
23.2 अरब ट्रांजैक्शन और नया रिकॉर्ड, UPI ने दिखाया भारत के डिजिटल पेमेंट का दम
भारत का UPI सिस्टम अब सिर्फ देश में ही नहीं, बल्कि दुनियाभर में इंस्टेंट पेमेंट का उदाहरण बन रहा है। BCG की रिपोर्ट के मुताबिक, मई 2026 में UPI ने 23.2 अरब ट्रांजैक्शन किए। डिजिटल पेमेंट के इस विस्तार के साथ अब आगे की चुनौती ज्यादा वैल्यू वाले और ग्लोबल पेमेंट को बढ़ाने की है।

In Short
- भारत के UPI ने मई 2026 में 23.2 अरब ट्रांजैक्शन प्रोसेस कर बनाया बड़ा रिकॉर्ड।
- BCG रिपोर्ट के अनुसार, 137 देशों में अब 24/7 इंस्टेंट पेमेंट सेवाएं उपलब्ध हैं।
- UPI की बढ़ती पहुंच के बावजूद पेमेंट कंपनियों के लिए कमाई बढ़ाना बड़ी चुनौती बनी हुई है।
भारत का यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी UPI अब दुनिया के सबसे बड़े रियल टाइम पेमेंट सिस्टम में शामिल हो गया है। Boston Consulting Group (BCG) की “The Burden of Proof: Global Payments Report 2026” के मुताबिक, UPI ने मई 2026 में अकेले 23.2 अरब ट्रांजैक्शन प्रोसेस किए। यह आंकड़ा भारत के डिजिटल पेमेंट सिस्टम की बड़ी पहुंच को दिखाता है।
भारत के साथ ब्राजील और कोलंबिया भी चर्चा में
BCG की रिपोर्ट में भारत को ब्राजील और कोलंबिया के साथ उन देशों में रखा गया है, जहां इंस्टेंट पेमेंट सिस्टम ने बड़े स्तर पर जगह बनाई है। ब्राजील के Pix ने साल 2025 में करीब 80 अरब ट्रांजैक्शन प्रोसेस किए थे। वहीं, कोलंबिया के Bre-B सिस्टम ने अपने शुरुआती छह महीनों में 670 मिलियन से ज्यादा ट्रांजैक्शन दर्ज किए।
हालांकि, भारत का UPI एक महीने में ही 23.2 अरब ट्रांजैक्शन के साथ अपनी अलग पहचान बनाता है। यह देश में अकाउंट-टू-अकाउंट डिजिटल पेमेंट की बढ़ती लोकप्रियता को दिखाता है।
137 देशों में 24 घंटे इंस्टेंट पेमेंट सुविधा
रिपोर्ट के अनुसार, जून 2026 तक दुनिया के 137 देशों में लोगों और कारोबारियों को 24/7 इंस्टेंट पेमेंट सेवाएं उपलब्ध थीं। इन पेमेंट सिस्टम को पब्लिक, प्राइवेट और हाइब्रिड मॉडल के जरिए विकसित किया जा रहा है। कई देशों की सरकारें अब इनकी निगरानी, नियम बनाने या संचालन में भी भूमिका निभा रही हैं।

ट्रांजैक्शन बढ़े लेकिन कमाई की रफ्तार अलग
BCG ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि डिजिटल पेमेंट के ट्रांजैक्शन तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन पेमेंट कंपनियों की कमाई उसी रफ्तार से नहीं बढ़ रही है। भारत इसका एक उदाहरण है, जहां UPI रोजमर्रा के छोटे भुगतान में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है, जबकि ऑनलाइन ट्रांजैक्शन में क्रेडिट कार्ड की हिस्सेदारी भी बढ़ रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक, एशिया-पैसिफिक पेमेंट मार्केट 2030 तक हर साल करीब 5% की दर से बढ़ सकता है। वहीं, डिजिटल पेमेंट का विस्तार जारी रहने की उम्मीद है।
घरेलू पेमेंट सिस्टम से ग्लोबल कनेक्टिविटी तक
BCG का कहना है कि घरेलू इंस्टेंट पेमेंट सिस्टम और अकाउंट-टू-अकाउंट नेटवर्क अब ग्लोबल पेमेंट इंडस्ट्री को बदल रहे हैं। ये सिस्टम अंतरराष्ट्रीय पेमेंट नेटवर्क के ऑप्शन के रूप में मजबूत हो रहे हैं, खासकर घरेलू लेनदेन के लिए।
हालांकि, क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट, एडवांस ऑथेंटिकेशन, टोकनाइज्ड ट्रांजैक्शन और AI आधारित पेमेंट जैसे क्षेत्रों में अभी भी कई चुनौतियां हैं। ऐसे में अलग-अलग पेमेंट सिस्टम को जोड़ने की जरूरत बढ़ रही है।
आगे की चुनौती ज्यादा वैल्यू वाले पेमेंट की
BCG के अनुसार, ग्लोबल पेमेंट इंडस्ट्री की कमाई 2025 में करीब 2 ट्रिलियन डॉलर से बढ़कर 2030 तक 2.6 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है। हालांकि, ग्रोथ रेट करीब 5% सालाना रहने का अनुमान है।
भारत के लिए UPI का बड़ा ट्रांजैक्शन बेस एक मजबूत आधार है। अब अगला चरण इस नेटवर्क को ज्यादा वैल्यू वाले भुगतान, अंतरराष्ट्रीय लेनदेन और AI आधारित पेमेंट सिस्टम से जोड़ने का होगा।

