इस्तेमाल की जाएगी।