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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साइन किया नया कानून, क्या भारत को देना होगा 100% टैरिफ? जानें पूरा मामला

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों को लेकर नया कानून साइन किया है। इसके बाद भारत पर 100% टैरिफ की चर्चा तेज हो गई है। लेकिन क्या भारतीय सामान पर सीधे इतना टैरिफ लगेगा और रूसी तेल की खरीद पर इसका क्या असर होगा? जानिए पूरा मामला।

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In Short

  • Trump ने रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की ताकत देने वाले नए कानून पर हस्ताक्षर किए हैं।
  • भारत पर 100% टैरिफ अपने आप लागू नहीं होगा, यह कानून के तहत अधिकतम सीमा है।
  • रूसी तेल की खरीद घटने पर भारत का तेल आयात खर्च बढ़ सकता है और कई एक्सपोर्ट सेक्टर्स पर भी असर पड़ सकता है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस पर प्रतिबंधों से जुड़े नए कानून पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इसका नाम Lindsey O Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026 है। नया कानून अमेरिका को रूसी तेल और गैस खरीदने वाले देशों के खिलाफ अतिरिक्त कदम उठाने की ताकत देता है।

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भारत के लिए यह मामला अहम है क्योंकि रूसी तेल की खरीद से जुड़े अमेरिकी कदमों का असर भारत और अमेरिका के बीच व्यापार पर पड़ सकता है। हालांकि, नए कानून का मतलब यह नहीं है कि भारत से अमेरिका जाने वाले सामान पर अपने आप 100% टैरिफ लग गया है। कानून अधिकतम 100% तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का अधिकार देता है।

क्या भारत पर सीधे लगेगा 100% टैरिफ?

नहीं। 100% टैरिफ इस कानून के तहत अधिकतम सीमा है। इसे भारत पर अपने आप लागू होने वाला टैरिफ नहीं समझना चाहिए। अमेरिका का प्रशासन तय कर सकता है कि अतिरिक्त टैरिफ लगाया जाए या नहीं और उसकी दर कितनी हो।

कानून में अमेरिकी राष्ट्रपति को कुछ परिस्थितियों में राहत देने या कदमों को रोकने का अधिकार भी दिया गया है। इसलिए यह कानून अमेरिका के लिए बातचीत के दौरान एक महत्वपूर्ण जरिया भी बन सकता है।

भारत के तेल खर्च पर क्या हो सकता है असर?

रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों ने रूस पर प्रतिबंध लगाए थे। इसके बाद भारतीय रिफाइनरियों ने रूस से ज्यादा कच्चा तेल खरीदना शुरू किया था। रूसी तेल पर मिलने वाली कम कीमत भी भारतीय रिफाइनरियों के लिए फायदेमंद रही।

अगर भारतीय रिफाइनरियों को रूसी तेल की खरीद कम करनी पड़ती है, तो उन्हें दूसरे देशों से तेल खरीदना होगा। यह तेल पश्चिम एशिया, अमेरिका, अफ्रीका या दूसरे बाजारों से आ सकता है।

Image Credit : Aaj Tak

इसकी लागत ग्लोबल ऑयल प्राइस, माल ढुलाई के खर्च, उपलब्धता और रिफाइनरी की जरूरतों पर निर्भर करेगी। रूसी तेल से बड़ी दूरी बनने पर भारत का तेल आयात खर्च बढ़ सकता है और ट्रेड बैलेंस पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।

किन भारतीय सेक्टर्स पर पड़ सकता है असर?

अगर अमेरिका भारतीय सामान पर अतिरिक्त टैरिफ लगाता है, तो इसका असर सिर्फ तेल तक सीमित नहीं रहेगा। इंजीनियरिंग गुड्स, फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल और गारमेंट्स, केमिकल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, जेम्स एंड ज्वेलरी, पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स और दूसरे मैन्युफैक्चर्ड सामान इससे प्रभावित हो सकते हैं।

हालांकि, असली असर इस बात पर निर्भर करेगा कि टैरिफ कितना लगाया जाता है, किन प्रोडक्ट्स को इसमें शामिल किया जाता है और क्या कोई छूट मिलती है।

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क्या भारत रूसी तेल खरीदना बंद कर सकता है?

भारत दूसरे देशों से कच्चा तेल खरीद सकता है, लेकिन इसकी कीमत अहम होगी। भारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में सस्ती और भरोसेमंद सप्लाई जरूरी है।

भारत ने संकेत दिया है कि वह अमेरिकी कानून के असर का आकलन कर रहा है और अपने व्यापार और आर्थिक हितों की सुरक्षा के लिए कदम उठाएगा। नया कानून खुद भारत को किसी छूट के बदले रूसी तेल खरीदना बंद करने के लिए मजबूर नहीं करता। ऐसा कोई फैसला होता है तो वह Washington और New Delhi के बीच बातचीत से सामने आएगा।