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कच्चे तेल और लॉजिस्टिक्स खर्च से बढ़ी मुश्किल, हाईवे कॉन्ट्रैक्टर्स ने सरकार से मांगी राहत

नेशनल हाईवेज बिल्डर्स फेडरेशन ने सरकार से हाईवे कॉन्ट्रैक्टर्स और कंसेशनर्स को मिल रही राहत तीन महीने और बढ़ाने की मांग की है। NHBF चाहता है कि राहत 31 दिसंबर 2026 तक जारी रहे। फेडरेशन ने कच्चे तेल और लॉजिस्टिक्स खर्च में उतार-चढ़ाव को इसकी वजह बताया है।

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AI Generated Image

In Short

  • NHBF ने हाईवे कॉन्ट्रैक्टर्स को मिल रही राहत को तीन महीने और बढ़ाने की मांग की है।
  • फेडरेशन ने राहत को 31 दिसंबर 2026 तक जारी रखने की मांग सरकार से की है।
  • NHBF के मुताबिक, कच्चे तेल, फ्यूल और लॉजिस्टिक्स खर्च में उतार-चढ़ाव से कॉन्ट्रैक्टर्स पर दबाव बना हुआ है।

नेशनल हाईवेज बिल्डर्स फेडरेशन (NHBF) ने सरकार से हाईवे कॉन्ट्रैक्टर्स और कंसेशनर्स को दी जा रही राहत को तीन महीने और बढ़ाने की मांग की है। फिलहाल यह राहत 30 सितंबर तक है। NHBF चाहता है कि इसे 31 दिसंबर 2026 तक या बाजार के मौजूदा असामान्य हालात सामान्य होने तक जारी रखा जाए।

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फेडरेशन ने पश्चिम एशिया में बने भू-राजनीतिक हालात के बाद जारी अनिश्चितता को इसकी बड़ी वजह बताया है।

31 दिसंबर तक राहत बढ़ाने की मांग

NHBF ने सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की ओर से 1 अप्रैल, 17 अप्रैल, 25 अप्रैल, 18 मई और 29 जुलाई को जारी सर्कुलर के तहत दी गई राहत को आगे बढ़ाने की मांग की है।

फेडरेशन का कहना है कि इन राहत उपायों से कॉन्ट्रैक्टर्स और कंसेशनर्स को मदद मिली है। मुश्किल और अचानक बदले बाजार के हालात के बीच भी नेशनल हाईवे प्रोजेक्ट्स का काम जारी रखने में इन उपायों ने मदद की है।

कच्चे तेल और फ्यूल की कीमतों में उतार-चढ़ाव

NHBF के मुताबिक, जिन परिस्थितियों की वजह से राहत देने की जरूरत पड़ी थी, वे अभी भी बनी हुई हैं। कच्चे तेल की कीमतों और ईंधन की लागत में उतार-चढ़ाव जारी है।

इसके अलावा ट्रांसपोर्टेशन और लॉजिस्टिक्स का खर्च और सप्लाई चेन से जुड़ी चुनौतियां भी बनी हुई हैं। इनकी वजह से हाईवे प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे कॉन्ट्रैक्टर्स और कंसेशनर्स पर आर्थिक और कामकाज से जुड़ा दबाव बना हुआ है।

प्रोजेक्ट्स पर बढ़ सकता है आर्थिक दबाव

फेडरेशन ने कहा है कि अगर 30 सितंबर से इन राहत उपायों को बंद कर दिया जाता है और बाजार की स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नहीं आता है, तो चल रहे प्रोजेक्ट्स पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है।

प्रतीकात्मक तस्वीर

खास तौर पर कम मार्जिन पर चल रहे प्रोजेक्ट्स के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं। NHBF के मुताबिक, इससे ऐसे दावे और कॉन्ट्रैक्ट से जुड़े विवाद सामने आ सकते हैं, जिन्हें राहत जारी रखकर टाला जा सकता है। साथ ही प्रोजेक्ट्स में देरी होने का भी खतरा है।

मौजूदा शर्तों पर ही राहत जारी रखने की मांग

NHBF ने सरकार से कहा है कि राहत की अवधि बढ़ाई जाती है तो मौजूदा नियम और शर्तें ही लागू रखी जाएं। राहत के दायरे, पात्रता या इसे लागू करने के तरीके में कोई बदलाव न किया जाए।

फेडरेशन का कहना है कि राहत जारी रहने से कॉन्ट्रैक्टर्स और कंसेशनर्स को ज्यादा भरोसा मिलेगा। बाजार की अनिश्चितता के दौरान प्रोजेक्ट्स का काम बिना रुकावट जारी रखने, मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट्स की आर्थिक स्थिति बनाए रखने और महत्वपूर्ण नेशनल हाईवे प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा करने में भी मदद मिलेगी।

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